हेमंत कैबिनेट के 4 मंत्रियों का सत्ता में रहते निधन, 3 शिक्षा विभाग से जुड़े रहे
हाजी हुसैन अंसारी से लेकर सुदिव्य कुमार सोनू तक चार मंत्रियों ने गंवाई जान; करीब साढ़े तीन साल में तीन शिक्षा मंत्रियों का निधन झारखंड की राजनीति का असामान्य और दुखद संयोग

झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में अब तक चार कैबिनेट मंत्रियों का निधन हो चुका है और सुदिव्य कुमार सोनू के असामयिक निधन के बाद यह सिलसिला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हेमंत सरकार के कार्यकाल में जान गंवाने वाले मंत्रियों में हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार सोनू शामिल हैं। इन चार नेताओं में तीन का सीधा संबंध शिक्षा विभाग से रहा है। जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके थे, जबकि सुदिव्य कुमार सोनू के पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का प्रभार था। इस तरह करीब साढ़े तीन साल के अंतराल में शिक्षा से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन होना झारखंड की राजनीति में एक असामान्य और बेहद दुखद संयोग के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन घटनाओं के बीच किसी तरह के कारण या संबंध का दावा नहीं किया जा रहा है, बल्कि यह केवल हेमंत सरकार के कार्यकाल में सामने आया घटनाक्रम है। सबसे हालिया घटना सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की है, जिनकी शनिवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद गिरिडीह के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उनके निधन की खबर फैलते ही झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई और गिरिडीह में उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। सुदिव्य कुमार सोनू को JMM का जमीनी और संगठन से लंबे समय से जुड़ा नेता माना जाता था। उन्होंने 1989 में झामुमो की सदस्यता लेकर संगठनात्मक गतिविधियों में काम शुरू किया था। शुरुआती दौर में वह पार्टी के लिए दीवार लेखन, पोस्टर लगाने और गांव-गांव जाकर संगठन को मजबूत करने जैसे कार्यों में सक्रिय रहे। वर्ष 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर कमेटी का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद उन्होंने पार्टी में अलग-अलग संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं और गिरिडीह जिला अध्यक्ष भी रहे। 2019 में उन्होंने गिरिडीह सदर विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया और 2024 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने के बाद हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। मंत्री के रूप में उन्हें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के अलावा पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य तथा नगर विकास एवं आवास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी। उनके निधन के साथ हेमंत कैबिनेट ने एक ऐसे मंत्री को खोया, जो सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इससे पहले हाजी हुसैन अंसारी हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में निधन होने वाले पहले मंत्री थे। मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक और अनुभवी JMM नेता हाजी हुसैन अंसारी का वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के बाद निधन हुआ था। उनके निधन के बाद मधुपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें उनके बेटे हफीजुल हसन अंसारी ने जीत हासिल की और परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। हाजी हुसैन अंसारी के निधन ने उस समय हेमंत सरकार को बड़ा राजनीतिक झटका दिया था, क्योंकि वह सरकार और संगठन दोनों में अनुभवी नेता माने जाते थे। इसके बाद सरकार के एक और प्रमुख मंत्री जगरनाथ महतो का निधन हुआ। डुमरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक जगरनाथ महतो हेमंत सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे। कोरोना संक्रमण के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो गई थी और उन्हें लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा। उनकी गंभीर बीमारी के दौरान फेफड़े का प्रत्यारोपण भी किया गया, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके। 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। जगरनाथ महतो को झारखंड की राजनीति में मजबूत जनाधार और जमीन से जुड़े नेता के तौर पर जाना जाता था। उनके निधन के बाद डुमरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें उनकी पत्नी बेबी देवी ने जीत दर्ज की और विधानसभा पहुंचीं। जगरनाथ महतो के निधन के बाद स्कूली शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे एक और मंत्री रामदास सोरेन का निधन भी हेमंत सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से विधायक रामदास सोरेन झारखंड सरकार में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे। 15 अगस्त 2025 को उनके निधन की खबर सामने आई थी और राज्य सरकार ने उनके सम्मान में राजकीय शोक घोषित किया था। जगरनाथ महतो के बाद शिक्षा विभाग संभाल रहे एक और मंत्री के निधन से सरकार के भीतर यह जिम्मेदारी एक बार फिर चर्चा में आई। अब सुदिव्य कुमार सोनू के निधन ने इस घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि वह उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। यानी हेमंत सरकार के कार्यकाल में शिक्षा के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े तीन मंत्रियों का निधन हो चुका है। यह स्थिति राजनीतिक दृष्टि से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षा विभाग सरकार की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है और इन मंत्रियों के निधन के बाद सरकार को लगातार नेतृत्व तथा विभागीय जिम्मेदारियों में बदलाव करना पड़ा। सुदिव्य सोनू के निधन से पहले तक वह शिक्षा, नगर विकास, पर्यटन और युवा मामलों से जुड़े मुद्दों पर लगातार सक्रिय थे। हाल के दिनों में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के आंदोलनों के दौरान भी उनकी भूमिका सामने आई थी। उन्होंने सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच संवाद स्थापित करने में भूमिका निभाई थी तथा परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जांच से जुड़े मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा था। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर को भी वह गिरिडीह में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। इसी दिन इस्लामिया उर्दू मिडिल स्कूल के शताब्दी समारोह में उन्होंने हिस्सा लिया और स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था। इसके कुछ ही घंटों बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ना और फिर निधन हो जाना उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों के लिए बेहद अप्रत्याशित घटना रही। चार मंत्रियों के निधन का यह पूरा घटनाक्रम हेमंत सोरेन सरकार के राजनीतिक सफर के एक दुखद अध्याय के रूप में दर्ज हो रहा है। हाजी हुसैन अंसारी का निधन कोरोना संक्रमण के बाद हुआ, जगरनाथ महतो ने गंभीर बीमारी और फेफड़े के प्रत्यारोपण के बाद दम तोड़ा, रामदास सोरेन का निधन अगस्त 2025 में हुआ और अब सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन हुआ है। इन चारों नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियां अलग-अलग रहीं, लेकिन सभी का निधन उस समय हुआ जब वे सक्रिय राजनीति में थे और सरकार या संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। सुदिव्य सोनू के निधन के बाद JMM ने अपने प्रस्तावित कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता तथा आम लोग गिरिडीह पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनके निधन से न केवल झामुमो बल्कि हेमंत सोरेन सरकार को भी बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक झटका लगा है। अब सरकार को उनके पास रहे विभागों की जिम्मेदारियों को लेकर आगे निर्णय करना होगा। वहीं, शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों के निधन का यह संयोग झारखंड की मौजूदा राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।




