20 साल की युवती को बाल विवाह से मिली आजादी
9 साल की उम्र में हुई थी शादी, फैमिली कोर्ट ने 12 साल बाद किया निरस्त

Jodhpur की 20 वर्षीय युवती को आखिरकार उसके बाल विवाह से कानूनी मुक्ति मिल गई। महज 9 साल की उम्र में समाज के दबाव में उसकी शादी कर दी गई थी। करीब 12 साल बाद जोधपुर के पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 ने इस बाल विवाह को निरस्त कर युवती को नई जिंदगी दी है।
“अब मैं आजाद हूं, अपना भविष्य संवारूंगी”
फैसले के बाद बीए प्रथम वर्ष की छात्रा ने कहा कि बाल विवाह की बेड़ियां उसे कभी मंजूर नहीं थीं। उसने बताया कि सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी और चाइल्ड एंड वूमेन राइट्स एडवोकेट Dr. Kriti Bharti की मदद से उसे हिम्मत मिली और अब वह अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए आगे बढ़ेगी।
समाज के दबाव में बचपन में कर दी गई थी शादी
जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 में जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में युवती का बाल विवाह कर दिया गया था। उस समय उसकी उम्र केवल 9 साल थी। बड़ी होने पर युवती ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया।
करीब सवा साल पहले युवती ने डॉ. कृति भारती की सहायता से पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 में विवाह निरस्तीकरण का वाद दायर किया था।
कोर्ट में सामने आए पुख्ता सबूत
सुनवाई के दौरान मामला उस समय दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया जब कथित पति ने बाल विवाह होने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद युवती की ओर से बाल विवाह से जुड़े कई मजबूत सबूत कोर्ट में पेश किए गए, जिससे सच्चाई सामने आ गई।
जज ने कहा- समाज की सोच बदलना जरूरी
पारिवारिक न्यायालय संख्या-2 के जज Varun Talwar ने मामले में फैसला सुनाते हुए युवती के बाल विवाह को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि बाल विवाह जैसी कुरीति को खत्म करने के लिए समाज की मानसिकता बदलना बेहद जरूरी है।
#HamareMath #GiriReporter #MandiDabwali #BhagwaHindustan #BhagwaHindusthan




