ग्वालियर इंजीनियर की मौत के मामले में वकील समेत 3 पर FIR, 30 लाख की कथित मांग का आरोप
पॉक्सो केस खत्म कराने के नाम पर पहले 30 लाख रुपए देने का दावा, फिर दोबारा 30 लाख मांगने का आरोप; सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच तेज की

ग्वालियर। ग्वालियर में 26 वर्षीय इंजीनियर लव उर्फ लवजीत राणा की मौत के मामले में पुलिस ने जांच के बाद अधिवक्ता समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, मृतक पर दर्ज पॉक्सो मामले को खत्म कराने के नाम पर कथित तौर पर रकम मांगने और मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप सामने आए हैं।
पुलिस ने मर्ग जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान, मोबाइल रिकॉर्ड, ऑडियो रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर लोकेशन सहित अन्य तथ्यों की जांच की। इसके बाद गोला का मंदिर थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया।
पॉक्सो केस में आरोपी था मृतक
पुलिस जांच के अनुसार, लवजीत राणा के खिलाफ अप्रैल 2025 में डबरा थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले को लेकर उसके परिवार से कथित तौर पर रकम की मांग किए जाने की बात सामने आई है।
परिवार का आरोप है कि मामले से राहत दिलाने के नाम पर पहले ही 30 लाख रुपए दिए जा चुके थे। बताया गया कि 24 अप्रैल को 20 लाख और 7 मई को 10 लाख रुपए अलग-अलग स्थानों पर दिए गए थे।
पुलिस अब इन लेन-देन और उनसे जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है।
दोबारा 30 लाख मांगने का आरोप
परिवार की ओर से लगाए गए आरोप के मुताबिक, पहले रकम देने के बावजूद बाद में दोबारा 30 लाख रुपए की मांग की गई। आरोप है कि पॉक्सो मामले को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
मृतक के परिवार का कहना है कि इसी मानसिक दबाव के चलते लवजीत काफी परेशान था। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
सुसाइड नोट में खुद को बताया था निर्दोष
पुलिस के अनुसार, लवजीत ने मौत से पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा था। इसमें उसने खुद को मामले में निर्दोष बताते हुए कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
20 दिसंबर 2025 को जहर खाने के बाद लवजीत की तबीयत बिगड़ गई थी। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की।
पुलिस ने ऑडियो और मोबाइल रिकॉर्ड भी खंगाले
मर्ग जांच के दौरान पुलिस ने मामले से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा मोबाइल फोन से संबंधित रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, टावर लोकेशन और उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग की भी जांच की गई।
पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आत्महत्या के लिए विवश करने और कथित अवैध वसूली से जुड़े आरोपों में FIR दर्ज की गई है।
आगे की जांच जारी
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस अब मामले में नामजद आरोपियों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित रूप से दिए गए 30 लाख रुपए और बाद में की गई मांग से जुड़े आरोपों में वास्तविक तथ्य क्या हैं।
फिलहाल आरोपियों पर लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और उनकी कानूनी स्थिति अदालत में होने वाली आगे की कार्रवाई से तय होगी।




