दूध असली है या मिलावटी? DNA किट बताएगी सच्चाई, राजुवास को मिला पेटेंट
राजुवास के वैज्ञानिकों ने विकसित की DNA आधारित जांच किट; ऊंटनी के दूध में गाय-भैंस के दूध की मिलावट का लगाया जा सकेगा पता, भारत सरकार ने तकनीक को दिया पेटेंट।

बीकानेर। ऊंटनी के दूध की शुद्धता और प्रामाणिकता जांचने की दिशा में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजुवास), बीकानेर ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ऐसी DNA आधारित किट तकनीक विकसित की है, जिससे ऊंटनी के दूध में गाय या भैंस के दूध की मिलावट का पता लगाया जा सकेगा।
भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने विश्वविद्यालय की इस तकनीक को पेटेंट प्रदान किया है। ऊंटनी के दूध की बढ़ती मांग के बीच यह तकनीक इसकी गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
DNA जांच से पकड़ी जाएगी दूसरी प्रजाति के दूध की मिलावट
दूध में दूसरी प्रजाति के पशु का दूध मिलाए जाने पर कई बार सामान्य जांच से मिलावट की पहचान करना मुश्किल होता है। ऐसे में DNA आधारित जांच मिलावट की वैज्ञानिक पुष्टि का विकल्प उपलब्ध कराती है।
राजुवास की ओर से विकसित DNA किट ऊंटनी के दूध के नमूने में दूसरी प्रजाति के दूध की मौजूदगी की पहचान करने में सक्षम होगी। खास तौर पर गाय और भैंस के दूध की मिलावट का पता लगाया जा सकेगा।
इस तकनीक का उद्देश्य ऊंटनी के दूध की प्रामाणिकता की वैज्ञानिक तरीके से जांच करना है। इससे उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने के साथ दूध के कारोबार और प्रसंस्करण से जुड़े संस्थानों में गुणवत्ता नियंत्रण को भी मजबूती मिल सकती है।
लंबे शोध का परिणाम है पेटेंट
विश्वविद्यालय के अनुसार यह पेटेंट वैज्ञानिकों के लंबे शोध का परिणाम है। शोध दल ने ऊंटनी के दूध में दूसरी प्रजाति के दूध की पहचान के लिए DNA आधारित जांच पद्धति विकसित करने पर काम किया।
पेटेंट हासिल करने वाले शोध दल में डॉ. अमित कुमार पाण्डेय, डॉ. प्रमोद मोहता, प्रो. बी.एन. श्रृंगी, स्व. डॉ. सुनील माहेरचंदानी, डॉ. नरेंद्र सिंह राठौड़, डॉ. कृतिका गहलोत, डॉ. चैत्री शर्मा और डॉ. वेद प्रकाश शामिल हैं।
पशुपालकों और डेयरी उद्योग को भी मिलेगा फायदा
ऊंटनी का दूध राजस्थान सहित कई क्षेत्रों में पोषण और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी मांग बढ़ने के साथ इसकी शुद्धता और गुणवत्ता बनाए रखना भी जरूरी हो गया है।
विश्वविद्यालय के अनुसार भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल पशुपालकों, दूध प्रसंस्करण संस्थानों, संबंधित उद्योगों और उपभोक्ताओं के हित में किया जा सकता है। इससे ऊंटनी के दूध की प्रामाणिकता को लेकर भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मिलावट की पहचान की दिशा में अहम कदम
ऊंटनी के दूध में दूसरी प्रजाति के दूध की पहचान के लिए DNA तकनीक का विकास डेयरी क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पेटेंट मिलने से विश्वविद्यालय के शोध को आधिकारिक मान्यता मिली है और भविष्य में इस तकनीक के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।




