बिहार में बाढ़ का पानी घटा तो सामने आई तबाही: 700 से ज्यादा ग्रामीण सड़कें प्रभावित, 100 से अधिक पूरी तरह बहीं
गंगा-गंडक और सरयू का जलस्तर घटने के बाद भी परेशानी बरकरार; नाव सेवा बंद होने से कई गांवों का संपर्क मुश्किल, मरीजों और स्कूली बच्चों की बढ़ी दिक्कत

पटना। बिहार में गंगा, गंडक और सरयू समेत प्रमुख नदियों का जलस्तर घटने लगा है, लेकिन बाढ़ के बाद ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। पानी उतरने के बाद कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त मिली हैं और कुछ मार्ग पूरी तरह बह गए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन और जरूरी सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हुई है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बाढ़ के दौरान 700 से अधिक ग्रामीण सड़कें प्रभावित हुईं। इनमें 100 से ज्यादा सड़कें पूरी तरह बह गईं, जबकि करीब 400 सड़कों को 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान और लगभग 200 सड़कों को आंशिक क्षति बताई गई है।
पानी घटा, लेकिन गांवों का संपर्क नहीं जुड़ा
नदियों का पानी घटने के बाद कई इलाकों में नावों का संचालन भी बंद हो गया है। ऐसे में जिन गांवों का सड़क संपर्क बाढ़ के कारण टूट गया था, वहां लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। मरीजों को अस्पताल ले जाने और बच्चों के स्कूल पहुंचने में भी दिक्कतें सामने आ रही हैं।
वैशाली में हाजीपुर-राघोपुर मार्ग प्रभावित
वैशाली में हाजीपुर-राघोपुर मार्ग के प्रभावित होने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी पप्पू राय के मुताबिक, जरूरी काम के लिए कुछ लोगों को जोखिम उठाकर नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
सीवान में 50 परिवारों के सामने आवागमन का संकट
सीवान में सरयू नदी के जलस्तर बढ़ने के कारण भागर गांव से बिंद टोली दियारा जाने वाली सड़क प्रभावित हुई। स्थानीय जानकारी के अनुसार, सड़क पर पानी आने से करीब 50 परिवारों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
खगड़िया में कई जगह सड़कें बहीं
खगड़िया के परबत्ता क्षेत्र में मुरादपुर, माधवपुर और विशनपुर के बीच सड़क बहने की जानकारी सामने आई है। वहीं गोगरी के अरसैया दियारा में भी सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त बताया जा रहा है। रामपुर-बोरना मार्ग पर बड़े गड्ढे बनने से आवागमन जोखिम भरा हो गया है।
भागलपुर में पुराने टूटे पुलों से परेशानी
भागलपुर के पीरपैंती में चौखंडी और बाबूपुर के पुल पहले से क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब दो साल पहले क्षतिग्रस्त हुए इन पुलों का निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ है। काली प्रसाद गांव की सड़क भी बाढ़ के दौरान फिर से प्रभावित हुई है।
मुंगेर में हर साल करोड़ों का नुकसान
मुंगेर के निचले इलाकों में हर साल बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में सड़कें और पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आती है। स्थानीय आंकड़ों के अनुसार, हर वर्ष करीब 80 से 100 किलोमीटर सड़कें और 15 से 20 पुल-पुलिया प्रभावित होते हैं। इससे करीब 45 से 60 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान का अनुमान बताया जाता है।
स्थायी समाधान की जरूरत
बाढ़ के बाद सड़क और पुलों की मरम्मत के साथ-साथ दियारा और निचले इलाकों में लंबे समय तक टिकने वाले बुनियादी ढांचे की जरूरत पर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। हर साल बाढ़ से प्रभावित होने वाले इलाकों में जलनिकासी, सड़क निर्माण और पुल-पुलिया की मजबूती जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
पानी उतरने के बाद तत्काल राहत और मरम्मत के साथ यदि स्थायी आवागमन व्यवस्था विकसित की जाती है, तो मानसून के दौरान बार-बार टूटने वाले संपर्क मार्गों से होने वाली परेशानी को कम किया जा सकता है।




