ब्लिंकिट-स्विगी से 5 किलो से ज्यादा चीनी नहीं मिलेगी: 35% महंगी होने के बाद खरीद पर लिमिट; डीमार्ट-रिलायंस ने भी लगाई कैपिंग
एक महीने में चीनी ₹48 से बढ़कर ₹65.05 प्रति किलो हुई; त्योहारी सीजन से पहले जमाखोरी रोकने के लिए ऑनलाइन-ऑफलाइन स्टोर्स ने खरीद सीमा तय की

नई दिल्ली। देश में चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी के बीच ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेल प्लेटफॉर्म्स ने इसकी खरीद पर सीमा तय करनी शुरू कर दी है। ब्लिंकिट, स्विगी इंस्टामार्ट और अन्य क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहक एक बार में सीमित मात्रा में ही चीनी खरीद सकेंगे। डीमार्ट और रिलायंस रिटेल जैसे बड़े स्टोर्स ने भी प्रति ग्राहक खरीद की सीमा तय की है।
उपभोक्ता मामले विभाग के मुताबिक, 26 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत ₹65.05 प्रति किलो पहुंच गई। 26 जुलाई को यह करीब ₹48 प्रति किलो थी। यानी महज एक महीने में चीनी की कीमत 35.5% से ज्यादा बढ़ गई।
ब्लिंकिट, स्विगी और बिगबास्केट पर तय हुई सीमा
रिटेल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी रोकने के लिए खरीद की सीमा लगाई गई है।
- ब्लिंकिट: अधिकतम 5 किलो
- स्विगी इंस्टामार्ट: 1-1 किलो के 2 पैकेट या 5 किलो का 1 पैक
- बिगबास्केट: अलग-अलग ब्रांड मिलाकर अधिकतम 6 किलो
- डीमार्ट/रिलायंस रिटेल: प्रति ग्राहक 2 से 3 किलो
प्रमुख चीनी ब्रांड्स से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, रिटेलर्स का उद्देश्य सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाना और जमाखोरी को रोकना है।
थोक बाजार में भी 34% तक बढ़े दाम
चीनी की कीमतों में तेजी थोक बाजार में भी देखने को मिल रही है। यहां कीमत करीब ₹45 से बढ़कर ₹60.36 प्रति किलो तक पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई के अंत से अगस्त के दौरान चीनी के दाम लगातार बढ़े हैं।
चीनी की कीमत बढ़ने के 3 बड़े कारण
1. उत्पादन में गिरावट का अनुमान
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 मार्केटिंग ईयर में एथेनॉल ब्लेंडिंग के बाद देश में चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रह सकता है।
2. घरेलू खपत उत्पादन के करीब
भारत में सालाना घरेलू चीनी खपत करीब 280 लाख टन है। उत्पादन खपत से कम रहने की आशंका के कारण सप्लाई पर दबाव बढ़ा है।
3. क्लोजिंग स्टॉक घटने की आशंका
ISMA के अनुसार सितंबर के अंत तक देश में चीनी का क्लोजिंग स्टॉक करीब 35 लाख टन रह सकता है। कम स्टॉक के अनुमान ने भी कीमतों को प्रभावित किया है।
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता
रक्षाबंधन के बाद गणेशोत्सव, नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहार आने वाले हैं। इस दौरान मिठाइयों और चीनी से बने खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में तेजी का सीधा असर घरेलू राशन बजट के साथ मिठाई कारोबार पर भी पड़ सकता है।
एक महीने में चीनी करीब ₹17 प्रति किलो महंगी हुई है। अगर कीमतों में तेजी जारी रहती है तो त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी
कीमतों पर नियंत्रण और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को मंजूरी दी है। इसके साथ ही राज्यों को बाजारों में निगरानी बढ़ाने और जमाखोरी व सट्टेबाजी पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
व्यापारियों के स्टॉक पर भी पाबंदी
सरकार ने चीनी व्यापारियों और डीलरों के लिए स्टॉक सीमा भी लागू की है। नए नियमों के तहत महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी का कारोबार करने वाले डीलर 15 दिन से अधिक की खपत का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
इसके अलावा चीनी के आयात को टैक्स फ्री किया गया है और 30 सितंबर 2026 तक निर्यात पर रोक लगाई गई है। डीलरों के लिए 30 नवंबर तक 400 टन तक की स्टॉक लिमिट भी निर्धारित की गई है।




