नेपाल में तबाही से पहले और बाद की 9 सैटेलाइट तस्वीरें: 6 घंटे के सैलाब ने बदला पूरा इलाका, गांव-बाजार मलबे में दबे
रसुवा से नुवाकोट तक फ्लैश फ्लड का कहर, सैटेलाइट और ड्रोन तस्वीरों में तबाही का मंजर; नदी किनारे बसे इलाकों में घर, सड़कें और बाजार मलबे में दबे

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड की भयावहता अब सैटेलाइट तस्वीरों में भी साफ दिखाई दे रही है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने गांवों, बाजारों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया। बाढ़ के बाद कई इलाके हरे-भरे पहाड़ी क्षेत्र से बदलकर मलबे और गाद से ढके नजर आ रहे हैं।
पहले और बाद की तस्वीरों में दिखा बड़ा बदलाव
सैटेलाइट तस्वीरों में नेपाल के रसुवा क्षेत्र की बाढ़ से पहले और बाद की स्थिति की तुलना की गई है। तस्वीरों में साफ दिखता है कि नदी के आसपास बसे इलाकों में बाढ़ का पानी और मलबा काफी दूर तक फैल गया।
भोटे कोशी नदी में आई तेज बाढ़ का असर आगे त्रिशूली नदी तक पहुंचा। नुवाकोट और आसपास के जिलों में भी घरों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे पर मलबा जमा हो गया।
सैटेलाइट तस्वीरों में तबाही के 9 दृश्य
तबाही से पहले और बाद की तस्वीरों में नदी के किनारे बसे इलाकों का बदला हुआ स्वरूप देखा जा सकता है। कई जगहों पर जहां पहले सड़कें, इमारतें और हरियाली दिखाई देती थी, वहीं बाद की तस्वीरों में गाद, पत्थर और मलबे की मोटी परत नजर आ रही है।
नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी और अन्य संस्थाओं द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र का शुरुआती आकलन करने में भी मदद की है।
ड्रोन फुटेज में घरों और बाजारों पर मलबा
जमीन से ली गई तस्वीरों और ड्रोन फुटेज में भी तबाही का पैमाना साफ नजर आ रहा है। त्रिशूली और नुवाकोट के इलाकों में घरों और सड़कों पर कीचड़ तथा मलबा जमा है। कई स्थानों पर नदी के किनारे का पूरा इलाका प्रभावित हुआ है।
बाढ़ की वजह क्या सामने आई?
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ, चट्टान और मलबे के बड़े पैमाने पर खिसकने से शुरू हुई। वैज्ञानिकों और अधिकारियों के अनुसार, ग्लेशियर के निचले हिस्से के टूटने से बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और तलछट घाटी में गिरी, जिससे अचानक तेज पानी और मलबे का बहाव पैदा हुआ।
शुरुआत में भूकंप को संभावित कारण माना जा रहा था, लेकिन अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार दर्ज भूकंपीय गतिविधि अलग भूकंप के बजाय इसी ग्लेशियर/मलबे के ढहने से जुड़ी थी।
भोटे कोशी से त्रिशूली तक फैला असर
भोटे कोशी नदी में आया तेज बहाव आगे त्रिशूली नदी प्रणाली में पहुंचा। इससे नदी के किनारे बसे कई इलाकों में अचानक पानी और मलबे का दबाव बढ़ गया। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ स्थानों पर पानी का स्तर बेहद कम समय में कई मीटर बढ़ गया।
इस घटना ने हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ के बढ़ते खतरे को भी सामने ला दिया है।




