हरियाणा में बारिश के आसार, फिर भी गर्मी-उमस से राहत नहीं
31 अगस्त को पंचकूला समेत 5 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना, हिसार में 38.8°C तापमान; महेंद्रगढ़ में बारिश की कमी से बाजरे की फसल प्रभावित

हरियाणा में मानसून की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं, जिसके चलते प्रदेश के लोगों को गर्मी और उमस से फिलहाल पूरी तरह राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार 31 अगस्त को पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और करनाल में अलग-अलग स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि अगले कुछ दिनों में प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी छिटपुट बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। फिलहाल किसी भी जिले के लिए येलो या ऑरेंज अलर्ट जारी नहीं किया गया है। रविवार को प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद तापमान सामान्य से करीब 1.8 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा और हिसार में प्रदेश का सबसे अधिक तापमान 38.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। बारिश की कमी का असर किसानों पर भी दिखाई दे रहा है। महेंद्रगढ़ जिले के मंढाणा, सेका और कादीपुरी सहित कई गांवों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण बाजरे की फसल प्रभावित होकर जलने की शिकायत सामने आई है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है और उन्होंने सरकार से मुआवजे की मांग की है। मानसूनी सीजन के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 30 अगस्त के बीच कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। जींद में बारिश की कमी 57 प्रतिशत, अंबाला और सिरसा में 51-51 प्रतिशत, कैथल में 50 प्रतिशत, रोहतक में 43 प्रतिशत और करनाल में 41 प्रतिशत तक बताई गई है। महेंद्रगढ़ में इस अवधि में 286.6 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम है, जबकि हिसार में 198.3 मिमी बारिश दर्ज हुई और यहां सामान्य से 19 प्रतिशत कम बारिश हुई। दूसरी ओर गुरुग्राम में 410.3 मिमी बारिश सामान्य से 11 प्रतिशत अधिक और पलवल में सामान्य से 23 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। फतेहाबाद में 211.8 मिमी बारिश सामान्य के आसपास रही, जबकि भिवानी में 260.6 मिमी बारिश सामान्य से 7 प्रतिशत अधिक रही। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले दिनों में कहीं-कहीं बारिश होने से तापमान में मामूली गिरावट संभव है, लेकिन बादलों के साथ बढ़ी नमी के कारण उमस बनी रह सकती है। ऐसे में हरियाणा के कुछ जिलों में बारिश की उम्मीद जरूर है, लेकिन फिलहाल प्रदेशभर में तेज बारिश या मौसम संबंधी बड़े अलर्ट के संकेत नहीं हैं। किसानों के लिए बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बाजरे और अन्य खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है।




