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थरूर बोले- RSS की विचारधारा नहीं बदली, हिंदू राष्ट्र बनाना अब भी लक्ष्य; भागवत के बयान बदलाव का संकेत

भागवत के बयान बदलाव का संकेत

मुंबई। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा को लेकर बड़ा बयान दिया है। मुंबई में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में पहुंचे थरूर ने कहा कि RSS का मूल उद्देश्य भारत को हिंदू राष्ट्र और हिंदुत्व के रूप में आगे बढ़ाना है और इसकी बुनियादी विचारधारा में अब तक बदलाव नहीं आया है।

थरूर ने हालांकि संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों को बदलाव का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि वह करीब 10 वर्षों से संघ प्रमुख के बयानों को देख रहे हैं और अब उनके बयानों में कुछ बदलाव दिखाई दे रहा है।

भागवत के Gen-Z संवाद पर थरूर की प्रतिक्रिया

मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में Gen-Z और Gen-Alpha के युवाओं के साथ करीब एक घंटे तक संवाद किया था। इस दौरान उन्होंने युवाओं को देशभक्त और ईमानदार बताते हुए कहा था कि पुरानी पीढ़ी को युवाओं की बात समझने और उनसे संवाद करने की जरूरत है।

थरूर ने भागवत के इस रुख को सकारात्मक संकेत माना। हालांकि उन्होंने साफ किया कि इससे RSS की मूल विचारधारा बदल गई है, ऐसा नहीं कहा जा सकता।

अलग विचार रखने वालों से बातचीत जरूरी

थरूर ने अपने RSS प्रमुख के साथ एक ही मंच पर आने को लेकर होने वाली आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अलग विचारधारा रखने वाले लोगों के साथ बातचीत करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें ऐसे मंच पर जाने के कारण पार्टी से निकालने की मांग कर रहे हैं, वे यह नहीं समझते कि अलग सोच रखने वालों के साथ भी संवाद किया जा सकता है।

2029 में Gen-Z की अहम भूमिका

थरूर ने कहा कि वर्ष 2029 तक Gen-Z देश का सबसे बड़ा वोटिंग समूह बन सकता है। उनके मुताबिक युवा बदलाव चाहते हैं और राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि राजनीति के पुराने तरीके हमेशा काम नहीं करेंगे।

उन्होंने अपनी पार्टी के संदर्भ में कहा कि सड़क से जुड़े मुद्दों का समाधान सड़क पर और संसद से जुड़े मुद्दों का काम सदन में होना चाहिए।

कांग्रेस को बताया अपनी सोच के सबसे करीब

थरूर ने कांग्रेस को अपनी विचारधारा के सबसे करीब बताते हुए कहा कि कांग्रेस में असहमति की गुंजाइश है। उन्होंने बीजेपी में असहमति रखने वाले नेताओं की स्थिति पर सवाल उठाया और कहा कि वह उसी पार्टी का हिस्सा हैं जो उनकी सोच के सबसे करीब है।

राहुल गांधी के अभियान पर भी आत्ममंथन की जरूरत

थरूर ने छात्र आंदोलनों और कांग्रेस के अभियानों को लेकर भी आत्ममंथन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की ओर से छात्रों से जुड़े मुद्दे पहले उठाए गए थे, लेकिन कांग्रेस को वैसा जनसमर्थन नहीं मिला जैसा बाद में छात्र आंदोलन को मिला।

उनके मुताबिक कांग्रेस को यह समझने की जरूरत है कि उसके प्रयासों को जनता से अपेक्षित प्रतिक्रिया क्यों नहीं मिली और पार्टी को लोगों की नब्ज को बेहतर तरीके से समझना होगा।

‘हमारे मठ’ की नजर

शशि थरूर का बयान ऐसे समय आया है जब राजनीतिक दलों का ध्यान तेजी से युवा मतदाताओं की ओर बढ़ रहा है। Gen-Z आने वाले चुनावों में बड़ी भूमिका निभा सकता है। ऐसे में RSS और राजनीतिक दलों के बीच युवाओं को लेकर संवाद और रणनीति आने वाले समय में सियासत का महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।

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