दिल्ली में H1N1 के मामले 8 गुना बढ़े, 1,777 केस सामने आए: जानें 7 लक्षण, संक्रमण से बचाव और किन लोगों को ज्यादा खतरा
दिल्ली में H1N1 के मामले 8 गुना बढ़े, 20 अगस्त तक 1,777 केस; जानें संक्रमण कैसे फैलता है, किन लोगों को ज्यादा खतरा और बचाव के जरूरी उपाय

नई दिल्ली। दिल्ली में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 20 अगस्त तक दिल्ली में H1N1 के 1,777 मामले दर्ज हो चुके हैं। पिछले साल इसी अवधि में 229 मामले सामने आए थे। यानी एक साल में मामलों की संख्या करीब 8 गुना बढ़ गई है।
H1N1 इन्फ्लूएंजा-A वायरस का एक प्रकार है। यह मुख्य रूप से नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे होने के कारण कई बार इसे पहचानना मुश्किल हो सकता है।
ये 7 लक्षण नजर आएं तो रहें सतर्क
H1N1 संक्रमण में आमतौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में उल्टी या दस्त जैसी शिकायत भी हो सकती है।
लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 3 से 5 दिन के भीतर विकसित हो सकते हैं। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर H1N1 और सामान्य वायरल फ्लू में अंतर करना संभव नहीं है।
कैसे फैलता है H1N1?
H1N1 संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के बेहद करीब रहने, संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह छूने तथा भीड़भाड़ वाली बंद जगहों में लंबे समय तक रहने से भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
खास बात यह है कि संक्रमित व्यक्ति में लक्षण दिखाई देने से पहले भी संक्रमण दूसरों तक पहुंच सकता है।
इन लोगों को ज्यादा खतरा
H1N1 किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है, लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा ज्यादा रहता है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
जांच कैसे होती है?
H1N1 की पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार लैब टेस्ट करा सकते हैं। आमतौर पर नाक या गले से सैंपल लिया जाता है।
RT-PCR को H1N1 की पुष्टि के लिए अधिक विश्वसनीय जांच माना जाता है। इसके अलावा रैपिड इन्फ्लूएंजा डायग्नोस्टिक टेस्ट और कुछ मामलों में वायरल कल्चर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
इलाज में आराम और पर्याप्त फ्लूइड जरूरी
H1N1 का इलाज मरीज की स्थिति और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। हल्के मामलों में पर्याप्त आराम, पानी और अन्य तरल पदार्थ लेना तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार बुखार और दर्द की दवा लेना मददगार हो सकता है।
गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं शुरू नहीं करनी चाहिए।
संक्रमण से बचने के लिए ये सावधानियां अपनाएं
- हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं।
- खांसते या छींकते समय नाक और मुंह ढकें।
- बार-बार आंख, नाक और मुंह छूने से बचें।
- फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्ति से नजदीकी संपर्क से बचें।
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल करें।
- लक्षण होने पर घर पर रहें और दूसरों से दूरी बनाए रखें।
- डॉक्टर की सलाह से फ्लू वैक्सीन लगवाने पर विचार करें।
बीमारी के दौरान खान-पान का रखें ध्यान
H1N1 संक्रमण के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी और पोषण की जरूरत होती है। हल्का, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर रहता है। पर्याप्त नींद और आराम भी रिकवरी में मदद करते हैं।
वहीं तला-भुना, बहुत मसालेदार और जंक फूड, धूम्रपान और शराब से बचना चाहिए। बीमारी के दौरान खुद से एंटीबायोटिक लेना भी उचित नहीं है।
जरूरी सूचना: H1N1 के लक्षण दूसरी वायरल बीमारियों से मिल सकते हैं। तेज या लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या हालत बिगड़ने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।



