सायरन बजा, बचने के लिए मिले सिर्फ 30 मिनट: 30 हजार आबादी वाला त्रिशूली मलबे में दफन
नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरा कस्बा उजाड़ दिया, चेतावनी के बावजूद कई लोग पानी की भयावहता का अंदाजा नहीं लगा पाए

नेपाल के नुवाकोट जिले का त्रिशूली कस्बा 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पूरी तरह तबाही के मंजर में बदल गया है। करीब 30 हजार की आबादी वाले इस कस्बे में जहां कभी बाजार, दुकानें, सड़कें, स्कूल, अस्पताल, बैंक और सरकारी दफ्तर नजर आते थे, वहां अब सिर्फ मलबा, पत्थर और कीचड़ दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बाढ़ आने से पहले पुलिस ने सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों और ऊंचाई वाले इलाकों की ओर जाने की चेतावनी दी थी। लोगों के पास करीब 20 से 30 मिनट का समय था, लेकिन कई लोगों ने यह सोचकर चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया कि नदी में पहले भी बाढ़ आती रही है और पानी कुछ देर बाद कम हो जाएगा। कुछ लोग जरूरी सामान और कागजात समेटने में लग गए तो कुछ अपने घर-दुकान छोड़ने को तैयार नहीं हुए। देखते ही देखते पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा बस्ती में घुस आया और कई मकान तथा दुकानें इसकी चपेट में आ गईं। स्थानीय निवासी सुजन ने बताया कि पुलिस लगातार लोगों को भागने के लिए कह रही थी और जो लोग समय रहते निकल गए, उनकी जान बच गई, जबकि कई लोग पीछे रह गए और फिर उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। ब्रजेश कुमार ने बताया कि वह कमरे में सो रहे थे, तभी मकान मालिक ने आकर बाढ़ आने की जानकारी दी, लेकिन उन्हें लगा कि शायद मजाक किया जा रहा है। जब बाहर निकलकर हालात देखे तो कुछ ही दूरी पर पहुंचने के बाद पीछे मुड़कर देखा कि मकान और दुकानें पानी में बह चुकी थीं। वहीं सनोज चौधरी को ऊपर की ओर बसे इलाके से करीब एक घंटे पहले फोन पर भयंकर बाढ़ की जानकारी मिल गई थी, जिसके बाद वह पहाड़ी की तरफ भाग गए और उनकी जान बच गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि त्रिशूली नदी में पहले भी कई बार पानी बढ़ चुका था, इसलिए इस बार भी लोगों को इतनी बड़ी तबाही की उम्मीद नहीं थी, लेकिन इस बार पानी और मलबे की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ लोगों ने पुल पर बैठकर बाढ़ का वीडियो बनाने की कोशिश की और वे भी सैलाब की चपेट में आ गए। करीब 60 साल की दीपा का कहना है कि उन्हें सायरन की आवाज नहीं सुनाई दी और अगर समय रहते चेतावनी मिल जाती तो शायद कई और लोगों की जान बच सकती थी। बाढ़ के बाद मोबाइल नेटवर्क और बिजली व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। नेपाल टेलीकॉम की टीम जनरेटर और ईंधन की मदद से संचार व्यवस्था बहाल करने में जुटी है, जबकि नेपाली सेना और सुरक्षाबल प्रभावित इलाकों में राहत कार्य चला रहे हैं। रास्ते जगह-जगह मलबे से पटे हैं और लगातार बारिश तथा पहाड़ी इलाकों की मुश्किल भौगोलिक स्थिति के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी परेशानी आ रही है। त्रिशूली में कई परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तस्वीरें लेकर उन्हें तलाश रहे हैं। यूपी के बलिया निवासी अशोक कुमार चौरसिया, जो करीब 20 वर्षों से त्रिशूली में कपड़े की दुकान चला रहे थे, ने बताया कि इस हादसे में उनकी भाभी और 18 वर्षीय भतीजा बह गए, जबकि उनकी छह दुकानें पूरी तरह खत्म हो गईं। नेपाल में इस आपदा से अब तक सैकड़ों लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर टूटने, अचानक आने वाली बाढ़ और समय पर चेतावनी व्यवस्था की गंभीरता को सामने ला दिया है।




