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जयपुर के SMS अस्पताल में अब प्राइवेट हेल्थ इंश्योरेंस से इलाज की तैयारी

बीमा कंपनियों के साथ तय होंगे पैकेज और रेट; इंश्योरेंस हेल्प डेस्क से होगी प्रक्रिया, आय से IPD टावर की सुविधाएं मजबूत करने की योजना

जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल SMS हॉस्पिटल में अब निजी हेल्थ इंश्योरेंस वाले मरीज भी अपनी पॉलिसी के तहत इलाज करा सकेंगे। अस्पताल प्रशासन के अनुसार राज्य सरकार ने निजी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों के तहत इलाज की अनुमति दे दी है और कई बीमा कंपनियों से बातचीत शुरू की गई है।

इस नई व्यवस्था के तहत निजी बीमा वाले मरीजों के लिए इलाज के पैकेज और रेट तय किए जाएंगे। इससे मिलने वाला भुगतान अस्पताल के लिए अतिरिक्त राजस्व का स्रोत बनेगा, जिसे चिकित्सा सुविधाओं, उपकरणों और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में इस्तेमाल करने की योजना है।

बीमा वाले मरीजों के लिए कैसे काम करेगा मॉडल?

SMS मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के अनुसार, अस्पताल में ऐसे मरीज पहले से आते हैं जिनके पास निजी हेल्थ इंश्योरेंस है। मौजूदा व्यवस्था में वे सरकारी योजनाओं के तहत मुफ्त इलाज करा लेते हैं, जिससे उनकी निजी बीमा पॉलिसी का इस्तेमाल नहीं हो पाता और अस्पताल को बीमा कंपनी से भुगतान भी नहीं मिलता।

नई व्यवस्था में मरीज अपनी पॉलिसी के कवरेज के अनुसार इलाज करा सकेंगे। इसके लिए बीमा कंपनियों के साथ इलाज की दरें और पैकेज तय किए जाएंगे।

मरीज के भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज तक बीमा संबंधी प्रक्रिया के लिए इंश्योरेंस हेल्प डेस्क या TPA डेस्क की व्यवस्था की जाएगी। इलाज का भुगतान संबंधित बीमा कंपनी अस्पताल को करेगी।

सर्जरी से लेकर कमरे तक के पैकेज

प्राइवेट मल्टीस्पेशलिटी अस्पतालों की तर्ज पर अलग-अलग बीमारियों और सर्जरी के लिए पैकेज तय किए जाएंगे। इनमें डॉक्टर की फीस, जांच, सर्जरी, वार्ड, कॉटेज और डीलक्स रूम का शुल्क शामिल किया जा सकता है।

IPD परामर्श के लिए जनरल फिजिशियन, स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की फीस भी निर्धारित की जाएगी।

पैकेज की दरें CGHS की तर्ज पर तय करने और निजी अस्पतालों की तुलना में कम रखने की कोशिश की जाएगी।

क्या सिर्फ इंश्योरेंस मरीजों को मिलेगी प्राथमिकता?

अस्पताल प्रशासन के अनुसार ऐसा नहीं होगा। निजी बीमा वाले मरीजों के लिए अलग व्यवस्था विकसित की जाएगी, लेकिन इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले मुफ्त या कैशलेस इलाज को प्रभावित करना नहीं है।

निर्माणाधीन IPD टावर में अत्याधुनिक वार्ड, ICU और मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इनका इस्तेमाल मरीजों की जरूरत और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।

बीमा से होने वाली कमाई कहां खर्च होगी?

निजी बीमा कंपनियों से मिलने वाला भुगतान अस्पताल के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बनेगा। इस राशि का इस्तेमाल अस्पताल के रख-रखाव, चिकित्सा उपकरणों, उपचार सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में किया जा सकेगा।

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक नए IPD टावर के संचालन पर हर महीने करीब 20 से 25 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। ऐसे में निजी बीमा से मिलने वाला राजस्व अतिरिक्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध करा सकता है।

राजस्थान में मुफ्त इलाज के बावजूद इसकी जरूरत क्यों?

SMS अस्पताल में सरकारी योजनाओं के तहत पहले से मुफ्त और कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि निजी हेल्थ इंश्योरेंस वाले मरीज अपनी पॉलिसी का लाभ लेते हुए SMS के विशेषज्ञ डॉक्टरों से इलाज नहीं करा पाते थे।

नई व्यवस्था में उन्हें अपने बीमा कवर के तहत SMS अस्पताल में इलाज कराने का विकल्प मिलेगा। साथ ही अस्पताल को बीमा कंपनियों से भुगतान प्राप्त होगा।

SMS अस्पताल को ही क्यों चुना गया?

SMS प्रदेश का प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है। यहां गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए वरिष्ठ प्रोफेसर और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध हैं।

अस्पताल में हार्ट-किडनी ट्रांसप्लांट, कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के साथ अत्याधुनिक तकनीक और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में निजी बीमा वाले मरीजों को एक ही संस्थान में विशेषज्ञ और उन्नत इलाज का विकल्प मिलने की उम्मीद है।

24 मंजिला IPD टावर में बन रहा हेलीपैड

SMS अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन 24 मंजिला IPD टावर अस्पताल की प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। इसकी 24वीं मंजिल पर हेलीपैड तैयार हो चुका है।

जानकारी के अनुसार यहां करीब 3 हजार किलो वजन वाली एयर एंबुलेंस के टेकऑफ और लैंडिंग की सुविधा विकसित की जा रही है। इससे खास तौर पर ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मरीजों को फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि गंभीर मरीजों और अंगों को अस्पताल तक लाने में समय कम हो सकता है।

IPD टावर का निर्माण कार्य दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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