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नीतीश NDA छोड़ें तो कैसे बनेगी सरकार? 3 समीकरण: RJD का ऑफर, JDU के 85 विधायक और बहुमत का पूरा गणित

UCC को लेकर JDU और BJP के रुख में अंतर के बीच RJD ने नीतीश कुमार को महागठबंधन में आने का न्योता दिया; 243 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 122 विधायक जरूरी

बिहार की राजनीति में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा-एनडीए शासित 21 राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य है। इसके बाद बिहार में JDU नेताओं के अलग-अलग रुख सामने आए।

JDU के प्रदेश महासचिव श्याम रजक ने बिहार में UCC लागू नहीं होने देने की बात कही, जबकि पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि पहले प्रस्तावित ड्राफ्ट देखा जाएगा और उसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की जाएगी।

इसी राजनीतिक मतभेद के बीच RJD ने JDU को NDA छोड़कर महागठबंधन के साथ सरकार बनाने का सार्वजनिक न्योता दिया है।

RJD ने JDU को क्यों दिया सरकार बनाने का न्योता?

RJD नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि JDU को NDA से अलग होकर महागठबंधन के साथ आना चाहिए। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार चाहें तो दोनों दल मिलकर सरकार बना सकते हैं।

RJD का यह बयान ऐसे समय आया है जब UCC को लेकर JDU और भाजपा के रुख में अंतर दिखाई दे रहा है। हालांकि, JDU ने अभी NDA छोड़ने या RJD के साथ सरकार बनाने की घोषणा नहीं की है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, JDU ने UCC पर फिलहाल सावधानी वाला रुख अपनाया है और पार्टी प्रस्तावित प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद अपना रुख तय करने की बात कह रही है।

पहले भी कई बार साथ आ चुके हैं JDU और RJD

नीतीश कुमार और RJD के बीच राजनीतिक गठबंधन का इतिहास रहा है।

  • 2015: विधानसभा चुनाव के बाद JDU, RJD और कांग्रेस ने मिलकर महागठबंधन सरकार बनाई। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री और तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बने।
  • 2017: नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर BJP के साथ सरकार बनाई।
  • अगस्त 2022: नीतीश कुमार ने BJP से गठबंधन तोड़ा और RJD, कांग्रेस तथा वाम दलों के साथ फिर सरकार बनाई।
  • जनवरी 2024: नीतीश कुमार दोबारा NDA में लौट गए।

इन घटनाओं की वजह से बिहार की राजनीति में JDU-RJD गठजोड़ की संभावना को लेकर चर्चा पहले भी होती रही है।

अब विधानसभा में क्या है संख्या बल?

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में 243 सीटों के परिणाम घोषित हुए थे। BJP को 89 और JDU को 85 सीटें मिलीं। RJD के खाते में 25, कांग्रेस के 6 और AIMIM के 5 विधायक आए। NDA के कुल 202 विधायक हैं।

बहुमत का आंकड़ा 122 है।

यहीं से नीतीश कुमार के NDA छोड़ने की स्थिति में सरकार के संभावित गणित की चर्चा शुरू होती है।

समीकरण 1: JDU और RJD साथ आएं

JDU के 85 और RJD के 25 विधायक मिलकर 110 होते हैं।

यानी केवल JDU और RJD के समर्थन से सरकार बनाने के लिए 12 और विधायकों की जरूरत होगी।

इस स्थिति में कांग्रेस के 6 विधायक और महागठबंधन के अन्य विधायकों का समर्थन मिलने के बावजूद संख्या 122 तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी।

समीकरण 2: JDU + RJD + कांग्रेस + अन्य विपक्षी दल

2025 के चुनाव परिणामों के अनुसार RJD के 25, कांग्रेस के 6, CPI(ML) के 2, CPI(M) के 1 और Indian Inclusive Party के 1 विधायक हैं। इन सभी को JDU के 85 के साथ जोड़ने पर कुल संख्या 120 होती है।

ऐसे में बहुमत के लिए 2 और विधायकों की जरूरत होगी।

AIMIM के 5 विधायक समर्थन दें तो संख्या 125 तक पहुंच सकती है। 2025 में AIMIM ने पांच सीटें जीती थीं।

हालांकि, यह केवल विधानसभा के मौजूदा संख्या बल पर आधारित गणित है। वास्तविक सरकार गठन के लिए संबंधित दलों का औपचारिक समर्थन और राज्यपाल के समक्ष बहुमत साबित करना जरूरी होगा।

समीकरण 3: NDA टूटने के बाद नया राजनीतिक संघर्ष

अगर JDU NDA से अलग होती है तो BJP के पास अपने 89 विधायक रहेंगे। NDA के अन्य घटकों के साथ BJP की मौजूदा संख्या 202 है। इसलिए JDU के अलग होने की स्थिति में सत्ता का गणित बदल जाएगा।

इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि JDU के 85 विधायक किस दिशा में जाते हैं और अन्य दलों के विधायक किस गठबंधन का समर्थन करते हैं।

यह कहना कि कोई दल निश्चित तौर पर दूसरे दल में टूट कर चला जाएगा, अभी अनुमान होगा। ऐसी स्थिति में दल-बदल कानून, विधायकों की संख्या और विधानसभा में विश्वास मत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

UCC बना राजनीतिक मतभेद का नया मुद्दा

UCC पर JDU की ओर से अलग-अलग स्तर पर अलग स्वर सामने आए हैं। श्याम रजक ने बिहार में इसे लागू नहीं होने देने की बात कही है, जबकि संजय झा ने कहा है कि पार्टी पहले ड्राफ्ट देखेगी और उसके बाद केंद्र से बातचीत करेगी।

RJD ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर JDU से NDA छोड़ने की अपील की है। हालांकि, अभी तक JDU की ओर से RJD के प्रस्ताव को स्वीकार करने की कोई घोषणा नहीं हुई है।

नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री नहीं हैं

मौजूदा राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री नहीं हैं। बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार सम्राट चौधरी वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। चौधरी ने 15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

नीतीश कुमार अब राज्यसभा सदस्य और JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में अगर भविष्य में JDU NDA से अलग होने का फैसला करता है तो यह केवल सरकार बदलने का नहीं, बल्कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और बिहार की सत्ता के बीच संबंधों का भी सवाल होगा।

18 सितंबर की JDU बैठक पर नजर

UCC को लेकर जारी राजनीतिक चर्चा के बीच JDU की 18 सितंबर को होने वाली बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी इस मुद्दे पर आगे की रणनीति पर चर्चा कर सकती है।

फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक बयानों के आधार पर JDU ने NDA से अलग होने का निर्णय घोषित नहीं किया है। इसलिए RJD के न्योते को अभी राजनीतिक प्रस्ताव के रूप में ही देखा जा रहा है।

बिहार विधानसभा का मौजूदा संख्या बल

दल सीटें
BJP 89
JDU 85
RJD 25
LJP (रामविलास) 19
कांग्रेस 6
AIMIM 5
HAM(S) 5
राष्ट्रीय लोक मोर्चा 4
CPI(ML) 2
CPI(M) 1
IIP 1
BSP 1
कुल 243

2025 के विधानसभा परिणामों के अनुसार ये आंकड़े हैं।

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