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गुणवत्ता सुधार के दावों के बीच 21 जिलों के 766 स्कूलों में प्राचार्य नहीं, प्रमोशन सूची में सिर्फ 12 नाम

प्रमोशन सूची में सिर्फ 12 नाम

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के दावों के बीच स्कूल शिक्षा विभाग के टी-संवर्ग यानी ट्राइबल क्षेत्र के स्कूलों से जुड़ा एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। प्रदेश के 21 जिलों में प्राचार्यों के 766 पद रिक्त बताए जा रहे हैं, लेकिन विभाग फिलहाल केवल 12 व्याख्याताओं को पदोन्नत कर इन रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने पदोन्नति-सह-पदस्थापना के लिए 17 अगस्त 2026 को काउंसलिंग आयोजित करने की सूचना जारी की है। जानकारी के अनुसार विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक 7 मार्च 2025 को हुई थी, जिसमें कुल 14 लोक सेवकों के प्रकरणों पर विचार किया गया था। अब इनमें से केवल 11 व्याख्याताओं को काउंसलिंग के लिए इंद्रावती भवन बुलाया गया है। प्रमोशन प्रक्रिया में दो व्याख्याताओं कृष्णचंद यादव और राजेश कुमार सिंह को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि दोनों की सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर 2026 को निर्धारित है और सरकारी नियमों के अनुसार जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष से कम समय बचा हो, उन्हें इस तरह की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता। वहीं एक अन्य व्याख्याता रितेश कुमार वैद्य को उनकी वर्तमान संस्था में ही प्राचार्य पद पर पदोन्नत किए जाने की जानकारी है। ऐसे में 766 रिक्त पदों के मुकाबले प्रमोशन के लिए उपलब्ध नामों की संख्या बेहद कम होने से सरकारी स्कूलों में प्राचार्यों की कमी दूर करने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। प्राचार्य किसी स्कूल के प्रशासनिक संचालन के साथ-साथ शैक्षणिक व्यवस्था, शिक्षकों के समन्वय और विद्यार्थियों से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए बड़ी संख्या में पद खाली रहने का असर स्कूलों के संचालन पर पड़ने की आशंका है। दूसरी ओर, विभाग ने काउंसलिंग सूची और रिक्त पदों को लेकर दावा-आपत्ति दर्ज कराने के लिए 13 अगस्त शाम 4 बजे तक का समय निर्धारित किया है। इसके बाद 17 अगस्त को इंद्रावती भवन में काउंसलिंग प्रस्तावित है। शिक्षकों से संबंधित जानकारी और अपडेट विभागीय पोर्टल eduportal.cg.nic.in पर देखने को कहा गया है। 21 जिलों के सैकड़ों स्कूलों में प्राचार्यों के पद खाली होने और सीमित संख्या में पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ने के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इन रिक्तियों को भरने के लिए आगे क्या कदम उठाता है और विद्यार्थियों की पढ़ाई तथा स्कूलों के प्रशासनिक संचालन पर इसका असर कैसे कम किया जाता है।

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