राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ से पहले MP में नवीन-भागवत के कार्यक्रम: संयोग या रणनीति? 2028 से पहले युवा वोट पर नजर
17 से 19 सितंबर के बीच MP में राहुल गांधी, नितिन नवीन और मोहन भागवत के कार्यक्रम; युवा वोट पर भाजपा-कांग्रेस का बढ़ता फोकस

भोपाल। मध्य प्रदेश में सितंबर के तीसरे सप्ताह में होने वाले तीन बड़े राजनीतिक-सामाजिक कार्यक्रमों ने युवाओं को लेकर सियासी चर्चा तेज कर दी है। 19 सितंबर को राहुल गांधी इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इससे दो दिन पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन मध्य प्रदेश पहुंचेंगे, जबकि RSS प्रमुख मोहन भागवत 17 और 18 सितंबर को उज्जैन में रहेंगे।
कांग्रेस के मुताबिक राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। वहीं 18 सितंबर को मोहन भागवत उज्जैन में ‘युवा धर्म संसद’ को संबोधित करेंगे।
एक ही सप्ताह में एक ही राज्य में होने वाले इन कार्यक्रमों में एक बात समान है—युवा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा-संघ के कार्यक्रम राहुल गांधी के आयोजन का जवाब हैं या फिर यह महज तारीखों का संयोग है?
सवाल 1: राहुल के कार्यक्रम से ठीक पहले नितिन नवीन और भागवत का दौरा क्यों?
तारीखों में नजदीकी जरूर है, लेकिन भाजपा इन कार्यक्रमों को राहुल गांधी के आयोजन से जोड़कर नहीं देख रही है।
राहुल गांधी का इंदौर कार्यक्रम पहले से प्रस्तावित था। ‘छात्रों की गूंज’ की तैयारियां भी लंबे समय से चल रही थीं और आयोजन स्थल की अनुमति को लेकर विवाद भी सामने आया था।
इसके बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का 17 सितंबर का मध्य प्रदेश दौरा तय हुआ। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के मुताबिक यह दौरा पार्टी के राष्ट्रव्यापी ‘सेवा संकल्प अभियान’ का हिस्सा है।
यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से शुरू होगा। इसके तहत इंदौर में स्वामित्व योजना, मंदसौर में चीतों को छोड़ने और उज्जैन में 25 लाख दीयों के दीपोत्सव जैसे कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
इसी दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत का उज्जैन दौरा भी है। वह 18 सितंबर को ‘युवा धर्म संसद’ में युवाओं को संबोधित करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषक एनके सिंह इन कार्यक्रमों को राहुल गांधी के आयोजन के प्रभाव को कम करने की रणनीति के तौर पर देखते हैं। हालांकि इसे लेकर भाजपा की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
सवाल 2: भाजपा और कांग्रेस दोनों युवाओं पर इतना फोकस क्यों कर रही हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक हाल के युवा आंदोलनों और नई पीढ़ी की राजनीतिक सक्रियता ने पार्टियों का ध्यान इस वर्ग की ओर बढ़ाया है।
एनके सिंह के अनुसार, CJP के जंतर-मंतर आंदोलन के बाद युवाओं के असंतोष को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है। पहले राजनीतिक दल जातीय और सामाजिक समूहों के साथ-साथ महिला, आदिवासी और दलित वोट पर ज्यादा फोकस करते थे, लेकिन अब युवा भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक समूह के रूप में सामने आ रहे हैं।
मध्य प्रदेश में युवाओं से जुड़े मुद्दे नए नहीं हैं। व्यापम घोटाले से लेकर पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं के विवाद तक सरकारी नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं में असंतोष कई बार सामने आया है।
विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक दलों को आशंका है कि युवाओं की नाराजगी किसी बड़े आंदोलन का रूप न ले ले। इसलिए पार्टियां इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
हालांकि, नाराजगी का मतलब सीधे वोट में बदलना जरूरी नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक दिनेश गुप्ता दिल्ली में आम आदमी पार्टी का उदाहरण देते हैं। उनके मुताबिक वहां एक फोकस्ड वोट समूह बनाने का लाभ मिला, लेकिन मध्य प्रदेश में अभी ऐसा कोई स्पष्ट असर दिखाई नहीं देता।
सवाल 3: MP में युवा वोट कितना बड़ा है?
मध्य प्रदेश में 18 से 29 साल की उम्र के करीब 1.5 करोड़ मतदाता हैं। यह राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 27% हिस्सा है।
2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, करीब 16.89 लाख मतदाता 18-19 साल की उम्र के थे और पहली बार मतदान करने वालों में शामिल थे। वहीं 18 से 23 साल की उम्र के मतदाताओं की संख्या करीब 49 लाख थी।
2024 में 17 लोकसभा सीटों पर फर्स्ट-टाइम वोटर्स की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत अधिक थी और इन सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली। हालांकि, केवल इस आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि भाजपा की जीत का कारण सिर्फ युवा वोट था।
2028 तक और बढ़ सकता है युवा मतदाताओं का आधार
फरवरी 2026 में हुए SIR के बाद मध्य प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या 5.31 करोड़ से बढ़कर 5.39 करोड़ हो गई। यानी करीब 8.49 लाख मतदाताओं की बढ़ोतरी हुई।
इनमें नए 18 वर्षीय मतदाताओं की अलग से उम्रवार संख्या उपलब्ध नहीं है। हालांकि मतदाता सूची में नए पात्र मतदाताओं के नाम जुड़ने की प्रक्रिया जारी रहती है।
ऐसे में 2028 के विधानसभा चुनाव तक युवा मतदाताओं का आधार 2024 के मुकाबले और बड़ा होने की संभावना है।
सवाल 4: युवाओं के असली मुद्दे क्या हैं?
युवाओं के नाम पर होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों और उनकी वास्तविक समस्याओं के बीच अंतर भी दिखाई देता है।
विश्लेषकों के मुताबिक युवाओं की प्राथमिकताओं में रोजगार, सरकारी भर्तियां, पेपर लीक, बेहतर वेतन और करियर ग्रोथ जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
MPPSC और ESB की तैयारी कर रहे युवा
भोपाल के 23 वर्षीय आकाश करीब चार साल से MPPSC और ESB परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी मुख्य चिंता बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक और अदालतों में अटकने वाली भर्तियां हैं।
‘सीखो-कमाओ योजना’ में 8 से 10 हजार रुपए महीने का स्टाइपेंड मिलने के बावजूद उनकी प्राथमिकता स्थायी सरकारी नौकरी है।
इंदौर के युवाओं की चिंता बेहतर सैलरी
इंदौर की 22 वर्षीय पूजा निजी कंपनी में काम करती हैं। उनका कहना है कि 10-12 हजार रुपए की आय में किराए और खाने का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है।
उनके लिए शहर की सफाई या इंफ्रास्ट्रक्चर से ज्यादा महत्वपूर्ण बेहतर वेतन और करियर में आगे बढ़ने के अवसर हैं।
छोटे शहरों के युवाओं के सामने रोजगार की समस्या
भोपाल के 21 वर्षीय शिवम जैसे छोटे शहरों के ग्रेजुएट्स के लिए समस्या अलग है। डिग्री हासिल करने के बाद अपने शहर के आसपास पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने पर उन्हें भोपाल, इंदौर या दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।
उनकी प्राथमिकता है कि स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों।
सवाल 5: क्या 2028 की चुनावी तैयारी अभी से शुरू हो गई?
जवाब है—अभी की राजनीति और 2028 की तैयारी, दोनों।
मध्य प्रदेश में 2027 में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव होने हैं। इसके बाद 2028 में विधानसभा चुनाव होंगे।
राजनीतिक विश्लेषक दिनेश गुप्ता के मुताबिक स्थानीय चुनावों को 2028 के विधानसभा चुनाव की शुरुआती तैयारी के तौर पर भी देखा जा सकता है। ऐसे में राजनीतिक दलों का अलग-अलग सामाजिक और आयु वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर जोर स्वाभाविक है।
भाजपा संगठन स्तर पर भी 2028 की तैयारी कर रही है। वहीं कांग्रेस राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं के साथ सीधा संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
17 से 19 सितंबर के कार्यक्रमों का क्या संदेश?
इन तीन दिनों के कार्यक्रमों को केवल नेताओं के दौरे के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता।
17 सितंबर: नितिन नवीन का मध्य प्रदेश दौरा और भाजपा का ‘सेवा संकल्प अभियान’
18 सितंबर: उज्जैन में मोहन भागवत की ‘युवा धर्म संसद’
19 सितंबर: इंदौर में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम
यानी तीनों आयोजनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे होने के बावजूद युवा वर्ग प्रमुखता से दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक तौर पर यह संकेत जरूर है कि मध्य प्रदेश में पार्टियां आने वाले चुनावों से पहले युवा मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। अब देखना होगा कि इन कार्यक्रमों का असर केवल राजनीतिक मंचों तक रहता है या युवा मतदाताओं की वास्तविक पसंद पर भी दिखाई देता है।




