ग्वालियर की सीवर व्यवस्था 14 साल पुरानी मशीनों के भरोसे, ओवरफ्लो से जनता परेशान; 26 नई मशीनों के टेंडर जारी
814.67 किमी लंबे सीवर नेटवर्क की सफाई में संसाधनों की कमी; 66 में से सिर्फ 9 वार्ड निगम के हवाले, करीब 40% सीवर का पानी अब भी खुले नालों में

ग्वालियर। शहर की सीवर व्यवस्था को ठेकेदारों के भरोसे से निकालकर नगर निगम के हाथों में देने की योजना अभी पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। 814.67 किलोमीटर लंबे सीवर नेटवर्क की सफाई और संधारण के लिए नगर निगम अब भी करीब 10 से 14 साल पुरानी मशीनों पर निर्भर है। पुरानी मशीनों की क्षमता प्रभावित होने के कारण कई इलाकों में सीवर लाइन चोक और ओवरफ्लो की समस्या सामने आ रही है।
सीवर का गंदा पानी सड़कों और कॉलोनियों में फैलने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण निगम सभी वार्डों की सीवर व्यवस्था अपने हाथ में नहीं ले पा रहा है।
66 में से सिर्फ 9 वार्ड निगम के पास
नगर निगम परिषद ने सीवर सफाई के ठेके समाप्त कर व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से निगम के स्तर पर संचालित करने का फैसला किया था। लेकिन संसाधनों की कमी के कारण अभी तक 66 में से सिर्फ 9 वार्डों की सीवर संधारण व्यवस्था निगम अपने हाथ में ले सका है।
बाकी वार्डों में सीवर सफाई और संधारण का काम अभी भी ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है।
करीब 40% सीवर का पानी खुले नालों में
शहर में बिछे कुल 814.67 किमी सीवर नेटवर्क में करीब 60 प्रतिशत हिस्सा ही एसटीपी तक पहुंच पा रहा है। लगभग 40 प्रतिशत सीवर का पानी खुले नालों और नालियों में जाने की बात सामने आई है।
सीवर व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने में पर्याप्त जेटिंग मशीन, सक्शन पंप और अन्य उपकरणों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। संसाधनों की कमी के चलते निगम सभी वार्डों की जिम्मेदारी अपने स्तर पर लेने की स्थिति में नहीं है।
26 नई मशीनों के लिए टेंडर
पुरानी मशीनों की खराब होती स्थिति और सीवर ओवरफ्लो की समस्या को देखते हुए नगर निगम ने अब 26 नई मशीनों की खरीद के लिए टेंडर जारी किए हैं।
अधिकारियों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई मशीनें निगम के बेड़े में शामिल की जाएंगी। इससे सीवर सफाई के लिए निगम के पास उपलब्ध संसाधनों में बढ़ोतरी होगी।
नई मशीनें मिलने के बाद निगम बाकी वार्डों की सीवर व्यवस्था को भी अपने स्तर पर संचालित करने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।
पुरानी मशीनों से डी-सिल्टिंग पर असर
सीवर सफाई के लिए इस्तेमाल हो रही पुरानी मशीनों का असर नियमित डी-सिल्टिंग पर भी पड़ रहा है। पर्याप्त क्षमता से काम नहीं होने के कारण कई स्थानों पर सीवर चैंबर और मेनहोल में गाद जमा हो जाती है।
समय पर सफाई नहीं होने से चैंबर ओवरफ्लो होने लगते हैं और सीवर का गंदा पानी सड़कों व रिहायशी इलाकों में फैल जाता है। इससे लोगों को बदबू, जलभराव और गंदगी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
नई मशीनों से व्यवस्था सुधारने की उम्मीद
नगर निगम के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त मशीनरी और संसाधन उपलब्ध कराकर सीवर व्यवस्था को अपने स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित करना है। 26 नई मशीनों की खरीद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निगम की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, शहर के पूरे सीवर नेटवर्क को प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए सिर्फ नई मशीनें ही नहीं, बल्कि नियमित डी-सिल्टिंग, एसटीपी तक सीवर पहुंचाने और खुले नालों में जा रहे सीवर पानी को रोकने पर भी काम करना जरूरी होगा।
ग्वालियर सीवर व्यवस्था के प्रमुख आंकड़े
| विवरण | स्थिति |
|---|---|
| कुल सीवर नेटवर्क | 814.67 किमी |
| निगम के अधीन वार्ड | 9 |
| कुल वार्ड | 66 |
| पुरानी मशीनों की उम्र | 10-14 वर्ष |
| नई मशीनों के टेंडर | 26 |
| एसटीपी तक पहुंच रहा सीवर | करीब 60% |
| खुले नालों में जा रहा सीवर | करीब 40% |



