ओरेकल ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला:सुबह 4 बजे सिस्टम एक्सेस बंद, 6 बजे मेल आया- आज आपका आखिरी दिन 14 घंटे पहले ओरेकल के फाउंडर लैरी एलिसन है। AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ाने के लिए कंपनी दुनिया भर में अपने वर्कफोर्स में कटौती कर रही है। – Dainik Bhaskar ओरेकल के फाउंडर लैरी एलिसन है। AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ाने के लिए कंपनी दुनिया भर में अपने वर्कफोर्स में कटौती कर रही है। टेक कंपनी ओरेकल में फिर से छंटनी शुरू हो गई है। कंपनी ने अमेरिका में हजारों कर्मचारियों को निकाल दिया है। इस फैसले के बाद भारत में स्थित ओरेकल डेवलपमेंट सेंटर के कर्मचारियों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल है। कंपनी AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ा रही है, जिसके लिए पारंपरिक विभागों से बजट कम किया जा रहा है। हालांकि, भारत में कितने कर्मचारियों की नौकरी जाएगी, इस पर ओरेकल ने अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। ईमेल से पहले VPN और स्लैक एक्सेस बंद हो रहा बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों को ले-ऑफ की आधिकारिक जानकारी मिलने से पहले ही सिस्टम का एक्सेस बंद कर दिया जाता है। छंटनी की प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों का VPN एक्सेस बंद हो जाता है और उनके स्लैक अकाउंट डिसकनेक्ट कर दिए जाते हैं। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे तक कर्मचारियों को ईमेल के जरिए नौकरी से निकाले जाने की सूचना मिलती है। कर्मचारी बोले- छंटनी का तरीका काफी सख्त… सुबह 4:00 बजे: कंपनी के सिस्टम में कर्मचारियों का लॉग-इन होना बंद। सुबह 5:00 बजे: मैसेजिंग एप ‘स्लैक’ से कर्मचारी अपने आप लॉग-आउट। गेट पर एंट्री बंद: ऑफिस गेट पर एंट्री कार्ड ने काम करना बंद किया। सुबह 6:00 बजे: कंपनी मैनेजमेंट की तरफ से मेल आया-“कंपनी में बदलाव के कारण आपके पद को खत्म किया जा रहा है और आज आपका आखिरी दिन है।” 21,000 कर्मचारियों को पहले ही निकाला जा चुका है ओरेकल ने इस साल अपने कुल वर्कफोर्स में करीब 13% यानी 21,000 कर्मचारियों को निकाला है। 31 मई 2026 तक कंपनी में कुल 1.41 लाख कर्मचारी काम कर रहे थे। 14 सितंबर को अमेरिका में हुई छंटनी से साफ है कि कंपनी की रीस्ट्रक्चरिंग जारी है। इन विभागों पर पड़ रहा है सबसे ज्यादा असर इस बार कर्मचारियों को उनकी खराब परफॉर्मेंस की वजह से नहीं निकाला जा रहा है, बल्कि कंपनी अपनी प्राथमिकताओं को बदल रही है। इसी वजह से सालों से काम कर रहे और बेहतरीन काम करने वाले कर्मचारियों को भी हटाया जा रहा है। इन विभागों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है: टेक्निकल टीम: डेटा सेंटर और क्लाउड की सुरक्षा देखने वाले कर्मचारी। सॉफ्टवेयर डेवलपर: फ्यूजन, नेटसूट और एचआर सॉफ्टवेयर बनाने वाली टीमें। सेल्स और सपोर्ट: सेल्स एग्जीक्यूटिव और ग्राहकों की मदद करने वाला स्टाफ। अगर यह छंटनी भारत में भी शुरू होती है, तो इसका असर केवल कस्टमर केयर या सपोर्ट स्टाफ पर ही नहीं, बल्कि टेक्निकल और इंजीनियरिंग टीमों पर भी पड़ेगा। भारत में इस साल पहले भी हुई थी छंटनी इससे पहले इसी साल मार्च-अप्रैल में ओरेकल इंडिया से बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला गया था। खबरों के मुताबिक, तब करीब 12,000 कर्मचारियों की नौकरी गई थी। हालांकि कंपनी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। पुराने काम बंद, AI और डेटा सेंटर में नई नौकरियां ओरेकल एक तरफ पुराने विभागों से लोगों को हटा रही है, तो दूसरी तरफ AI और डेटा सेंटर जैसे नए क्षेत्रों में भर्तियां भी कर रही है। कंपनी अब इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क की मजबूती, डेटा सेंटर बनाने और AI जैसी नई तकनीकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। भारत पर इसका क्या असर हो सकता है? अमेरिका में 14 सितंबर को हुई छंटनी के बाद भारत में काम कर रहे कर्मचारियों की चिंता भी बढ़ गई है। जिस तेजी से कंपनी पुराने सॉफ्टवेयर का काम समेटकर AI की तरफ बढ़ रही है, उससे भारत में भी कर्मचारियों के रोल बदले जा सकते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ Google Preferred Source CTA
AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते फोकस के बीच Oracle में छंटनी; कर्मचारियों के मुताबिक सिस्टम और ऑफिस एक्सेस बंद होने के बाद भेजा गया टर्मिनेशन ईमेल

ओरेकल के फाउंडर लैरी एलिसन है। AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ाने के लिए कंपनी दुनिया भर में अपने वर्कफोर्स में कटौती कर रही है।
टेक कंपनी ओरेकल में फिर से छंटनी शुरू हो गई है। कंपनी ने अमेरिका में हजारों कर्मचारियों को निकाल दिया है। इस फैसले के बाद भारत में स्थित ओरेकल डेवलपमेंट सेंटर के कर्मचारियों के बीच भी अनिश्चितता का माहौल है।
कंपनी AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ा रही है, जिसके लिए पारंपरिक विभागों से बजट कम किया जा रहा है। हालांकि, भारत में कितने कर्मचारियों की नौकरी जाएगी, इस पर ओरेकल ने अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।
ईमेल से पहले VPN और स्लैक एक्सेस बंद हो रहा
बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों को ले-ऑफ की आधिकारिक जानकारी मिलने से पहले ही सिस्टम का एक्सेस बंद कर दिया जाता है।
छंटनी की प्रक्रिया के तहत कर्मचारियों का VPN एक्सेस बंद हो जाता है और उनके स्लैक अकाउंट डिसकनेक्ट कर दिए जाते हैं। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे तक कर्मचारियों को ईमेल के जरिए नौकरी से निकाले जाने की सूचना मिलती है।
कर्मचारी बोले- छंटनी का तरीका काफी सख्त…
- सुबह 4:00 बजे: कंपनी के सिस्टम में कर्मचारियों का लॉग-इन होना बंद।
- सुबह 5:00 बजे: मैसेजिंग एप ‘स्लैक’ से कर्मचारी अपने आप लॉग-आउट।
- गेट पर एंट्री बंद: ऑफिस गेट पर एंट्री कार्ड ने काम करना बंद किया।
- सुबह 6:00 बजे: कंपनी मैनेजमेंट की तरफ से मेल आया-“कंपनी में बदलाव के कारण आपके पद को खत्म किया जा रहा है और आज आपका आखिरी दिन है।”
21,000 कर्मचारियों को पहले ही निकाला जा चुका है
ओरेकल ने इस साल अपने कुल वर्कफोर्स में करीब 13% यानी 21,000 कर्मचारियों को निकाला है। 31 मई 2026 तक कंपनी में कुल 1.41 लाख कर्मचारी काम कर रहे थे। 14 सितंबर को अमेरिका में हुई छंटनी से साफ है कि कंपनी की रीस्ट्रक्चरिंग जारी है।
इन विभागों पर पड़ रहा है सबसे ज्यादा असर
इस बार कर्मचारियों को उनकी खराब परफॉर्मेंस की वजह से नहीं निकाला जा रहा है, बल्कि कंपनी अपनी प्राथमिकताओं को बदल रही है। इसी वजह से सालों से काम कर रहे और बेहतरीन काम करने वाले कर्मचारियों को भी हटाया जा रहा है।
इन विभागों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है:
- टेक्निकल टीम: डेटा सेंटर और क्लाउड की सुरक्षा देखने वाले कर्मचारी।
- सॉफ्टवेयर डेवलपर: फ्यूजन, नेटसूट और एचआर सॉफ्टवेयर बनाने वाली टीमें।
- सेल्स और सपोर्ट: सेल्स एग्जीक्यूटिव और ग्राहकों की मदद करने वाला स्टाफ।
अगर यह छंटनी भारत में भी शुरू होती है, तो इसका असर केवल कस्टमर केयर या सपोर्ट स्टाफ पर ही नहीं, बल्कि टेक्निकल और इंजीनियरिंग टीमों पर भी पड़ेगा।
भारत में इस साल पहले भी हुई थी छंटनी
इससे पहले इसी साल मार्च-अप्रैल में ओरेकल इंडिया से बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला गया था। खबरों के मुताबिक, तब करीब 12,000 कर्मचारियों की नौकरी गई थी। हालांकि कंपनी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।
पुराने काम बंद, AI और डेटा सेंटर में नई नौकरियां
ओरेकल एक तरफ पुराने विभागों से लोगों को हटा रही है, तो दूसरी तरफ AI और डेटा सेंटर जैसे नए क्षेत्रों में भर्तियां भी कर रही है। कंपनी अब इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क की मजबूती, डेटा सेंटर बनाने और AI जैसी नई तकनीकों पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है।
भारत पर इसका क्या असर हो सकता है?
अमेरिका में 14 सितंबर को हुई छंटनी के बाद भारत में काम कर रहे कर्मचारियों की चिंता भी बढ़ गई है। जिस तेजी से कंपनी पुराने सॉफ्टवेयर का काम समेटकर AI की तरफ बढ़ रही है, उससे भारत में भी कर्मचारियों के रोल बदले जा सकते हैं।
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नई दिल्ली। टेक कंपनी Oracle में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अमेरिका में हजारों कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है। छंटनी के बाद भारत में मौजूद ओरेकल डेवलपमेंट सेंटर के कर्मचारियों के बीच भी नौकरी को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कंपनी इस समय AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपना निवेश बढ़ा रही है। इसके लिए कुछ पारंपरिक विभागों के बजट में कटौती की जा रही है। हालांकि, भारत में इस ताजा छंटनी से कितने कर्मचारियों के प्रभावित होने की आधिकारिक जानकारी कंपनी ने अभी नहीं दी है।
ईमेल आने से पहले ही बंद हो गया सिस्टम एक्सेस
बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों को नौकरी जाने की आधिकारिक जानकारी मिलने से पहले ही कंपनी के सिस्टम से बाहर कर दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, छंटनी की प्रक्रिया में कर्मचारियों का VPN एक्सेस बंद किया गया और Slack अकाउंट डिस्कनेक्ट कर दिए गए। इसके बाद कर्मचारियों को ईमेल के जरिए बताया गया कि उनकी नौकरी खत्म की जा रही है।
कर्मचारियों ने बताया- सुबह से शुरू हो गया था एक्सेस बंद होने का सिलसिला
रिपोर्ट में कर्मचारियों के हवाले से छंटनी की प्रक्रिया को इस तरह बताया गया है:
- सुबह 4 बजे: कंपनी के सिस्टम में लॉग-इन एक्सेस बंद हो गया।
- सुबह 5 बजे: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Slack से कर्मचारी लॉग-आउट हो गए।
- ऑफिस एंट्री बंद: कुछ कर्मचारियों के एक्सेस कार्ड ने काम करना बंद कर दिया।
- सुबह 6 बजे: मैनेजमेंट की ओर से ईमेल मिला कि संगठन में बदलाव के कारण संबंधित पद खत्म किया जा रहा है और उसी दिन आखिरी कार्यदिवस है।
इस प्रक्रिया ने प्रभावित कर्मचारियों के बीच काफी असमंजस और चिंता पैदा की।
इस साल करीब 21 हजार कर्मचारियों की छंटनी का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, ओरेकल ने इस साल अपने कुल वर्कफोर्स में करीब 13% यानी लगभग 21,000 कर्मचारियों की कटौती की है।
31 मई 2026 तक कंपनी में करीब 1.41 लाख कर्मचारी काम कर रहे थे। 14 सितंबर को अमेरिका में हुई नई छंटनी से संकेत मिलता है कि कंपनी का रीस्ट्रक्चरिंग प्रोग्राम अभी जारी है।
खराब प्रदर्शन नहीं, बदलती प्राथमिकताओं का असर
इस बार की छंटनी को केवल कर्मचारियों के प्रदर्शन से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। कंपनी अपनी कारोबारी प्राथमिकताओं में बदलाव कर रही है और AI तथा क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा संसाधन लगा रही है।
इस वजह से लंबे समय से कंपनी के साथ काम कर रहे कर्मचारियों के पद भी प्रभावित हो रहे हैं।
इन विभागों पर ज्यादा असर
टेक्निकल टीम: डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा से जुड़े कुछ रोल प्रभावित होने की बात सामने आई है।
सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट: Fusion, NetSuite और HR सॉफ्टवेयर से जुड़ी कुछ टीमों पर भी असर पड़ने की रिपोर्ट है।
सेल्स और सपोर्ट: सेल्स एग्जीक्यूटिव तथा ग्राहक सहायता से जुड़े कर्मचारियों की नौकरियां भी प्रभावित हुई हैं।
अगर इसी तरह की छंटनी भारत में होती है, तो इसका असर केवल कस्टमर सपोर्ट तक सीमित रहने के बजाय टेक्निकल और इंजीनियरिंग रोल पर भी पड़ सकता है।
भारत में पहले भी छंटनी की खबरें आई थीं
इस साल मार्च-अप्रैल में भी ओरेकल इंडिया में बड़े पैमाने पर छंटनी की खबरें सामने आई थीं। रिपोर्ट्स में करीब 12,000 कर्मचारियों के प्रभावित होने का दावा किया गया था। हालांकि, कंपनी की ओर से इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।
पुराने काम कम, AI और डेटा सेंटर पर फोकस
ओरेकल एक ओर पारंपरिक विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम कर रही है, वहीं दूसरी ओर AI और डेटा सेंटर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है।
कंपनी का फोकस डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, नेटवर्क क्षमता, क्लाउड और AI तकनीक पर बढ़ रहा है। ऐसे में कर्मचारियों के मौजूदा रोल में बदलाव और नई तकनीकी क्षमताओं की मांग बढ़ने की संभावना है।
भारत में कर्मचारियों पर क्या असर हो सकता है?
अमेरिका में हुई ताजा छंटनी के बाद भारत में ओरेकल के कर्मचारियों के बीच भी अनिश्चितता बढ़ सकती है। कंपनी जिस तरह पुराने सॉफ्टवेयर और पारंपरिक कामकाज से संसाधन हटाकर AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रही है, उससे भारत में भी कुछ भूमिकाओं के पुनर्गठन की संभावना बनी हुई है।
हालांकि, भारत में इस ताजा दौर की छंटनी कितने कर्मचारियों को प्रभावित करेगी, इस पर अभी कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।




