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ट्रम्प प्रशासन और हूतियों के बीच सीक्रेट डील की रिपोर्ट: अमेरिकी जहाजों को निशाना न बनाने पर सहमति का दावा; सऊदी को अमेरिकी सैन्य मदद पर सवाल

ओमान में अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों की बैठक की रिपोर्ट; सऊदी जहाजों और यमन में संभावित अमेरिकी भूमिका को लेकर क्षेत्रीय तनाव जारी

अमेरिका और यमन के हूती संगठन के बीच कथित तौर पर एक गोपनीय समझ विकसित होने की रिपोर्ट सामने आई है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हूतियों ने लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाने की बात कही है।

इसके बदले ट्रम्प प्रशासन द्वारा यमन में हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब को सीधे सैन्य समर्थन नहीं देने की नीति अपनाए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस कथित समझौते की पूरी शर्तें सार्वजनिक नहीं हैं।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सीधे संपर्क की पुष्टि की

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिका और हूतियों के बीच सीधे संपर्क होने की पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह मस्कट स्थित अमेरिकी दूतावास में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी।

अमेरिका ने मार्च 2025 में हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इसके बावजूद क्षेत्रीय तनाव कम करने और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न पक्षों के साथ बातचीत की प्रक्रिया जारी रहने की बात सामने आई है।

सऊदी अरब की भूमिका को लेकर बढ़ी चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों और अमेरिका के बीच कथित समझ के बाद सऊदी अरब के सामने यमन में अपनी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने का सवाल खड़ा हो सकता है।

यमन के पूर्व अमेरिकी उप राजदूत नबील खौरी ने इस स्थिति को दोनों पक्षों के बीच एक तरह की ‘मौन समझ’ के रूप में वर्णित किया है। उनके अनुसार, अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को लेकर हूतियों की नीति सऊदी जहाजों से अलग हो सकती है।

हालांकि, हूती गतिविधियों और किसी औपचारिक समझौते की शर्तों को लेकर स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि नहीं हुई है।

सऊदी अरब ने मक्का की ओर ड्रोन भेजे जाने का दावा किया

सऊदी अरब ने मंगलवार को दावा किया कि हूतियों की ओर से मक्का के पास ड्रोन भेजा गया था। सऊदी रक्षा बलों ने ड्रोन को रोककर नष्ट करने की बात कही।

सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्किये अल-मलिकी के अनुसार, ड्रोन को स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:50 बजे मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास रोका गया।

सऊदी अरब ने इस घटना को गंभीर सुरक्षा मामला बताया। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) की ओर से भी इस दावे पर प्रतिक्रिया दी गई।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कथित घटना की निंदा की।

हूतियों ने सऊदी दावे को बताया झूठ

हूती नेतृत्व ने मक्का की ओर ड्रोन भेजे जाने के सऊदी दावे को खारिज किया। हूती उप विदेश मंत्री अब्दुल वहीद अबू रास ने इसे गलत बताते हुए सऊदी दावे पर सवाल उठाए।

इस तरह, इस घटना को लेकर सऊदी अरब और हूती नेतृत्व के दावों में स्पष्ट विरोधाभास है।

सऊदी F-15 और अरामको संयंत्र पर हमले का भी दावा

हूतियों ने यह भी दावा किया कि उन्होंने यमन के मारिब इलाके के पास सऊदी अरब का F-15 लड़ाकू विमान गिराया है। इसके अलावा लाल सागर के तटवर्ती शहर यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक संयंत्र को निशाना बनाने का दावा भी किया गया।

हूती सैन्य प्रवक्ता की ओर से इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।

अमेरिका, इजराइल और अरब देशों के सैन्य अधिकारियों की बैठक की रिपोर्ट

इस बीच, अमेरिका, इजराइल और कई अरब देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच जर्मनी में एक बैठक होने की रिपोर्ट भी सामने आई है।

एक्सिओस के पत्रकार बराक रैविड के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताह यह बैठक आयोजित की थी। रिपोर्ट के अनुसार इसमें इजराइल, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य अधिकारी शामिल हुए।

रिपोर्ट में इसे ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल संघर्ष शुरू होने के बाद इस तरह की पहली बैठक बताया गया है।

संयुक्त राष्ट्र में लाल सागर की सुरक्षा का मुद्दा उठा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाल सागर में नौवहन को प्रभावित करने वाली किसी भी कार्रवाई को लेकर चिंता जताई गई। क्षेत्र में हूती गतिविधियों के कारण समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा लगातार अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है।

ईरान और चीन के बीच होर्मुज को लेकर बातचीत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बातचीत में क्षेत्रीय तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

चीन ने क्षेत्रीय तनाव को यमन और लाल सागर तक फैलने से रोकने की जरूरत बताई और बातचीत के जरिए समाधान की अपील की।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।

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