सहारनपुर कलेक्ट्रेट में ढहाई गई मस्जिद के नीचे मिला कुआं, ASI करेगी जांच
करीब 20 फीट गहरा और डेढ़ मीटर चौड़ा है कुआं, प्रशासन ने लोहे की चादर से ढका; मस्जिद की कार्रवाई के बाद सियासत तेज, मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट जाने की बात कही

उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच बारिश और बाढ़ से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। रविवार सुबह से गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, संभल समेत करीब 15 शहरों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहा, जबकि श्रावस्ती में तेज बारिश के कारण बाइपास का करीब 400 मीटर हिस्सा पानी में डूब गया। बिजनौर में भी लगातार बारिश से सड़कें और गलियां जलमग्न हो गईं तथा अफजलगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 2 से 3 फीट तक पानी भर गया। अस्पताल परिसर में पानी भरने से वहां रखी एक्स-रे मशीन के डूबने और दवाइयों के खराब होने की जानकारी सामने आई है, जिससे लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और अयोध्या समेत करीब 26 जिले बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। वाराणसी में गंगा का पानी बढ़ने से घाटों के डूबने के साथ नदी किनारे बसे इलाकों में भी पानी पहुंच गया है और कुछ स्थानों पर गलियों में नाव चलाने की स्थिति बन गई है। प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण प्रमुख घाट जलमग्न हैं। दारागंज घाट स्थित शवदाह गृह में पानी भरने से अंतिम संस्कार के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कुछ लोगों को ऊंचे स्थानों पर वैकल्पिक तरीके से अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। वाराणसी में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण सभी प्रमुख घाटों पर पानी पहुंच गया है और मणिकर्णिका घाट का शवदाह गृह प्रभावित होने की जानकारी है। लोगों को पानी के बीच से शव लेकर गुजरना पड़ रहा है, जबकि कुछ अंतिम संस्कार ऊपरी हिस्से में किए जा रहे हैं। गंगा के किनारे बसे घरों में पानी घुसने से कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों या घरों की छतों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे की बस्तियों पर दबाव बढ़ा है। उन्नाव में गंगा और सई नदी के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की समस्या बढ़ा दी है। हसनगंज तहसील क्षेत्र में सई नदी के बढ़ते बहाव से रसूलपुर-अकबरपुर मार्ग का एक हिस्सा कट गया, जिसके बाद रास्ता बाधित हो गया। प्रशासनिक मदद का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने बांस और रस्सी की मदद से अस्थायी पुल बनाने की कोशिश शुरू कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि तेज बहाव के बीच यह व्यवस्था जोखिमपूर्ण है, लेकिन रोजमर्रा के आवागमन के लिए उनके पास फिलहाल दूसरा विकल्प नहीं है। उन्नाव के ही कई इलाकों में गंगा का पानी बस्तियों तक पहुंचने और गांवों के चारों तरफ जलभराव की स्थिति बनने की खबर है। हमीरपुर में भी लगातार करीब 10 दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नहर में कटान के कारण करीब 100 बीघा फसल के जलमग्न होने की जानकारी है और कई सड़कों पर पानी भर गया है। ललितपुर में गोविंद सागर बांध से पानी छोड़े जाने के बाद शहजाद नदी का बहाव तेज हो गया है और छोटे पुल पानी में डूब गए हैं। सोनभद्र में रिहंद बांध का जलस्तर करीब 871.8 फीट पर स्थिर बताया गया है। कैचमेंट क्षेत्र में बारिश कम होने के बाद बांध में पानी की आवक घटने की जानकारी है और फिलहाल एक गेट से पानी छोड़ा जा रहा है। रामपुर में भी बाढ़ से घिरे भैया नगला गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित है। क्षेत्र में पुल टूटने के बाद ग्रामीणों के सामने आवागमन की समस्या बनी हुई है। इसी बीच बदायूं में लगातार बारिश के कारण एक कच्चे मकान की छत गिरने से 45 वर्षीय विनोद की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसा मूसाझाग थाना क्षेत्र के कुंवरगांव में शनिवार रात करीब 11:30 बजे हुआ। तेज बारिश के दौरान मकान की छत अचानक गिर गई और पति-पत्नी मलबे में दब गए। आसपास के लोगों ने दोनों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने विनोद को मृत घोषित कर दिया। उनकी पत्नी का इलाज जारी है। कासगंज में भी रविवार सुबह मौसम अचानक बदला और घने बादलों के कारण दिन के समय अंधेरा छाने जैसी स्थिति बन गई। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने लोगों को उमस से राहत दी, लेकिन कई स्थानों पर जलभराव की समस्या भी सामने आई। संभल में भी करीब एक घंटे तक बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना बारिश का सिस्टम मध्य प्रदेश की ओर बढ़ रहा है और इसके प्रभाव से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटे के दौरान मौसम के रुख में बदलाव देखने को मिल सकता है और पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भारी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। अनुमान है कि 8 सितंबर के बाद यह सिस्टम कमजोर पड़ सकता है और इसके बाद प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कम होने लगेंगी। फिलहाल प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जलभराव वाले रास्तों पर अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी जा रही है। वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में घाटों के जलमग्न होने से धार्मिक गतिविधियों और अंतिम संस्कार जैसी जरूरी सेवाओं पर भी असर पड़ा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुल और खेतों में पानी भरने से आवागमन और कृषि कार्य प्रभावित हुए हैं। श्रावस्ती का 400 मीटर बाइपास डूबना, बिजनौर के अस्पताल में पानी भरना, हमीरपुर में फसल का जलमग्न होना और बदायूं में कच्चे मकान की छत गिरने जैसी घटनाएं बताती हैं कि इस समय बारिश का असर केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों और बुनियादी ढांचे पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। आने वाले 48 घंटे मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश जारी रहने के साथ पूर्वी हिस्सों में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में प्रशासन और आम लोगों के लिए जलभराव, नदी के बढ़ते जलस्तर और कमजोर मकानों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी होगी।




