दिल्ली में सिरसा सहित सिख प्रदर्शनकारी हिरासत में, संसद मार्च से पहले पुलिस की कार्रवाई
श्री बंगला साहिब से शुरू हुआ था पैदल मार्च

दिल्ली में गुरुवार को सिरसा और पंजाब-हरियाणा से आए करीब 100 सिख प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। ये सभी 1984 सिख दंगों से जुड़े बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर संसद तक पैदल मार्च निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारी पहले श्री बंगला साहिब गुरुद्वारा में एकत्र हुए थे और वहां से हाथों में हथकड़ी प्रतीक के रूप में पहनकर मार्च शुरू किया।
संसद की ओर बढ़ते ही पुलिस ने रोका
जैसे ही प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे से बाहर निकलकर आगे बढ़े, दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक लिया और हिरासत में लेकर अलग-अलग वैन में बैठा दिया। सूत्रों के अनुसार, सभी प्रदर्शनकारियों को चार वैन में लेकर पुलिस ने मौके से हटाया।
शांतिपूर्ण मार्च का दावा, पुलिस पर धक्का-मुक्की के आरोप
प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि वे शांतिपूर्ण तरीके से संसद की ओर जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने धक्का-मुक्की करते हुए उन्हें हिरासत में लिया। उनका कहना है कि वे 35 साल से जेल में बंद सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं, जिनकी सजा पूरी हो चुकी है।
1984 दंगों के बंदियों की रिहाई की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 1984 सिख दंगों के दौरान सजा पाए कई बंदी अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, फिर भी उन्हें रिहा नहीं किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने संसद तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी।
1984 दंगों की पृष्ठभूमि
1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली समेत कई शहरों में हजारों सिखों की हत्या हुई थी और यह घटना भारत के सबसे संवेदनशील दंगों में गिनी जाती है।
मामले पर तनावपूर्ण माहौल
हिरासत के बाद प्रदर्शनकारियों में नाराजगी देखी गई और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। फिलहाल सभी को पुलिस निगरानी में रखा गया है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।




