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बोन मैरो ट्रांसप्लांट से थैलेसीमिया का स्थायी इलाज संभव

समय पर जांच और स्क्रीनिंग से बच्चों को बचाया जा सकता है

आज World Thalassemia Day के अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि थैलेसीमिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी का इलाज अब संभव है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) के जरिए बच्चों को इस बीमारी से स्थायी राहत मिल सकती है। साथ ही शादी से पहले और गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग कराकर इस बीमारी को जन्म से पहले रोका भी जा सकता है।

हर 15 से 20 दिन में चढ़ाना पड़ता है खून

जयपुर स्थित Bhagwan Mahaveer Cancer Hospital & Research Centre के सीनियर ब्लड कैंसर एवं बीएमटी विशेषज्ञ प्रकाश सिंह शेखावत ने बताया कि थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चों को हर 15 से 20 दिन में ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।

बोन मैरो ट्रांसप्लांट बना सबसे प्रभावी इलाज

डॉ. शेखावत के अनुसार बोन मैरो ट्रांसप्लांट वर्तमान में थैलेसीमिया का सबसे प्रभावी और स्थायी इलाज माना जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज के खराब बोन मैरो को स्वस्थ स्टेम सेल्स से बदला जाता है, जिससे शरीर में सामान्य रूप से हेल्दी ब्लड बनना शुरू हो जाता है।

उन्होंने बताया कि यदि समय पर सही डोनर मिल जाए, खासकर भाई-बहन में से, तो ट्रांसप्लांट की सफलता दर काफी अच्छी रहती है।

मैचिंग डोनर नहीं मिलने पर भी संभव इलाज

विशेषज्ञों के मुताबिक अब आधुनिक तकनीक हैप्लो-आइडेंटिकल ट्रांसप्लांट के जरिए परिवार के अन्य सदस्यों से भी बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। कम उम्र में किया गया ट्रांसप्लांट ज्यादा सफल माना जाता है।

सरकारी योजनाओं में मुफ्त इलाज

डॉक्टरों ने बताया कि राजस्थान सरकार की ‘मां योजना’ और केंद्र सरकार के ‘कोल इंडिया प्रोग्राम’ के तहत थैलेसीमिया मरीजों का नि:शुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट भी किया जा रहा है।

बच्चों में दिखने वाले प्रमुख लक्षण

शिशु कैंसर एवं रक्त रोग विशेषज्ञ शिवानी माथुर के अनुसार थैलेसीमिया मेजर के लक्षण बच्चों में 6 महीने से 1 साल की उम्र के बीच दिखने लगते हैं।

प्रमुख लक्षण:

  • शरीर में अत्यधिक कमजोरी
  • चेहरा पीला पड़ना
  • बार-बार बुखार या संक्रमण
  • भूख कम लगना
  • वजन और लंबाई का सही विकास न होना
  • पेट फूलना
  • सांस फूलना
  • जल्दी थक जाना

शादी से पहले स्क्रीनिंग जरूरी

डॉ. माथुर ने कहा कि थैलेसीमिया रोकने के लिए विवाह पूर्व और गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग बेहद जरूरी है। यदि माता-पिता दोनों थैलेसीमिया माइनर हों तो बच्चे में थैलेसीमिया मेजर होने का खतरा करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। समय पर जांच और जेनेटिक काउंसलिंग से इस बीमारी को रोका जा सकता है।

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