बारिश में बढ़ रहा डेंगू-मलेरिया का खतरा: घर में इन जगहों पर छिपे हो सकते हैं मच्छर, जानें लक्षण और बचाव के तरीके
बारिश के बाद जमा पानी में तेजी से पनपते हैं मच्छर, कूलर से लेकर गमलों और छत तक बन सकते हैं ब्रीडिंग स्पॉट; जानें डेंगू-मलेरिया के लक्षण, जांच, इलाज और बचाव के जरूरी उपाय।

नई दिल्ली। मानसून के साथ देश के कई हिस्सों में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के बाद जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है। डेंगू और मलेरिया इसी मौसम में तेजी से फैलने वाली प्रमुख बीमारियों में शामिल हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मच्छरों से बचाव के लिए सिर्फ घर के बाहर सफाई रखना पर्याप्त नहीं है। घर के अंदर मौजूद कूलर, गमलों की प्लेट, फ्रिज की ड्रिप ट्रे, खुले कंटेनर और बाथरूम में जमा पानी भी मच्छरों के लिए ब्रीडिंग स्पॉट बन सकता है।
बारिश में क्यों बढ़ता है डेंगू-मलेरिया का खतरा?
बारिश के बाद कई जगहों पर पानी जमा हो जाता है। तापमान और नमी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करते हैं। इसके अलावा खराब ड्रेनेज, खुले पानी के कंटेनर और घर के आसपास जमा कचरे में फंसा पानी भी मच्छरों की संख्या बढ़ा सकता है।
डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर आमतौर पर साफ और रुके हुए पानी में पनपता है, जबकि मलेरिया फैलाने वाला एनोफिलीज मच्छर भी ठहरे हुए पानी वाले स्थानों में प्रजनन कर सकता है।
घर के अंदर इन जगहों पर छिपे हो सकते हैं मच्छर
मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए घर में इन जगहों की नियमित जांच करें:
- कूलर और उसकी पानी की टंकी
- AC और फ्रिज की ड्रिप ट्रे
- गमलों के नीचे रखी प्लेट
- फूलदान और खुले बर्तन
- बाल्टी और टब
- बाथरूम में जमा पानी
- पानी के खुले कंटेनर
- छत पर जमा बारिश का पानी
घर के बाहर पुराने टायर, बोतल, डिब्बे, कबाड़, खुले पानी के टैंक और निर्माणाधीन स्थानों पर जमा पानी भी मच्छरों के लिए उपयुक्त जगह बन सकता है।
डेंगू और मलेरिया के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
डेंगू और मलेरिया के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं। इनमें तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी और ठंड लगना शामिल हो सकता है।
डेंगू में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, मतली तथा कुछ मामलों में त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई दे सकते हैं।
मलेरिया में बुखार के साथ ठंड लगना और कंपकंपी, पसीना, सिरदर्द, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं।
लक्षण व्यक्ति की स्थिति और बीमारी की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
डेंगू-मलेरिया की जांच कैसे होती है?
बुखार और अन्य लक्षण होने पर डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
डेंगू के लिए NS1 एंटीजन, IgM/IgG एंटीबॉडी और CBC जैसी जांचों का इस्तेमाल किया जाता है।
मलेरिया के लिए ब्लड स्मीयर/पैरासाइट टेस्ट और रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किए जा सकते हैं। CBC से भी मरीज की स्थिति का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
कौन-सा टेस्ट कब करना है, यह बीमारी की अवधि और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए जांच डॉक्टर की सलाह से कराना बेहतर है।
डेंगू का इलाज कैसे किया जाता है?
डेंगू के लिए कोई सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाली विशिष्ट एंटीवायरल दवा नहीं है। उपचार मुख्य रूप से लक्षणों को नियंत्रित करने और शरीर में पर्याप्त तरल बनाए रखने पर केंद्रित होता है।
- पर्याप्त पानी और अन्य तरल पदार्थ लें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार बुखार की दवा लें।
- जरूरत के अनुसार CBC और प्लेटलेट्स की निगरानी की जाती है।
- गंभीर लक्षण होने पर अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता हो सकती है।
डेंगू में खुद से दर्द की दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है। विशेष रूप से एस्पिरिन या कुछ NSAIDs का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
मलेरिया का इलाज
मलेरिया का उपचार बीमारी पैदा करने वाले परजीवी और मरीज की स्थिति के आधार पर किया जाता है। डॉक्टर एंटी-मलेरियल दवाएं निर्धारित कर सकते हैं।
दवा का पूरा कोर्स करना जरूरी है। गंभीर मलेरिया में अस्पताल में भर्ती और निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
बुखार के साथ निम्न में से कोई गंभीर लक्षण दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें:
- लगातार तेज बुखार
- बार-बार उल्टी
- तेज पेट दर्द
- अत्यधिक कमजोरी या चक्कर
- बेहोशी या भ्रम
- सांस लेने में परेशानी
- नाक या मसूड़ों से खून आना
- शरीर पर असामान्य रक्तस्राव या लाल चकत्ते
- बहुत ज्यादा सुस्ती या हालत बिगड़ना
डेंगू-मलेरिया से बचने के आसान तरीके
मच्छरों की संख्या कम करना इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
घर में पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, बाल्टी, टब और अन्य कंटेनरों की नियमित सफाई करें।
पानी की टंकियों को ढककर रखें। खुले टैंक और कंटेनर मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकते हैं।
मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को मच्छरों से बचाना जरूरी है।
पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। बाहर जाते समय फुल स्लीव कपड़े और सुरक्षित मच्छर रिपेलेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कबाड़ और पुराने टायर हटाएं। इनमें बारिश का पानी जमा होने से मच्छर पनप सकते हैं।
क्या डेंगू और मलेरिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं?
आमतौर पर डेंगू और मलेरिया सीधे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते। इनके संक्रमण में संक्रमित मच्छर की भूमिका होती है। इसलिए घर और आसपास मच्छरों की ब्रीडिंग रोकना बेहद जरूरी है।
क्या एक बार डेंगू होने के बाद दोबारा नहीं होता?
ऐसा नहीं है। डेंगू वायरस के अलग-अलग सीरोटाइप होते हैं। एक प्रकार का संक्रमण होने के बाद दूसरे सीरोटाइप से दोबारा संक्रमण हो सकता है। इसलिए पहले डेंगू हो चुका व्यक्ति भी मच्छरों से बचाव जारी रखे।
बीमारी के दौरान खान-पान का रखें ध्यान
बुखार के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी, ORS और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ लिए जा सकते हैं।
हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन जैसे खिचड़ी, दलिया और सूप लिया जा सकता है। तला-भुना, बहुत मसालेदार और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन सीमित करना बेहतर है।
पपीते के पत्ते या किसी घरेलू नुस्खे को डेंगू का इलाज समझकर मेडिकल उपचार में देरी न करें।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त सावधानी
बच्चों और बुजुर्गों को मच्छरों से बचाने के लिए घर में मच्छरदानी, स्क्रीन और सुरक्षित रिपेलेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा देने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
जरूरी बात
डेंगू या मलेरिया का संदेह होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। सही जांच और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। तेज बुखार या गंभीर लक्षणों में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।



