
जयपुर। राजस्थान में स्कूली और युवा छात्रों के प्रदर्शनों से निपटने के लिए सरकार नई रणनीति तैयार कर रही है। राज्य का गृह विभाग Gen-Z और Gen-Alpha से जुड़े आंदोलनों और प्रदर्शनों के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने में जुटा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पुलिस और प्रशासन का जोर बल प्रयोग के बजाय बातचीत और समझाइश पर रहेगा।
सरकार की कोशिश है कि स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी किसी समस्या या मांग को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचकर उनसे सीधे बातचीत करें और समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करें।
बच्चों से अभिभावक और दोस्त की तरह बात करेंगे अधिकारी
गृह विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हाल के दिनों में अलवर के थानागाजी, जोधपुर के लूणी और भरतपुर में स्कूली बच्चों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किए हैं।
प्रस्तावित SOP में अधिकारियों को प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों से संवेदनशील तरीके से बातचीत करने पर जोर दिया जाएगा। अधिकारियों से अपेक्षा होगी कि वे बच्चों से केवल प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि अभिभावक और दोस्त की तरह बात करें।
मौके पर ही समस्या का समाधान निकालने या प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कराने की कोशिश की जाएगी।
प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई से बचने की तैयारी
प्रस्तावित SOP में छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करने या उन पर अनावश्यक दबाव बनाने से बचने पर भी जोर दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, कानून-व्यवस्था से जुड़ी गंभीर स्थिति में पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार रहेगा।
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि बच्चों के प्रदर्शन को शुरुआत में ही संवाद के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाए।
हाल में इन जगहों पर सड़क पर उतरे बच्चे
थानागाजी में जर्जर स्कूल भवन को लेकर प्रदर्शन
14 अगस्त को अलवर जिले के थानागाजी क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जोधावास में विद्यार्थियों ने जर्जर स्कूल भवन और शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर प्रदर्शन किया था। विद्यार्थियों ने स्कूल गेट पर तालाबंदी भी की थी।
प्रशासनिक अधिकारियों के मौके पर पहुंचकर समझाइश करने के बाद विद्यार्थी शांत हुए। बाद में जर्जर भवन को हटाने की कार्रवाई की गई।
जोधपुर के लूणी में शिक्षकों की कमी पर तालाबंदी
6 अगस्त को जोधपुर जिले के लूणी क्षेत्र के अरणी नाडी मंगल नगर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों ने पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के विरोध में स्कूल गेट पर ताला लगा दिया था।
मामले की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों को मौके पर भेजा गया। प्रशासन, स्कूल प्रबंधन, ग्रामीणों और विद्यार्थियों के बीच बातचीत हुई। छात्रों को खाली पदों पर जल्द शिक्षकों की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया गया।
भरतपुर में 700 विद्यार्थियों वाले स्कूल में शिक्षकों की कमी
5 अगस्त को भरतपुर के उच्चैन क्षेत्र के सैदपुरा गांव स्थित सरकारी वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया था।
विद्यार्थियों के अनुसार स्कूल में करीब 700 छात्र हैं, जबकि प्रिंसिपल सहित 12 शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली हैं। अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।
सरकार के सामने तीन बड़ी चिंताएं
नई SOP तैयार करने के पीछे सरकार की कई चिंताएं बताई जा रही हैं। इनमें सबसे प्रमुख युवाओं और स्कूली बच्चों के साथ पुलिस की सख्ती का गलत संदेश जाने से बचना है।
1. बच्चों पर बल प्रयोग का संदेश न जाए
सरकार चाहती है कि स्कूली बच्चों के आंदोलनों में पुलिस बल प्रयोग की स्थिति कम से कम बने। बच्चों के साथ किसी भी तरह की सख्ती का सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर नकारात्मक संदेश जाने की आशंका रहती है।
2. सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने से रोकना
आज छात्रों के छोटे से प्रदर्शन को भी सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिल सकता है। पुलिस और छात्रों के बीच टकराव या लाठीचार्ज का वीडियो वायरल होने पर मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन सकता है। सरकार संवाद के जरिए ऐसी स्थिति से बचना चाहती है।
3. चुनावी माहौल में विवाद से बचना
राजस्थान में आगामी निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए सरकार किसी भी ऐसे मुद्दे से बचना चाहती है जिसे विपक्ष राजनीतिक रूप से इस्तेमाल कर सके।
विशेषज्ञ बोले- संवाद ही बेहतर रास्ता
रिटायर्ड आईजी सत्यवीर सिंह के अनुसार, लोकतंत्र में किसी भी आंदोलन या विरोध को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास होना चाहिए। उनका कहना है कि संवादहीनता की स्थिति में छोटी समस्या भी बड़ा विवाद बन सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार महेश चंद्र शर्मा ने भी कहा कि स्कूली बच्चों की मांगें सामान्य तौर पर बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी होती हैं। पर्याप्त शिक्षक, पक्के स्कूल भवन और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
SOP से पुलिस की भूमिका में आएगा बदलाव
गृह विभाग कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों के लिए समय-समय पर SOP जारी करता है। प्रस्तावित नई SOP में स्कूली और युवा प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पुलिस की शुरुआती भूमिका को संवाद और समझाइश पर केंद्रित करने की तैयारी है।
हालांकि, अंतिम SOP जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इसमें क्या-क्या प्रावधान शामिल किए जाते हैं और गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति में पुलिस की कार्रवाई के लिए क्या दिशा-निर्देश होंगे।




