सिरसा में गेहूं भुगतान अटका, किसान परेशान
72 घंटे के दावे फेल, 20 दिन बाद भी खातों में नहीं पहुंचे पैसे

सिरसा की अनाज मंडियों में सरकारी खरीद के तहत गेहूं बेचने वाले किसानों की पेमेंट अटक गई है। किसानों का कहना है कि फसल बेचे 15 से 20 दिन से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब तक उनके खातों में पैसे नहीं पहुंचे। कई किसानों की 4 से 5 लाख रुपये तक की रकम फंसी हुई है, जिससे आर्थिक परेशानी बढ़ती जा रही है।
उठान में देरी बनी मुख्य वजह
गोदाम तक अनाज पहुंचने से पहले नहीं मिलती पेमेंट
किसानों और किसान नेताओं के मुताबिक, मंडियों से गेहूं का उठान समय पर नहीं हो रहा है। एजेंसियों द्वारा लापरवाही के कारण अनाज कई दिनों तक मंडियों में ही पड़ा रहता है। नियमों के अनुसार जब तक गेहूं गोदाम में नहीं पहुंचता, तब तक भुगतान जारी नहीं किया जाता, जिससे देरी और बढ़ रही है।
पोर्टल की गड़बड़ी से भी बढ़ी मुश्किल
रजिस्ट्रेशन में त्रुटियों के कारण फसल नहीं बेच पा रहे किसान
कई किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण कराया, लेकिन तकनीकी समस्याओं के चलते उनकी फसल गलत श्रेणी में दर्ज हो गई। इससे वे न तो फसल बेच पा रहे हैं और न ही रिकॉर्ड ठीक करवा पा रहे हैं। किसान विभागों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी
संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में लिया जाएगा फैसला
किसान नेताओं का कहना है कि सरकार का 72 घंटे में भुगतान का दावा पूरी तरह विफल साबित हुआ है। संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। किसानों ने संकेत दिए हैं कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जा सकता है।
प्रशासन ने झाड़ा पल्ला
मार्केट कमेटी बोली—पेमेंट एजेंसी का काम
मार्केट कमेटी अधिकारियों का कहना है कि भुगतान करना एजेंसियों का कार्य है और इसमें उनका कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं है।
आर्थिक संकट में किसान
कर्ज और खर्च के बीच फंसे हालात
भुगतान में देरी के कारण किसान कर्ज, बुवाई और घरेलू खर्चों को लेकर दबाव में हैं। समय पर भुगतान न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।




