सीआईपी की जमीन पर अतिक्रमण मामले में हाईकोर्ट सख्त
निदेशक से पूछा- कितनी जमीन मिली थी और अब कितनी बची है

Jharkhand High Court में गुरुवार को Central Institute of Psychiatry (सीआईपी) की जमीन पर अतिक्रमण मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने सीआईपी प्रशासन से जमीन से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है।
हाईकोर्ट ने मांगा पूरा रिकॉर्ड
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सीआईपी निदेशक से पूछा कि संस्थान को कुल कितनी जमीन आवंटित की गई थी और वर्तमान में कितनी जमीन उसके कब्जे में है।
अदालत ने यह भी पूछा कि किन-किन जगहों पर अतिक्रमण हुआ है और उसे हटाने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई।
147 एकड़ जमीन का हिसाब नहीं
सुनवाई के दौरान सामने आया कि सीआईपी के पास कुल 376.22 एकड़ जमीन थी, लेकिन वर्तमान में केवल 229.29 एकड़ जमीन ही संस्थान के कब्जे में है। करीब 147 एकड़ जमीन का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है और उस पर अतिक्रमण की आशंका जताई गई है।
महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब होने का दावा
याचिकाकर्ता विकास चंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि सीआईपी के पास अपनी अधिग्रहित जमीन का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड से गायब हैं, जिससे लगातार अतिक्रमण बढ़ रहा है।
अगली सुनवाई 18 जून को
अदालत ने मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए अगली सुनवाई 18 जून तय की है। हाईकोर्ट अब यह जानना चाहता है कि सीआईपी प्रशासन और संबंधित विभागों ने जमीन बचाने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं।
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