‘जहर इतना कम कर देंगे कि नशा होगा, मौत नहीं’: 70 हजार में स्नेक बाइट का दावा, क्लबों और पार्टियों तक पहुंचने की जांच
दिल्ली-NCR और यूपी में सांप के डंक के जरिए नशे के कथित बढ़ते चलन का खुलासा, सप्लायरों से बातचीत में ऑन-डिमांड सप्लाई और खतरनाक दावों का सामने आना

लखनऊ/नोएडा, 15 अगस्त। दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश में सांप के जहर या स्नेक बाइट के कथित नशे को लेकर की गई एक जांच में इस खतरनाक गतिविधि से जुड़े नेटवर्क के बारे में कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। जांच के दौरान रिपोर्टरों ने नोएडा और दिल्ली-NCR के कुछ क्लबों तथा नशे से जुड़े लोगों के संपर्कों के माध्यम से जानकारी जुटाने का प्रयास किया। कथित तौर पर सामने आया कि कुछ पार्टियों और क्लबों में सांप के डंक से नशा करने की मांग की जाती है और इसके लिए सप्लायरों से संपर्क किया जाता है। जांच में एक कथित पेडलर ने बताया कि यह प्रतिबंधित और महंगा नशा माना जाता है तथा मांग के आधार पर इसकी व्यवस्था कराई जाती है। आगे की पड़ताल में हरियाणा के सोनीपत क्षेत्र में सांपों की कथित सप्लाई करने वाले लोगों तक पहुंच बनाई गई, जहां बातचीत के दौरान कोबरा, करैत और अन्य जहरीले सांप उपलब्ध कराने के दावे सामने आए। कथित सप्लायरों ने यह भी दावा किया कि सांपों को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाया जाता है और नशे के लिए जहरीले सांप के जहर को कम करने जैसी व्यवस्था की जा सकती है। जांच में एक कथित सप्लायर ने पांच लोगों के लिए इस तरह की व्यवस्था के बदले 70 हजार रुपये की मांग किए जाने का दावा किया। रिपोर्ट के अनुसार बातचीत के दौरान यह भी सामने आया कि ऐसी गतिविधियां कथित तौर पर ऑन-डिमांड कराई जाती हैं, यानी क्लबों या निजी पार्टियों में मांग के अनुसार सप्लायर को बुलाने और सांप के डंक से नशा कराने की व्यवस्था की जाती है। हालांकि इस तरह के दावों की वास्तविकता और नेटवर्क की व्यापकता की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई एवं वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार सांप का जहर बेहद खतरनाक विषैला पदार्थ है और इसके संपर्क में आने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। सांप के जहर का असर व्यक्ति के शरीर, सांप की प्रजाति और जहर की मात्रा के आधार पर अलग-अलग हो सकता है तथा सांस लेने में परेशानी, पक्षाघात, बेहोशी और मौत जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए कथित तौर पर जहर की मात्रा कम करके इसे सुरक्षित नशा बनाने का दावा बेहद जोखिमपूर्ण है और इसे किसी भी स्थिति में सुरक्षित मानना गंभीर गलती हो सकती है। जांच में सामने आए कथित नेटवर्क ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि यदि इस तरह की गतिविधियां वास्तव में क्लबों और निजी पार्टियों तक पहुंच रही हैं तो वन्यजीव संरक्षण कानूनों, नशीले पदार्थों से संबंधित कानूनों और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से इसकी निगरानी कितनी प्रभावी है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि सांपों की अवैध पकड़ और सप्लाई का नेटवर्क अलग-अलग शहरों तक फैला हो सकता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की स्थिति अलग से स्पष्ट होना बाकी है। पूरे मामले ने युवाओं में खतरनाक नशे के नए तरीकों और वन्यजीवों के अवैध इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।



