ऑपरेशन बोर्ड’ की रणनीति: भाजपा ने विपक्षी पार्षदों में सेंध लगाने का बनाया प्लान
बहुमत वाले निकायों में पार्षदों को एकजुट रखने पर जोर, करीबी मुकाबले वाली जगहों पर कांग्रेस, थर्ड फ्रंट, निर्दलीय और बागी पार्षदों से संपर्क की रणनीति

भाजपा ने प्रदेश के 7 नगर निगमों समेत नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में बोर्ड गठन को लेकर रणनीति तैयार की है। पार्टी ने स्पष्ट बहुमत वाले निकायों में पार्षदों को एकजुट रखने पर जोर दिया है, जबकि जहां बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं है या मुकाबला करीबी है, वहां विपक्षी खेमे के असंतुष्ट पार्षदों से संपर्क साधने की योजना बनाई गई है।
‘परिवार और परिचित’ के जरिए संपर्क
भाजपा ने कांग्रेस, थर्ड फ्रंट, निर्दलीय और बागी पार्षदों तक पहुंच बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्षदों के परिवार और परिचितों के माध्यम से संपर्क साधने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसकी प्रदेश स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है।
नाराज पार्षदों को पद और कमेटियों का प्रस्ताव
जिन निकायों में भाजपा के पास बोर्ड बनाने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है, वहां समर्थन जुटाने के लिए विपक्षी खेमे के नाराज पार्षदों से संपर्क किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ पार्षदों को विभिन्न समितियों और पदों की जिम्मेदारी देने के विकल्प पर भी बातचीत की जा रही है।
निर्दलीय और बागी पार्षदों पर नजर
कई नगर निकायों में भाजपा या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय, बागी और छोटे दलों के पार्षद बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दोनों प्रमुख दल ऐसे पार्षदों से संपर्क कर रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ निर्दलीय और बागी पार्षद भाजपा के संपर्क में हैं।
सभापति के नाम तय करने में स्थानीय नेताओं की भूमिका
नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में सभापति पद के उम्मीदवार तय करने में कई जगह स्थानीय विधायकों और विधायक प्रत्याशियों की भूमिका सामने आई है। उनके सुझावों के बाद जिलाध्यक्ष और निकाय प्रभारियों के माध्यम से नाम प्रदेश कार्यालय भेजे गए। अब जिन नेताओं की सिफारिश पर उम्मीदवार तय हुए हैं, उन्हें संबंधित निकाय में बोर्ड गठन के लिए समर्थन जुटाने की जिम्मेदारी भी दी गई है।
नोट: ‘ऑपरेशन बोर्ड’, पार्षदों को पद/कमेटियों के प्रस्ताव और निर्दलीयों के भाजपा की ओर झुकाव से जुड़े दावे रिपोर्ट में बताए गए हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं लिखा गया है।




