Welcome to भगवा हिन्दुस्तान   Click to listen highlighted text! Welcome to भगवा हिन्दुस्तान
gwalior

बेटी बचाओ तिराहा मार्ग की जांच में बड़ा खुलासा: रिकॉर्ड में गिट्टी की परत, भुगतान भी हुआ; खुदाई में परत गायब, नीचे मिला निर्माण मलबा

हाईकोर्ट के आदेश पर 7 जगह सैंपलिंग में सड़क की मोटाई, बिटुमेन, गिट्टी और कॉम्पेक्शन में खामियां; एक स्थान पर आधार परत की जगह मिला भवन निर्माण का मलबा

ग्वालियर में सड़कों की गुणवत्ता जांच के दौरान रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया है। हाईकोर्ट के आदेश पर की गई जांच में बेटी बचाओ तिराहा मार्ग पर सड़क की मजबूत नींव के लिए रिकॉर्ड में दर्ज गिट्टी की परत मौके पर नहीं मिली। जांच के दौरान खुदाई करने पर नीचे भवन निर्माण का मलबा मिला।

रिपोर्ट के अनुसार, सड़क के अनुमान में गिट्टी की आधार परत के लिए 1125 घनमीटर सामग्री का प्रावधान था, जबकि माप पुस्तिका में 1440.31 घनमीटर मात्रा दर्ज कर भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।

जिस स्थान पर परत दर्ज थी, वहीं मलबा मिला

जांच आयोग ने बेटी बचाओ तिराहे के सामने शुभम शर्मा के घर के पास सड़क की जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस स्थान पर रिकॉर्ड में गिट्टी की आधार परत होने की बात दर्ज थी, वहां वह परत नहीं मिली।

बताया गया कि 17 अगस्त को इसी स्थान को कोर्ट में सैंपलिंग के लिए चिन्हित किया गया था। इसके बाद निगम की ओर से वहां खुदाई कर डामर की परत काफी हद तक हटाई गई और मिट्टी डालकर स्थान को समतल किया गया।

दो दिन बाद जांच आयोग ने उसी जगह दोबारा खुदाई की तो नीचे भवन निर्माण का मलबा मिला।

सात स्थानों पर जांच में अलग-अलग खामियां

जांच के दौरान सात स्थानों से सड़क के सैंपल लिए गए। इनमें सड़क की मोटाई, गिट्टी की आधार परत, बिटुमेन की मात्रा और मिट्टी के कॉम्पेक्शन से जुड़ी कई कमियां सामने आईं।

1. गुढ़ा-गुढ़ी नाका मार्ग

रिकॉर्ड के अनुसार डामर की संयुक्त परत की मोटाई 8 सेंटीमीटर होनी थी, लेकिन जांच में यह सिर्फ 4.4 सेंटीमीटर मिली। गिट्टी की आधार परत भी निर्धारित मोटाई से कम थी। इसकी बनावट की जांच भी मानकों पर खरी नहीं उतरी।

2. ए-टू-जेड फोटो स्टूडियो के सामने

यहां सड़क के नीचे गिट्टी की आधार परत 15 सेंटीमीटर निर्धारित थी, लेकिन मौके पर 11 सेंटीमीटर मिली। ऊपर और नीचे की डामर परतों में बिटुमेन की मात्रा भी निर्धारित मानक से कम पाई गई। गिट्टी के आकार को लेकर भी आपत्ति सामने आई।

3. जैक एंड जिल स्कूल के पास

इस स्थान पर परतों की मोटाई लगभग निर्धारित मानक के अनुसार मिली, लेकिन इस्तेमाल की गई सामग्री में खामियां सामने आईं। दोनों डामर परतों में बिटुमेन की मात्रा कम मिली। आधार परत में जरूरत से बड़े पत्थर पाए गए और उसकी बनावट की जांच भी असफल रही।

4. दूसरी बटालियन के सामने

नीचे की डामर परत की निर्धारित मोटाई 5 सेंटीमीटर थी, लेकिन जांच में यह 4.5 सेंटीमीटर मिली। ऊपर और नीचे दोनों परतों में बिटुमेन की मात्रा निर्धारित मानक से कम पाई गई।

5. बेटी बचाओ तिराहा

यहां ऊपर की डामर परत 3 सेंटीमीटर के बजाय 2.7 सेंटीमीटर और नीचे की परत 5 सेंटीमीटर के बजाय सिर्फ 3.7 सेंटीमीटर मिली। दोनों परतें बिटुमेन की जांच में भी मानकों पर खरी नहीं उतरीं।

6. शुभम शर्मा के घर के सामने

इस स्थान पर गिट्टी की आधार परत ही नहीं मिली। खुदाई में नीचे भवन निर्माण का मलबा मिला। मिट्टी की मजबूती से जुड़ी जांच भी असफल रही।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थान पर रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा, मौके पर मिली सड़क की परत और उसके नीचे मौजूद सामग्री—तीनों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

7. ट्रैवल्स के सामने

सीवर लाइन के पास मिट्टी की फिलिंग को कम से कम 97 प्रतिशत तक कॉम्पैक्ट किया जाना था। मार्बल शॉप के सामने यह 94.78 प्रतिशत मिली।

ट्रैवल्स के सामने दोनों सरकारी जांचों में कॉम्पेक्शन इससे भी कम पाया गया। एक जांच में यह 66.78 प्रतिशत और दूसरी में 70.55 प्रतिशत रहा।

रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति में अंतर

जांच के दौरान सामने आए इन आंकड़ों से सड़क निर्माण के रिकॉर्ड, इस्तेमाल की गई सामग्री और मौके पर मौजूद परतों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठे हैं। खासतौर पर बेटी बचाओ तिराहे के सामने गिट्टी की आधार परत का रिकॉर्ड में दर्ज होना, उसके लिए भुगतान होना और खुदाई में निर्माण मलबा मिलना जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है।

मामला हाईकोर्ट की निगरानी में जांच के दायरे में है। आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने को लेकर संबंधित रिकॉर्ड और जांच निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!