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‘मुझे इसका खून पीना है’, कहकर 9 गोलियां मारीं: पाकिस्तानी एजेंट को प्रेमी-प्रेमिका समझ रहे थे, वो निकले भारत के जासूस

ऑपरेशन हॉरनेट पार्ट-2 में RAW एजेंटों ने खालिस्तानी नेटवर्क तक पहुंचने के लिए खतरनाक मिशन चलाया, ISI के लिंक, फंडिंग और हथियारों की सप्लाई से जुड़े अहम सबूत जुटाए

जनवरी 1985 में लंदन के मेफेयर इलाके की एक सुनसान हवेली में RAW एजेंट नारायणन एक बेहद खतरनाक मिशन पर पहुंचा था। उसका मकसद ISI एजेंट अब्दुल खान के नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग और गाड़ियों के नंबर हासिल करना था, लेकिन वहां पहुंचते ही उसका सामना हथियारबंद गार्ड्स से हो गया। नारायणन ने दोनों गार्ड्स को मार गिराया, लेकिन इसके बाद एक तीसरे हमलावर ने उस पर हमला कर दिया और उसका गला दबाने लगा। संघर्ष के बाद नारायणन ने उसे काबू कर लिया और पता चला कि वह अब्दुल खान का नौकर तारिक था। तारिक ने अपनी जान बचाने के लिए अब्दुल खान, संधू और हरबख्श से जुड़ी जानकारी देने की पेशकश की। नारायणन ने उसे पैसे दिए और उससे गाड़ियों के नंबर, कोड वर्ड और संधू-हरबख्श की इस्लामाबाद यात्रा से जुड़ी जानकारी हासिल की। बाद में तारिक के जरिए अब्दुल खान के बैंक खातों और फर्जी नामों से चल रही फंडिंग का भी पता चला। इसी बीच RAW अधिकारी संजीव जिंदल ने अपनी एजेंट सोफी के जरिए अमेरिका और यूरोप में फैले नेटवर्क तक पहुंच बनाने की रणनीति तैयार की। सोफी ने ऑस्ट्रिया में हरप्रीत आहूजा को खोज निकाला, जो पहले कैलिफोर्निया में अवतार सेठी नाम के कारोबारी के साथ काम कर चुका था। RAW को शक था कि सेठी संधू के नेटवर्क को फंड मुहैया करा रहा है। आहूजा को समझाकर RAW का मुखबिर बनाया गया और उसका कोडनेम ‘इनसाइडर’ रखा गया। इसके बाद सोफी और आहूजा ने प्रेमी-प्रेमिका का रूप लेकर अमेरिका में सेठी के करीब पहुंचने की योजना बनाई। सोफी ने सेठी के आकर्षण का फायदा उठाकर उसके घर और दफ्तर तक पहुंच बनाई, जबकि आहूजा दोबारा उसके साथ काम करने लगा। फरवरी 1986 तक दोनों ने सेठी के बैंक खातों, ISI से जुड़ी बैठकों और हथियारों की सप्लाई से संबंधित कई दस्तावेज हासिल कर लिए। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने सेठी पर दबाव बनाया और उसके सामने बैंक ट्रांसफर, फर्जी खातों तथा संधू के साथ संबंधों से जुड़े सबूत रखे। पूछताछ के दौरान सेठी ने कथित तौर पर बताया कि लंदन स्थित पाकिस्तानी दूतावास के भीतर कई ISI अधिकारी एक सेल चला रहे थे और यूरोप से धन जुटाकर पंजाब में चरमपंथी नेटवर्क तक पहुंचा रहे थे। उसने भारत में मौजूद कई संदिग्ध चरमपंथियों की जानकारी भी दी। आगे चलकर RAW और पंजाब पुलिस ने उसके इनपुट के आधार पर कार्रवाई की। जुलाई 1986 में सेठी ने एक ऑडियो टेप भी उपलब्ध कराया, जिसमें अब्दुल खान और संधू से जुड़े कथित बड़े हमलों की योजना की जानकारी थी। इसी बीच सितंबर 1986 में नारायणन को बलवंत नाम के एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने संधू के नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत होने का दावा किया। बलवंत खुद भारत का वांटेड अपराधी था और ब्रिटेन भाग गया था, लेकिन पूछताछ के दौरान उसने नेटवर्क के बारे में जानकारी देने पर परिवार के पास पंजाब लौटने की इच्छा जताई। उसके दिए सबूतों के आधार पर ब्रिटिश पुलिस ने लंदन में छापा मारकर संधू और उसके पांच प्रमुख सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया। इस पूरे ऑपरेशन में RAW ने अलग-अलग देशों में मौजूद अपने एजेंटों, मुखबिरों और गुप्त नेटवर्क की मदद से खालिस्तानी चरमपंथ और कथित ISI फंडिंग के तारों को जोड़ने की कोशिश की।

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