तेजप्रताप को 50 करोड़ की मानहानि का नोटिस, होटल कांड के आरोपों पर बढ़ा विवाद
मंत्री संजय कुमार सिंह ने सात दिन में पोस्ट हटाने, सार्वजनिक माफी मांगने और भविष्य में ऐसी टिप्पणी नहीं करने का लिखित आश्वासन मांगा; तेजप्रताप बोले- सच सामने लाकर रहूंगा

बिहार की राजनीति में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री और महुआ विधायक संजय कुमार सिंह तथा जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मंत्री की ओर से तेज प्रताप यादव को 50 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजे जाने के बाद मामला और गरमा गया है। मंत्री के वकील सुशील कुमार की ओर से 30 अगस्त 2026 को जारी नोटिस में तेज प्रताप की सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए आरोपों को झूठा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया है। नोटिस के जरिए तेज प्रताप से सात दिनों के भीतर संबंधित पोस्ट हटाने, सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने और भविष्य में इस तरह की टिप्पणी दोबारा नहीं करने का लिखित आश्वासन देने को कहा गया है। दरअसल, विवाद उस समय शुरू हुआ जब तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि मंत्री संजय कुमार सिंह ने दिल्ली दौरे के दौरान एक बड़े होटल में महिला कर्मचारी के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया और उसके साथ शोषण का प्रयास किया। तेज प्रताप ने इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कथित तौर पर मामले को दबाने के लिए 25 लाख रुपए के लेन-देन का भी दावा किया था। मंत्री की ओर से इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अब कानूनी नोटिस भेजा गया है। इससे पहले मंत्री ने कथित तौर पर चुनौती देते हुए कहा था कि अगर कोई उनके खिलाफ आरोपों का सबूत दे देता है तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। इसके जवाब में तेज प्रताप यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि वे डरने वाले नहीं हैं और होटल से जुड़े मामले की सच्चाई सामने लाकर रहेंगे। अब 50 करोड़ रुपए के मानहानि नोटिस के बाद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक और कानूनी टकराव और तेज हो गया है। नोटिस में तेज प्रताप को संबोधित करते हुए यह भी कहा गया है कि दूसरों पर गंभीर आरोप लगाने से पहले उन्हें अपने ऊपर उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए। नोटिस में ऐश्वर्या, अनुष्का, निशु और मोनिका सहित कई नामों का उल्लेख करते हुए उनसे जुड़े सवालों पर भी तेज प्रताप की सफाई मांगी गई है। फिलहाल इस पूरे विवाद में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं है और संबंधित पक्षों के दावों के आधार पर ही मामला आगे बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि तेज प्रताप सात दिन के भीतर नोटिस का क्या जवाब देते हैं और क्या वे अपनी सोशल मीडिया पोस्ट हटाकर माफी मांगते हैं या अपने आरोपों पर कायम रहते हुए कानूनी लड़ाई लड़ते हैं। इस विवाद ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और मानहानि की कानूनी कार्रवाई को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।




