पाकिस्तान से भारत में नेटवर्क फैलाने की साजिश? शहजाद भट्टी पर गंभीर आरोप, सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने का दावा
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से संपर्क और कथित आतंकी नेटवर्क खड़ा करने का आरोप; जालंधर, सिरसा और अंबाला मामलों में जांच एजेंसियां तलाश रहीं कड़ियां

नई दिल्ली। पाकिस्तान में बैठे कथित गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में कई गंभीर दावे सामने आए हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भट्टी पर सोशल मीडिया के जरिए भारत में युवाओं से संपर्क करने, उन्हें छोटे-मोटे कामों के लिए तैयार करने और बाद में आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल करने का आरोप है।
बताया गया है कि यह नेटवर्क सीधे किसी बड़े हमले के बजाय छोटे-छोटे हमलों और आपराधिक गतिविधियों के जरिए डर का माहौल पैदा करने की रणनीति पर काम करता था। हालांकि, इन दावों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों और अदालत के अंतिम निष्कर्षों से होना बाकी है।
जालंधर हमले के बाद सामने आया नाम
16 मार्च 2025 को पंजाब के जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर नवदीप सिंह संधू के घर पर ग्रेनेड हमला हुआ था। मामले की जांच के दौरान स्थानीय युवक हार्दिक कंबोज को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घटना की जिम्मेदारी पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क ने ली थी।
इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की जांच में भट्टी के कथित नेटवर्क और भारत में सक्रिय स्थानीय युवाओं के बीच संपर्क की कड़ियां खंगाली गईं।
सोशल मीडिया को बनाया संपर्क का माध्यम
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कथित नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुंचता था। शुरुआत में हथियारों या अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी पोस्ट के माध्यम से संपर्क बनाए जाने का दावा किया गया है।
इसके बाद मैसेंजर, व्हाट्सऐप या टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर बातचीत आगे बढ़ाई जाती थी। आरोप है कि युवाओं को पहले छोटे काम दिए जाते और बाद में उन्हें बड़ी जिम्मेदारियों में शामिल करने की कोशिश की जाती थी।
स्थानीय युवाओं की भूमिका की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क में स्थानीय स्तर पर ऐसे युवाओं को निशाना बनाने का आरोप है, जो आर्थिक रूप से कमजोर या नशे की गिरफ्त में थे। उन्हें पैसों का लालच देकर अलग-अलग गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
जांच में यह भी दावा किया गया है कि कथित नेटवर्क में काम करने वाले स्थानीय युवाओं को एक-दूसरे से अलग रखा जाता था, ताकि नेटवर्क की पूरी जानकारी किसी एक व्यक्ति के पास न रहे।
जालंधर, सिरसा और अंबाला मामलों की जांच
सुरक्षा एजेंसियां शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क की कड़ियों को पंजाब और हरियाणा में सामने आए कई मामलों से जोड़कर जांच कर रही हैं। इनमें जालंधर में हमला, सिरसा महिला थाने पर हमला और अंबाला में कार ब्लास्ट का मामला शामिल बताया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन मामलों में पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलर्स से संपर्क, सोशल मीडिया के जरिए युवाओं तक पहुंच और स्थानीय स्तर पर रेकी जैसे पैटर्न की जांच की गई।
NIA की कार्रवाई में भी नेटवर्क की जांच
बताया गया है कि जून 2026 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पंजाब और हरियाणा समेत कई स्थानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों और संचार से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।
जांच एजेंसियां कथित नेटवर्क की फंडिंग, सोशल मीडिया संपर्क और सीमा पार बैठे हैंडलर्स की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
भारत में नेटवर्क खत्म करने का दावा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 17 अगस्त को भारत में शहजाद भट्टी के नेटवर्क को खत्म किए जाने की बात कही थी। इसके बावजूद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमा पार बैठे कथित हैंडलर्स और नेटवर्क के मुख्य लोगों तक पहुंचने की बनी हुई है।
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में शहजाद भट्टी के साथ जुड़े बताए जा रहे कई नामों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इनमें सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलूच, आबिद जाट, अजमल गुज्जर, राना हुनैन, हम्मद बरकती, मुन्ना झिंगाडा, यावर खान और हसन गुज्जर समेत अन्य नाम शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, इन व्यक्तियों की कथित भूमिकाओं को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
सीमा पार बैठे हैंडलर्स तक पहुंचना चुनौती
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अलग-अलग राज्यों में कई संदिग्धों और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अब सीमा पार बैठे कथित हैंडलर्स, फंडिंग चैनल और डिजिटल नेटवर्क की पहचान करना है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आपराधिक नेटवर्क के लिए नई चुनौती बन रहा है। ऐसे मामलों में युवाओं को संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों से दूर रहने और किसी भी संदिग्ध संपर्क की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की सलाह दी जाती है।
नोट: इस रिपोर्ट में शामिल नेटवर्क, व्यक्तियों और घटनाओं से संबंधित आरोप जांच एजेंसियों एवं उपलब्ध रिपोर्टों में बताए गए दावों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।




