स्वामी राजेन्द्रानंद जी को पुण्यतिथि पर दी भावभीनी श्रद्धांजलि, 41 यूनिट रक्तदान
बिश्नोई धर्मशाला में श्रद्धांजलि सभा एवं रक्तदान शिविर आयोजित, आचार्य डॉ. सच्चिदानंद जी ने किया मेमोरियल कक्ष का लोकार्पण

डबवाली। ब्रह्मलीन स्वामी राजेन्द्रानंद जी की पुण्यतिथि से एक दिन पूर्व डबवाली स्थित बिश्नोई धर्मशाला में श्रद्धांजलि सभा एवं रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लालासर साधरी के महंत आचार्य डॉ. सच्चिदानंद जी विशेष रूप से पहुंचे। धर्मशाला पहुंचने पर बिश्नोई सभा डबवाली के प्रधान कुलदीप कुमार जादूदा सहित समाज के गणमान्य लोगों ने उनका चरण वंदन कर स्वागत किया। बिश्नोई सभा के सचिव इंद्रजीत बिश्नोई ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद जी एवं पुजारी श्रीराम द्वारा 120 शब्दों का पाठ कर पाहल तैयार करने से हुई। इसके पश्चात आचार्य डॉ. सच्चिदानंद जी के कर-कमलों से स्वामी राजेन्द्रानंद जी मेमोरियल कक्ष का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में गुरु जम्भेश्वर भगवान के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर नमन किया गया तथा स्वामी राजेन्द्रानंद जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ रक्तदान शिविर भी लगाया गया, जिसमें समाज के युवाओं सहित अन्य लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बिश्नोई सभा डबवाली एवं बिश्नोई समाज सेवा संस्था के अध्यक्ष विक्रम कुमार थापन के नेतृत्व में आयोजित रक्तदान शिविर का शुभारंभ आचार्य डॉ. सच्चिदानंद जी ने किया। शिविर में कुल 41 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। चिकित्सकों की टीम ने रक्तदाताओं के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है और समाज के युवाओं की इस पहल से जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिलेगा। स्वामी राजेन्द्रानंद जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आचार्य डॉ. सच्चिदानंद जी ने कहा कि स्वामी जी ने बिश्नोई धर्म एवं समाज के प्रचार-प्रसार के साथ गौरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने निरंतर गौशालाओं में कथा एवं धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जागरूक किया और कमजोर गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास किए। गौरक्षा के प्रति उनके समर्पण के कारण उन्हें ‘गौ ऋषि स्वामी राजेन्द्रानंद जी’ के नाम से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का स्वभाव सरल, निर्मल और सहज था तथा उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से समाज को सेवा, संस्कार, गौरक्षा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर उनकी पुण्य स्मृति में साखी एवं भजन प्रस्तुत कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के उपाध्यक्ष सोम प्रकाश सीगड़ ने कहा कि स्वामी राजेन्द्रानंद जी किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे सर्वसमाज के संत थे। उनके विचार और शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी। श्रद्धांजलि सभा के दौरान बिश्नोई सभा डबवाली ने स्वामी राजेन्द्रानंद जी के जीवन, धार्मिक कार्यों, गौरक्षा एवं समाज सेवा में योगदान पर आधारित एक ग्रंथ प्रकाशित करने की घोषणा भी की। सभा ने निर्णय लिया कि प्रत्येक वर्ष स्वामी जी की पुण्यतिथि पर इसी प्रकार श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर उनकी स्मृतियों को जीवंत रखा जाएगा। कार्यक्रम के दौरान सोम प्रकाश सीगड़ की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। समापन पर भगवान की आरती की गई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद एवं भोजन प्रसादी वितरित की गई। कार्यक्रम में बिश्नोई सभा के सदस्यों के अलावा आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग, माता-बहनें एवं श्रद्धालु पहुंचे। सिरसा से सीएमओ, डबवाली सरकारी अस्पताल के एसएमओ तथा सेवानिवृत्त सीएमओ डॉ. महेंद्र भादू सहित अनेक लोगों ने स्वामी राजेन्द्रानंद जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम की प्रमुख बातें
श्रद्धांजलि सभा: बिश्नोई धर्मशाला में स्वामी राजेन्द्रानंद जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई।
मेमोरियल कक्ष: आचार्य डॉ. सच्चिदानंद जी ने स्वामी राजेन्द्रानंद जी मेमोरियल कक्ष का लोकार्पण किया।
41 यूनिट रक्तदान: रक्तदान शिविर में समाज के युवाओं एवं अन्य लोगों ने कुल 41 यूनिट रक्तदान किया।
गौरक्षा का संदेश: आचार्य डॉ. सच्चिदानंद जी ने स्वामी जी के गौरक्षा और समाज सेवा के योगदान को याद किया।
ग्रंथ प्रकाशित करने की घोषणा: सभा ने स्वामी जी के जीवन एवं कार्यों पर आधारित ग्रंथ प्रकाशित करने का निर्णय लिया।
भंडारा एवं प्रसाद: कार्यक्रम के समापन पर आरती के बाद श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी एवं प्रसाद वितरित किया गया।


