बिहार में फर्जी मेडिकल रिसर्च का कथित बड़ा नेटवर्क, पैसे लेकर तैयार हो रही MD-MS की थीसिस
50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक में फर्जी रिसर्च, नकली मरीजों का डेटा और थीसिस तैयार करने के दावों ने मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार में मेडिकल छात्रों के लिए कथित तौर पर फर्जी रिसर्च और थीसिस तैयार करने वाले एक नेटवर्क का अंडरकवर खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 12 से अधिक राज्यों के मेडिकल कॉलेजों के छात्रों की MD, MS, DM, MCh और DNB जैसी उच्च मेडिकल डिग्रियों के लिए रिसर्च और थीसिस तैयार कराने का दावा एजेंटों और कुछ प्रोफेसरों की ओर से किया गया। अंडरकवर रिपोर्टर्स ने 50 से अधिक एजेंटों और प्रोफेसरों से संपर्क किया, जिनमें कुछ लोगों ने पैसे लेकर 50 या 100 मरीजों पर फर्जी रिसर्च तैयार करने की बात कही। एक एजेंट ने MD की थीसिस के लिए करीब 50 हजार रुपए और सिनॉप्सिस के लिए अतिरिक्त 5 हजार रुपए मांगे तथा दावा किया कि मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसरों की टीम यह काम करती है। इसके बाद एक कथित प्रोफेसर ने भी अंडरकवर बातचीत में 40-50 हजार रुपए में थीसिस तैयार करने, फर्जी डेटा बनाने और प्लेगरिज्म सॉफ्टवेयर से बचने का दावा किया। बातचीत में यह भी सामने आया कि बिना वास्तविक मरीजों पर रिसर्च किए डेटा तैयार कर यह दिखाया जा सकता है कि किसी दवा या उपचार का कितना असर हुआ। MS की थीसिस के लिए सर्जरी के सफलता प्रतिशत से जुड़ा फर्जी डेटा तैयार करने का भी दावा किया गया। अलग-अलग एजेंटों ने बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के मेडिकल छात्रों से काम मिलने और मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसरों की टीम से थीसिस तैयार कराने की बात कही। हालांकि, ये सभी दावे अंडरकवर बातचीत में संबंधित लोगों द्वारा किए गए हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस उपलब्ध सामग्री में नहीं है। यदि ऐसे दावे जांच में सही साबित होते हैं तो मामला केवल अकादमिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मेडिकल शिक्षा, शोध की विश्वसनीयता और भविष्य में मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों की प्रशिक्षण गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।




