236 में से 100 जगह अब भी जलभराव: पुराने पॉइंट खत्म नहीं हुए, नए भी बने; निगम का ड्रेनेज प्लान जमीन पर अधूरा
निगम के सर्वे में 236 जलभराव पॉइंट चिन्हित हुए थे; 136 पर काम पूरा होने का दावा, 58 जगह काम शुरू नहीं और 48 पर काम जारी

ग्वालियर में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या अब भी बनी हुई है। नगर निगम ने पिछले साल के जलभराव वाले स्थानों का सर्वे कराकर कुल 236 पॉइंट चिन्हित किए थे। इनमें से निगम ने 136 स्थानों पर जल निकासी की समस्या दूर करने का दावा किया है, लेकिन बाकी 100 स्थानों पर अभी भी बारिश होते ही पानी भरने की स्थिति सामने आ रही है।
निगम क्षेत्र के अलावा लोक निर्माण विभाग और जल संसाधन विभाग के अधीन आने वाली सड़कों और क्षेत्रों में भी जलभराव की समस्या बनी हुई है।
58 स्थानों पर काम शुरू होना बाकी
नगर निगम के अनुसार, 100 जलभराव वाले स्थानों में से 48 स्थानों पर काम शुरू किया जा चुका है, जबकि 58 स्थानों पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है।
इन 58 स्थानों पर नालों के निर्माण और सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की व्यवस्था पर करीब 22.50 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।
निगम का कहना है कि कुछ जलभराव वाले स्थान दूसरे विभागों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए पत्राचार किया गया है।
ग्रामीण विधानसभा के कई इलाकों में नालों का इंतजार
ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के कई वार्डों में जल निकासी से जुड़े काम अभी लंबित हैं।
वार्ड 63 के मदनपुरा क्षेत्र में स्वर्ण रेखा नाले की सफाई, गहराई बढ़ाने और मरम्मत का काम जल संसाधन विभाग को करना है। बरौआ गांव कन्या शाला के पास जल निकासी के लिए 45.63 लाख रुपए, रायरू हनुमान मंदिर के पास 47.30 लाख और चकरायपुर में 35.83 लाख रुपए के प्रस्ताव स्वीकृत होने की जानकारी दी गई है।
वार्ड 64 में आनंदपुर ट्रस्ट अस्पताल के पास मुख्य मार्ग लोक निर्माण विभाग के स्वामित्व में है, जहां नाला निर्माण को लेकर समस्या बताई गई है।
वार्ड 65 में सांई विहार कॉलोनी से आईजी स्कूल बाउंड्री तक नाला निर्माण का प्रस्ताव है। इस काम की अनुमानित लागत 1.64 करोड़ रुपए बताई गई है।
ग्वालियर पूर्व में कॉलोनियों में जल निकासी की समस्या
वार्ड 19 के अमलतास कॉलोनी, समर्थ नगर और कवि नगर क्षेत्र में जल निकासी के लिए टेंडर में कोई कंपनी सामने नहीं आई।
वार्ड 20 के आदर्श कॉलोनी और सिद्धेश्वर नगर में नाला निर्माण के लिए 4.13 करोड़ रुपए की राशि प्रस्तावित है।
वार्ड 26 के खटीक मोहल्ला और गुरुद्वारा चौक क्षेत्र में करीब 5.10 करोड़ रुपए से नाला निर्माण प्रस्तावित है।
वार्ड 27 के अग्रसेन चौराहा, मुरार में नाला निर्माण का प्रस्ताव है, जिसकी लागत 40.23 करोड़ रुपए बताई गई है।
इसके अलावा वार्ड 30 में बाल भवन, सरस्वती नगर और सिटी सेंटर क्षेत्र में सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी का काम किया जाना है। वार्ड 60 में ब्लू लोटस से सन वैली तक नाला निर्माण के 1.99 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी का इंतजार है।
ग्वालियर विधानसभा में कई सड़कें भी प्रभावित
वार्ड 1 में लक्ष्मीपुरम, आनंद नगर और बहोड़ापुर से सागरताल चौराहा सर्विस रोड पर जलभराव दूर करने के लिए लोक निर्माण विभाग की स्वीकृति का इंतजार है।
वार्ड 2 के क्रेशर कॉलोनी और झाड़ू मोहल्ला क्षेत्र में 57 लाख रुपए की सीवर लाइन का अनुबंध हो चुका है।
वार्ड 3 के विनय नगर सेक्टर-2 में 56.14 लाख रुपए से काम प्रस्तावित है। वार्ड 5 की ललिता विहार कॉलोनी में 85 लाख रुपए के काम बाकी हैं।
वार्ड 12 में पाताली हनुमान रोड पर पुलिया निर्माण का अनुबंध हो चुका है। वहीं वार्ड 16 में बीमा अस्पताल के पास श्याम हवेली वाली गली में 6.55 लाख रुपए से काम किया जाना है।
बारिश बंद होने के बाद भी इन जगहों पर पानी
शहर के कुछ हिस्सों में बारिश रुकने के बाद भी लंबे समय तक जलभराव बना रहता है।
झांसी रोड: लोक निर्माण विभाग की ओर से बनाई गई वाइट टॉपिंग सड़क पर अवंतिका गैस स्टेशन के सामने जलभराव की समस्या बताई गई है। सड़क के ढलान और जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं।
सिथौली रेल अंडरब्रिज: सिथौली-विक्की फैक्ट्री रोड पर पुल के नीचे बारिश के दौरान पानी भर जाता है, जिससे आवाजाही प्रभावित होती है।
जमुनाबाग नर्सरी: नर्सरी की चारदीवारी के बाहर सड़क का बड़ा हिस्सा बारिश के दौरान पानी में घिर जाता है।
रोशनी घर रोड: रोशनी घर से जीवाजी क्लब की ओर जाने वाले मार्ग पर बारिश बंद होने के 24 घंटे बाद तक पानी जमा रहने की समस्या बताई गई है।
वीरपुर बांध: बारिश के दौरान बांध से पानी रिसने की समस्या सामने आती है। इसके समाधान के लिए सिंचाई विभाग को बहाव पथ बनाने के संबंध में पत्र भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल
निगम की ओर से 236 जलभराव वाले स्थानों की पहचान और कई जगह काम पूरा करने का दावा किया गया है, लेकिन 100 स्थानों पर समस्या बने रहने से शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब चुनौती सिर्फ नए जलभराव वाले स्थानों की पहचान करने की नहीं, बल्कि पुराने पॉइंट पर स्थायी जल निकासी व्यवस्था लागू करने और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की भी है।




