दीनदयाल रसोई: 5 रुपए में भरपेट भोजन, भूखों को सहारा और दानियों को सुकून
ग्वालियर में जरूरतमंदों के लिए चल रही अनूठी पहल; ₹500 के सहयोग से 100 लोगों को कराया जा रहा भोजन, जन्मदिन और पुण्यतिथि पर लोग करा रहे सेवा

ग्वालियर। शहर में दीनदयाल रसोई जरूरतमंदों और बेसहारा लोगों के लिए भोजन का सहारा बन रही है। यहां महज 5 रुपए के कूपन पर लोगों को भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। खास बात यह है कि लोग अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह या किसी परिजन की पुण्यतिथि जैसे अवसरों को जरूरतमंदों को भोजन कराकर यादगार बना रहे हैं।
₹500 में 100 लोगों को भोजन
दीनदयाल रसोई केंद्र के माध्यम से लोग 500 रुपए का सहयोग देकर 100 जरूरतमंद लोगों को भोजन करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें खुद भोजन बनाने, सामान खरीदने या वितरण की व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ती। इच्छुक लोग पहले से बुकिंग कराकर तय दिन पर सेवा में शामिल हो सकते हैं।
अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर भी पहुंच रहा भोजन
ग्वालियर की चलित रसोई उन लोगों के लिए भी मददगार साबित हो रही है, जो अपने परिजनों के इलाज के लिए अस्पतालों के बाहर रहते हैं। कैंसर पहाड़ी, जिला अस्पताल, महाराज बाड़ा और झांसी रोड बस स्टैंड जैसे स्थानों पर जरूरतमंद लोग भोजन की गाड़ी का इंतजार करते हैं।
कई परिवारों के सामने इलाज के खर्च के बाद भोजन की व्यवस्था करना भी चुनौती बन जाता है। ऐसे में यह पहल उनके लिए राहत का माध्यम बन रही है।
सेवा के साथ जुड़ रही लोगों की भावनाएं
दीनदयाल रसोई अब केवल भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं रह गई है। शहर के लोग अपने खास मौकों को सेवा से जोड़ रहे हैं। कई युवा और दोस्तों के समूह मिलकर हर महीने राशि जमा करते हैं और जरूरतमंदों के भोजन की व्यवस्था में सहयोग करते हैं।
कई दानदाता तय दिन पर रसोई केंद्र पहुंचकर अपने हाथों से लोगों को भोजन भी परोसते हैं।
₹5 का कूपन बचाता है आत्मसम्मान
इस व्यवस्था की खासियत इसका ‘डिग्निटी मॉडल’ है। जरूरतमंद व्यक्ति को पूरी तरह मुफ्त भोजन देने के बजाय 5 रुपए का कूपन लेकर भोजन कराया जाता है। इससे भोजन करने वाला व्यक्ति खुद को किसी के सामने याचक महसूस नहीं करता, बल्कि सामान्य ग्राहक की तरह भोजन करता है।
यही वजह है कि दीनदयाल रसोई में मिलने वाला भोजन सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों के आत्मसम्मान को बनाए रखने का भी प्रयास है।
भूख मिटाने के साथ सेवा का अवसर
ग्वालियर की यह पहल उन लोगों को भी सेवा का अवसर दे रही है, जो किसी जरूरतमंद को भोजन कराना चाहते हैं लेकिन खुद भोजन तैयार कर बांटने की व्यवस्था नहीं कर पाते। अब वे सहयोग राशि देकर सीधे इस सेवा से जुड़ सकते हैं।
दीनदयाल रसोई की यह पहल बताती है कि किसी की भूख मिटाना केवल दान नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और इंसानियत की सेवा भी है।




