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फिजिकल हेल्थ- लीकी गट क्या है: आंतों का सुरक्षा बैरियर कमजोर होने पर क्या होता है, डॉक्टर से जानें लक्षण, जांच और बचाव

गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और दस्त को ही लीकी गट न मानें; डॉक्टर ने नींद, तनाव, खान-पान और आंतों की सेहत के बीच संबंध समझाया

नई दिल्ली। हमारी आंतें सिर्फ भोजन पचाने का काम नहीं करतीं, बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने और कई हानिकारक पदार्थों को ब्लड तक पहुंचने से रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आंतों की अंदरूनी परत एक सुरक्षा बैरियर की तरह काम करती है। जब इसकी पारगम्यता सामान्य से ज्यादा बढ़ जाती है, तो इसे आम तौर पर ‘लीकी गट’ कहा जाता है।

इन दिनों सोशल मीडिया पर गैस, पेट फूलना, कब्ज, दस्त, फूड इनटॉलरेंस और थकान जैसे कई लक्षणों को लीकी गट से जोड़ा जाता है। हालांकि, इन लक्षणों का होना अपने आप में लीकी गट का प्रमाण नहीं है। इनके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेप्टोलॉजी एंड लिवर ट्रांसप्लांटेशन विभाग के डायरेक्टर एवं सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सुकृत सिंह सेठी ने लीकी गट से जुड़े सवालों के जवाब दिए।

क्या होता है लीकी गट?

आंतों की अंदरूनी दीवार को एक बारीक छन्नी की तरह समझ सकते हैं। इसका काम जरूरी पोषक तत्वों को शरीर में जाने देना और कुछ हानिकारक पदार्थों तथा बड़े कणों को रोकना है।

जब आंतों की दीवार की यह सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होती है और उसकी पारगम्यता बढ़ जाती है, तो सामान्य स्थिति की तुलना में ज्यादा पदार्थ इसके पार जा सकते हैं। इसी स्थिति को आम भाषा में लीकी गट कहा जाता है।

इसे जालीदार खिड़की के उदाहरण से समझा जा सकता है। सामान्य जाली हवा को अंदर आने देती है, लेकिन धूल-मिट्टी को रोकती है। अगर जाली के छेद बड़े हो जाएं तो ज्यादा चीजें अंदर आने लगती हैं। इसी तरह आंतों का बैरियर कमजोर होने पर उसकी पारगम्यता बढ़ सकती है।

शरीर में आंतों की क्या भूमिका है?

आंतों में भोजन के पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट, विटामिन और मिनरल्स का बड़ा हिस्सा शरीर को आंतों के जरिए मिलता है।

इसके अलावा आंतों में मौजूद गट माइक्रोबायोम पाचन और इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है। आंतों की अंदरूनी परत शरीर और आंतों के भीतर मौजूद पदार्थों के बीच एक महत्वपूर्ण सुरक्षा अवरोध का काम करती है।

क्या लीकी गट खुद एक बीमारी है?

डॉ. सेठी के अनुसार, लीकी गट को अपने आप में एक अलग बीमारी मानना सही नहीं है। इसे आसान भाषा में आंतों की पारगम्यता बढ़ने की स्थिति के रूप में समझा जा सकता है।

आंतों की दीवार पूरी तरह बंद नहीं होती। उसमें बेहद बारीक रास्ते होते हैं, जिनके जरिए जरूरी पोषक तत्व शरीर में पहुंचते हैं। परेशानी तब हो सकती है जब यह बैरियर सामान्य से अधिक पारगम्य हो जाए।

हर गैस या कब्ज को लीकी गट न समझें

गैस, पेट फूलना, कब्ज, दस्त या थकान जैसे लक्षण बहुत सामान्य हैं। इनका संबंध केवल लीकी गट से नहीं माना जा सकता।

इनके पीछे खान-पान में बदलाव, संक्रमण, फूड इनटॉलरेंस, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), तनाव या दूसरी पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से लीकी गट की पहचान करना उचित नहीं है।

आंतों का बैरियर क्यों कमजोर हो सकता है?

लीकी गट के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं बताया गया है। आंतों की सेहत पर नींद, तनाव, खान-पान और अन्य स्थितियों का असर पड़ सकता है।

नींद की कमी का असर

कम नींद से आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इससे पाचन संबंधी परेशानियां, गैस, पेट फूलना और कब्ज जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। नींद की कमी को आंतों में सूजन और सुरक्षा बैरियर के कमजोर होने से भी जोड़ा गया है।

लंबे समय का तनाव

लगातार तनाव रहने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है। इससे आंतों की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है और आंतों की कोशिकाओं के बीच की मजबूत पकड़ पर असर पड़ सकता है।

लंबे समय तक तनाव रहने से आंतों में सूजन बढ़ने की संभावना भी बताई गई है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और शराब

ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और शराब का सेवन पाचन तंत्र पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इससे ब्लोटिंग, कब्ज और पाचन संबंधी परेशानी बढ़ सकती है तथा गट बैक्टीरिया के संतुलन पर असर पड़ सकता है।

लीकी गट की जांच कैसे होती है?

लीकी गट की पहचान के लिए कोई एक सामान्य और निश्चित टेस्ट नहीं बताया गया है। स्रोत में निम्न जांचों का उल्लेख किया गया है—

1. लैक्टुलोज-मैनिटोल टेस्ट: इसमें लैक्टुलोज और मैनिटोल का घोल दिया जाता है और बाद में यूरिन के जरिए इनके अवशोषण का आकलन किया जाता है।

2. जोनुलिन टेस्ट: ब्लड या स्टूल सैंपल में जोनुलिन नामक प्रोटीन के स्तर की जांच की जाती है।

3. ब्लड टेस्ट: कुछ मामलों में बैक्टीरिया या भोजन के प्रति एंटीबॉडी के स्तर की जांच की जा सकती है।

4. स्टूल एनालिसिस: गट माइक्रोबायोम, सूजन से जुड़े मार्कर्स और बैक्टीरिया के असंतुलन का आकलन करने के लिए स्टूल टेस्ट किया जा सकता है।

इलाज के लिए क्या किया जाता है?

लीकी गट के लिए कोई एक निश्चित दवा या तय इलाज नहीं बताया गया है। उपचार और जीवनशैली में बदलाव संबंधित कारणों और व्यक्ति की स्थिति के आधार पर किए जाते हैं।

स्रोत में डॉक्टर ने इन उपायों पर ध्यान देने की सलाह दी है—

  • संतुलित और एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट लेना
  • पर्याप्त फाइबर लेना
  • डाइट में प्रोबायोटिक शामिल करना
  • पर्याप्त नींद लेना
  • तनाव को नियंत्रित करना
  • नियमित शारीरिक गतिविधि करना
  • अनावश्यक दवाओं से बचना
  • जरूरत न होने पर एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करना

डाइट में क्या शामिल करें?

आंतों की सेहत के लिए डाइट में पर्याप्त मात्रा और विभिन्न प्रकार के फाइबर को शामिल करने पर जोर दिया गया है। फाइबर आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है।

खाने में पर्याप्त सब्जियां, फल, दालें और साबुत अनाज शामिल किए जा सकते हैं। साथ ही पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण बताई गई है।

डॉक्टर से सलाह कब जरूरी?

गैस, पेट फूलना, कब्ज या दस्त जैसे लक्षण लगातार बने रहें या बार-बार परेशान करें तो केवल लीकी गट मानकर खुद से इलाज शुरू करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। इन लक्षणों के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, इसलिए सही कारण की पहचान के बाद ही उपचार तय किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष: लीकी गट को आंतों की बढ़ी हुई पारगम्यता से जुड़ी स्थिति के रूप में समझा जा सकता है। इसके लक्षण कई अन्य पाचन समस्याओं से भी मिल सकते हैं। इसलिए लक्षणों के आधार पर खुद निदान करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना अधिक उचित है।

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