RGHS घोटाला: फर्जी जांच और मिलीभगत से करोड़ों की चपत
मरीजों की जानकारी के बिना उनके नाम पर उठाए गए फर्जी क्लेम

जयपुर में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) से जुड़े बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में सामने आया कि डॉक्टरों और निजी लैब संचालकों की मिलीभगत से फर्जी जांच दिखाकर करोड़ों रुपये का क्लेम उठाया गया।
फर्जी तारीख और बिना मरीज जांच के क्लेम
रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी पैसे का दुरुपयोग
जांच में सामने आया कि:
- मरीज की MRI एक दिन पहले हुई, लेकिन अगले दिन दिखाकर भुगतान लिया गया
- कुछ मामलों में मरीज अस्पताल आया ही नहीं, फिर भी उसके नाम पर जांच क्लेम की गई
- दूसरे अस्पताल में भर्ती मरीजों के नाम से भी फर्जी बिल बनाए गए
- प्राइवेट डॉक्टर की सलाह को सरकारी डॉक्टर के नाम पर दिखाकर पैसा लिया गया
ऐसे चलता था पूरा फर्जीवाड़ा
महंगी जांचें दिखाकर कई गुना भुगतान उठाया गया
आरोपियों ने योजना का दुरुपयोग करने के लिए कई तरीके अपनाए:
- बिना मरीज देखे फर्जी पर्चियां बनाकर पोर्टल पर अपलोड
- जरूरत न होने पर भी महंगी जांच (खासतौर पर MRI) लिखना
- सामान्य जांच को “Contrast MRI” दिखाकर ज्यादा रकम लेना
- एक ही जांच को कई बार दिखाकर अतिरिक्त क्लेम लेना
- डॉक्टर की अनुपस्थिति में भी उनके नाम से पर्चियां जारी करना
गिरफ्तारियां और जांच जारी
कई डॉक्टर और लैब कर्मी रडार पर
SOG ने मामले में
- डॉ. कमल कुमार अग्रवाल
- डॉ. बनवारी लाल (निजी लैब संचालक)
को गिरफ्तार किया है।
SOG के अधिकारी पारिस देशमुख के अनुसार, अन्य डॉक्टरों और लैब कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच जारी है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
पहले भी हो चुकी कार्रवाई
7 डॉक्टर निलंबित, कई अस्पतालों पर केस
राज्य में इससे पहले भी:
- 7 डॉक्टर निलंबित
- 19 FIR दर्ज
- 500 से अधिक कार्ड ब्लॉक
- कई अस्पताल और फार्मेसी के खिलाफ कार्रवाई
2200 करोड़ का बकाया और बढ़ता विवाद
भुगतान अटका, अब घोटाले ने बढ़ाई चिंता
RGHS योजना में पहले से ही करीब 2200 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान लंबित है। ऐसे में इस घोटाले के सामने आने से:
- योजना की विश्वसनीयता पर सवाल
- असली मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर
- स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर चिंता
जांच में चौंकाने वाले खुलासे
छुट्टी पर डॉक्टरों के नाम से भी जारी हुई पर्चियां
जांच में पाया गया कि:
- कुछ डॉक्टर छुट्टी पर थे, फिर भी उनके नाम से पर्चियां बनीं
- कुछ पर्चियों पर जिन डॉक्टरों के नाम थे, वे उस समय वहां तैनात ही नहीं थे
- कई जांचों का कोई मेडिकल आधार (justification) नहीं मिला
निष्कर्ष
सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर बड़ा घोटाला
यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोर निगरानी को भी उजागर करता है। जांच जारी है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।




