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जयपुर में भाजपा पार्षद प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी की तैयारी

22 सितंबर तक का सामान साथ लाने के निर्देश, मतगणना से पहले प्रत्याशियों को एकजुट रखने की रणनीति; कांग्रेस भी सक्रिय

जयपुर, 12 सितंबर। जयपुर नगर निगम चुनाव की मतगणना से पहले भाजपा ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने सभी पार्षद प्रत्याशियों को शनिवार दोपहर 12 बजे भाजपा मुख्यालय पहुंचने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद प्रत्याशियों को एक स्थान पर शिफ्ट किए जाने की तैयारी है। पार्टी की ओर से प्रत्याशियों से 22 सितंबर तक का जरूरी सामान साथ लाने के लिए कहा गया है।

सूत्रों के मुताबिक भाजपा की ओर से पार्षद प्रत्याशियों को फोन कर इसे प्रशिक्षण शिविर के रूप में बताया जा रहा है। दरअसल, 14 सितंबर को मतगणना, 21 सितंबर को महापौर और 22 सितंबर को उप महापौर का चुनाव होना है। ऐसे में पार्टी नतीजों से पहले ही अपने संभावित विजयी प्रत्याशियों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

प्रशिक्षण शिविर के नाम पर जुटाए जा रहे प्रत्याशी

भाजपा की ओर से प्रत्याशियों को फोन कर प्रशिक्षण शिविर की जानकारी दी जा रही है। सभी को दोपहर 12 बजे पार्टी मुख्यालय पहुंचने के लिए कहा गया है। इसके बाद उन्हें एक निर्धारित स्थान पर ले जाने की तैयारी है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार जयपुर के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की रणनीति पर काम किया जा रहा है। उदयपुर सहित कई जिलों में भी प्रत्याशियों को प्रशिक्षण शिविर के नाम पर एकजुट रखने की तैयारी की जा रही है।

मतगणना से बोर्ड गठन तक नजर

भाजपा की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य मतगणना के दौरान और उसके बाद संभावित विजयी पार्षदों को एकजुट रखना माना जा रहा है। निकाय चुनाव में कई जगहों पर मुकाबला करीबी रहने की संभावना है। ऐसे में परिणाम आने के बाद बोर्ड गठन के लिए विभिन्न दलों की ओर से पार्षदों से संपर्क साधने की कोशिश हो सकती है।

पार्टी की कोशिश है कि उसके संभावित विजयी पार्षद नतीजों के बाद दूसरे दलों के संपर्क में न जाएं। यदि किसी निकाय में बहुमत के लिए कुछ सीटों की कमी रहती है तो पार्टी अपने पार्षदों को एकजुट रखकर बोर्ड गठन की रणनीति पर आगे बढ़ सकेगी।

कांग्रेस भी रणनीति बनाने में जुटी

भाजपा की तैयारियों के बीच कांग्रेस भी सक्रिय हो गई है। पार्टी नेताओं ने पार्षद प्रत्याशियों को लेकर रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी बाड़ेबंदी को लेकर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

कांग्रेस के सामने भी अपने संभावित विजयी प्रत्याशियों को एकजुट रखने की चुनौती रहेगी। खासतौर पर उन निकायों में जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर कम रह सकता है, वहां एक-एक पार्षद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निर्दलीय प्रत्याशियों पर भी नजर

निकाय चुनाव के बाद निर्दलीय प्रत्याशी गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर संभावित रूप से जीतने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों पर है।

यदि किसी निकाय में भाजपा या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में दोनों दल संभावित निर्दलीय विजेताओं से संपर्क बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

14 सितंबर को मतगणना से साफ होगी तस्वीर

अब सभी की नजर 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर है। इसी दिन भाजपा और कांग्रेस को मिलने वाली सीटों की स्थिति स्पष्ट होगी और यह पता चलेगा कि कौन सा दल बहुमत के करीब पहुंचता है।

इसके बाद 21 सितंबर को महापौर और 22 सितंबर को उप महापौर का चुनाव होना है। ऐसे में मतगणना और बोर्ड गठन के बीच का समय राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। इसी को देखते हुए भाजपा ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को पहले ही एकजुट रखने की कवायद शुरू कर दी है।

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