डबवाली में चौटाला माइनर टूटी: 20 फुट कटाव से खेतों में भरा पानी; 30 एकड़ नरमा-धान की फसल प्रभावित
जंडवाला बिश्नोईया के पास तड़के हुआ कटाव, सिंचाई विभाग ने पानी बंद कर जेसीबी से मरम्मत शुरू की; किसानों ने सर्वे और मुआवजे की मांग उठाई

डबवाली। सिरसा जिले के डबवाली खंड में रविवार तड़के चौटाला माइनर टूटने से आसपास के खेतों में जलभराव हो गया। जंडवाला बिश्नोईया गांव के पास मौजगढ़ हेड से निकलने वाली चौटाला माइनर में करीब 20 फुट चौड़ा कटाव हो गया। इससे किसानों की नरमा और धान की फसल प्रभावित होने की आशंका है।
घटना सुबह करीब 2:30 बजे की बताई जा रही है। सुबह एक किसान अपने खेत में पानी लगाने के लिए माइनर के ऊपर से गुजर रहा था। इसी दौरान उसने माइनर के किनारे टूटे शीशम के पेड़ के पास बड़ा कटाव देखा। यहां से पानी तेज गति से खेतों की ओर बह रहा था। देखते ही देखते आसपास के कई खेतों में पानी भर गया और फसलें जलमग्न हो गईं।
किसान ने तुरंत सिंचाई विभाग को दी सूचना
कटाव दिखाई देने के बाद किसान ने सिंचाई विभाग के बेलदार जोगेंद्र सिंह को सूचना दी। सूचना मिलने पर विभागीय कर्मचारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद मौजगढ़ हेड से चौटाला माइनर का पानी बंद करवाया गया, जिससे खेतों की ओर पानी का बहाव रुक सका।
सिंचाई विभाग ने जेसीबी मशीन की मदद से माइनर के टूटे हिस्से को बांधने का काम शुरू किया। कर्मचारियों ने मिट्टी डालकर कटाव बंद करने का प्रयास किया। हालांकि, तब तक पानी आसपास के खेतों में फैल चुका था।
20 से 30 एकड़ फसल प्रभावित
किसानों के अनुसार माइनर टूटने से करीब 20 से 30 एकड़ क्षेत्र में खड़ी नरमा और धान की फसल प्रभावित हुई है। खेतों में पानी भरने से फसलें जलमग्न हो गईं। कृषि उपकरण और अन्य सामान भी पानी की चपेट में आने से नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
किसानों का कहना है कि यदि खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहा तो फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
माइनर की देखरेख पर किसानों ने उठाए सवाल
घटना के बाद किसानों ने माइनर की देखरेख और रखरखाव को लेकर सवाल उठाए हैं। किसानों का कहना है कि समय पर मरम्मत और नियमित निगरानी नहीं होने के कारण माइनर में कटाव जैसी घटनाएं सामने आती हैं।
किसानों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से प्रभावित खेतों का सर्वे करवाने, फसल नुकसान का आकलन करने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही माइनर के कमजोर हिस्सों की स्थायी मरम्मत सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।



