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कोलायत के डेह में 4 खानों पर लगेगी बोली

बॉल क्ले, बजरी और सिलिका सेंड के ऑक्शन से 2 करोड़ से अधिक राजस्व की उम्मीद

बीकानेर। राजस्व बढ़ाने और खनिज संसाधनों के दोहन को गति देने के लिए कोलायत तहसील के डेह क्षेत्र में बॉल क्ले, बजरी, सिलिका सेंड और मुर्रम की 4 खानों का ऑक्शन किया जाएगा। इन खानों की नीलामी से खान विभाग को 2 करोड़ रुपए से अधिक राजस्व मिलने की संभावना है।

भू वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के बाद तय हुए प्लॉट
भू वैज्ञानिकों ने फरवरी माह में कोलायत के डेह क्षेत्र में बॉल क्ले, बजरी, सिलिका सेंड और मुर्रम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता की रिपोर्ट खनि अभियंता को सौंपी थी। इसके बाद संबंधित क्षेत्र का सर्वे कर चार प्लॉट चिन्हित किए गए। मार्च में इन प्लॉट्स के ऑक्शन प्रस्ताव खान निदेशालय को भेजे गए, जिस पर विचार के बाद निदेशालय ने निविदा जारी कर दी।

11-12 मई तक होगी ई-नीलामी
इन चारों प्लॉट्स के लिए 11 और 12 मई तक बोली प्रक्रिया चलेगी। सबसे अधिक बोली लगाने वाले आवेदक को खनन पट्टा आवंटित किया जाएगा। बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफल बोलीदाता को पहले 15 दिनों में 40 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी, जबकि शेष राशि तीन किश्तों में जमा कराई जा सकेगी।

सरकारी भूमि पर होंगे खनन कार्य
चारों प्लॉट सरकारी भूमि पर स्थित हैं। इनके ऑक्शन के बाद न केवल विभाग को प्रारंभिक राजस्व मिलेगा, बल्कि खनन शुरू होने के बाद रॉयल्टी के रूप में भी नियमित आय होती रहेगी। साथ ही क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

कोलायत की क्ले देशभर में मशहूर
कोलायत क्षेत्र क्ले-बजरी के विशाल भंडार के लिए जाना जाता है। देश की करीब 80 प्रतिशत क्ले कोलायत क्षेत्र में पाई जाती है। यहां से निकाली जाने वाली क्ले देश-विदेश में भेजी जाती है, जहां इसका उपयोग सिरेमिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।

सिरेमिक इंडस्ट्री को मिलेगा बूस्ट
कोलायत की क्ले अपनी गुणवत्ता के कारण देश और विदेश के सिरेमिक बाजार में विशेष पहचान रखती है। यहां से निकलने वाले खनिज का उपयोग बड़े पैमाने पर सिरेमिक टाइल्स, सैनेटरी वेयर और इंसुलेटर बनाने में किया जाता है। नई खानों के आवंटन से सिरेमिक उद्योग को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध होगा, जिससे उद्योग को मजबूती मिलेगी।

रोजगार और राजस्व दोनों बढ़ेंगे
नई खानों के संचालन से स्थानीय स्तर पर श्रमिकों को रोजगार मिलेगा। परिवहन, लोडिंग, प्रोसेसिंग और सप्लाई से जुड़े कार्यों में भी लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ होगा। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि राज्य सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।

पर्यावरण मंजूरी के बाद शुरू होगा खनन
खनन शुरू करने से पहले सफल बोलीदाताओं को पर्यावरण स्वीकृति और ‘कन्सेंट टू ऑपरेट’ लेना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही खनन कार्य शुरू किया जा सकेगा।

अधिकारी बोले
एमपी पुरोहित ने बताया कि कोलायत के डेह क्षेत्र में क्ले-बजरी के चार प्लॉट्स पर बोली प्रक्रिया जारी की गई है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद सबसे अधिक बोली लगाने वालों को नियमानुसार राशि जमा करानी होगी। पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद ही खनन कार्य शुरू किया जाएगा।

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