झारखंड कांग्रेस में खुलकर सामने आई अंदरूनी कलह
“एक को साधिए, सब सध जाएगा” कहकर राधाकृष्ण किशोर ने संगठन पर उठाए सवाल

झारखंड कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। राधाकृष्ण किशोर ने “एक को साधिए, झारखंड में सब सध जाएगा” कहकर प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।
वित्त मंत्री ने प्रदेश प्रभारी के. राजू को पत्र लिखकर कहा कि प्रदेश कांग्रेस स्थानीय और संवेदनशील मुद्दों पर लगातार मौन बनी हुई है। उन्होंने कहा कि केवल संगठन का आकार बढ़ाने से पार्टी मजबूत नहीं होगी।
“628 सदस्य बना देने से भी फर्क नहीं पड़ेगा”
राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में कहा कि प्रदेश कमेटी की संख्या 314 से बढ़ाकर 628 कर देने से भी कोई लाभ नहीं होगा, यदि पार्टी जनता से जुड़े मुद्दों पर मुखर नहीं होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी हित में अपनी बात सार्वजनिक करना पार्टी विरोध नहीं माना जाना चाहिए। यदि नेतृत्व इसे अनुशासनहीनता समझता है, तो वह नेतृत्व का हर निर्णय स्वीकार करने को तैयार हैं।
प्रधानमंत्री और भाजपा पर भी साधा निशाना
मेदिनीनगर में आयोजित प्रमंडलीय मुखिया सम्मेलन के दौरान राधाकृष्ण किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर भी तीखा पलटवार किया।
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस को “अर्बन नक्सलियों का गिरोह” कहा जा रहा है, तो भाजपा और प्रधानमंत्री “अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के गढ़” हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश को आजादी दिलाने वाली पार्टी है और सेवा की राजनीति करती है।
दरअसल, भाजपा मुख्यालय में दिए गए एक भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर नक्सली विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था और उसे “अर्बन नक्सलियों का गिरोह” बताया था।
कांग्रेस नेताओं ने किया जवाबी बचाव
प्रदेश कांग्रेस की ओर से पार्टी नेताओं ने राधाकृष्ण किशोर के आरोपों का जवाब भी दिया। नेताओं का कहना है कि महिला आरक्षण, जेटेट से मगही-भोजपुरी भाषा हटाने और अनुसूचित जाति आयोग जैसे मुद्दों पर पार्टी लगातार सक्रिय रही है।
उन्होंने बताया कि मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, रमा खलखो और अन्य नेताओं ने कई मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस और विरोध कार्यक्रम किए हैं।
पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि राधाकृष्ण किशोर को अपनी बात पार्टी मंच पर रखनी चाहिए थी, सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंच पर नहीं।
संगठन में बढ़ सकती है सियासी हलचल
राधाकृष्ण किशोर के इस बयान के बाद झारखंड कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन की भूमिका को लेकर मतभेद अब सार्वजनिक रूप ले चुके हैं।
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