प्रदेश में महिला सांसदों की सांसद निधि खर्च दर ज्यादा: सागर की लता वानखेड़े सबसे आगे, भोपाल के आलोक शर्मा चौथे स्थान पर
मध्यप्रदेश के 40 सांसदों को 592.6 करोड़ रुपए आवंटित, अब तक 239.5 करोड़ यानी 40.4% खर्च; मुरैना के शिवमंगल सिंह तोमर की खर्च दर 26.38%

मध्यप्रदेश में सांसद निधि यानी MPLADS के तहत आवंटित राशि के उपयोग को लेकर सामने आए आंकड़ों में महिला सांसदों की औसत खर्च दर पुरुष सांसदों से अधिक बताई गई है। मौजूदा कार्यकाल के दौरान प्रदेश के 40 सांसदों को कुल 592.6 करोड़ रुपए आवंटित हुए, जिनमें से अब तक 239.5 करोड़ रुपए यानी 40.4% खर्च किए गए हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सागर की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने 99.89% राशि खर्च की है। वहीं भोपाल के सांसद आलोक शर्मा चौथे स्थान पर बताए गए हैं। मुरैना के सांसद शिवमंगल सिंह तोमर की खर्च दर 26.38% रही।
महिला सांसदों की औसत खर्च दर करीब 74%
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की 8 महिला सांसदों ने औसतन करीब 74% सांसद निधि खर्च की है। वहीं 23 पुरुष सांसदों की औसत खर्च दर करीब 65% रही।
यानी उपलब्ध आंकड़ों में महिला सांसदों की औसत खर्च दर पुरुष सांसदों से करीब 9 प्रतिशत अंक अधिक है।
इस तुलना में केंद्रीय मंत्रियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण तथा हाल में शपथ लेने वाले तीन नए राज्यसभा सदस्यों को उनका कार्यकाल नया होने के कारण शामिल नहीं किया गया है।
लोकसभा सांसदों के खर्च के आंकड़े
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने 83.22% और खंडवा के ज्ञानेश्वर पाटिल ने 78.43% सांसद निधि खर्च की है।
देवास के महेंद्र सिंह सोलंकी की खर्च दर 73.84%, उज्जैन के अनिल फिरोजिया की 68.05% और ग्वालियर के भारत सिंह कुशवाह की 54.82% रही।
नर्मदापुरम के दर्शन सिंह चौधरी ने 14.70 करोड़ रुपए में से 6.96 करोड़ रुपए यानी 47.36% खर्च किए हैं।
राज्यसभा सांसदों में विवेक तन्खा आगे
मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने 2022-28 के कार्यकाल के दौरान मिली 22.05 करोड़ रुपए की राशि में से 18.47 करोड़ रुपए यानी 83.75% खर्च किए हैं।
डॉ. कविता पाटीदार ने 75.54% राशि खर्च की है। वहीं 2024-30 कार्यकाल वाली माया नरोलिया ने 14.70 करोड़ रुपए में से 10.62 करोड़ यानी 72.31% राशि का उपयोग किया है।
सांसद निधि से बने कामों की गुणवत्ता पर भी सवाल
सांसद निधि से बनाए गए विकास कार्यों की जमीनी स्थिति को लेकर कराए गए एक सर्वे में भी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
सर्वे में शामिल सभी परिसंपत्तियां मौके पर मौजूद मिलीं, लेकिन करीब हर 20वां काम उपयोगहीन पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 82% कार्यों का उचित रखरखाव हो रहा था, जबकि करीब 18% कार्य बदहाल स्थिति में मिले।
स्वीकृति प्रक्रिया में करीब 87% कार्य समय पर मंजूर हुए, जबकि लगभग हर आठवें कार्य की स्वीकृति में देरी दर्ज की गई



