
2027 में 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव, करीब 22% वोटर युवा; 5% वोट इधर-उधर हुआ तो बदल सकता है सत्ता का समीकरण
नई दिल्ली। जेन-जी यानी 18 से 29 साल के मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने राजनीतिक दलों की रणनीति पर असर डालना शुरू कर दिया है। अगले साल उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में युवा मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने वाली अहम ताकत बन सकते हैं।
इसके पीछे हालिया युवा आंदोलनों और कुछ उपचुनावों के नतीजों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन-जी युवाओं ने करीब 36 दिन तक प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में NEET पेपर लीक मामले को लेकर कार्रवाई और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल थी।
7 राज्यों में करीब 22% युवा वोटर
आंकड़ों के मुताबिक, इन सात चुनावी राज्यों में 18 से 29 वर्ष के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 22% है। यानी हर पांच मतदाताओं में लगभग एक युवा है। राजनीतिक दल अब इस वर्ग की पसंद, मुद्दों और मतदान व्यवहार को गंभीरता से देख रहे हैं।
5% वोट का बदलाव भी अहम
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर युवा मतदाताओं के एक छोटे हिस्से का रुझान भी किसी एक पार्टी से दूसरी पार्टी की तरफ जाता है, तो कई सीटों पर मुकाबले का गणित बदल सकता है। खासतौर पर करीबी मुकाबले वाली सीटों पर 5% तक वोट का स्विंग सरकार बनाने या सत्ता से बाहर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
युवा वोटर बन रहा नया चुनावी फैक्टर
अब तक राजनीतिक दल चुनावी रणनीति में महिला, किसान, दलित, पिछड़ा वर्ग और अन्य सामाजिक समूहों पर खास ध्यान देते रहे हैं। जेन-जी की बढ़ती संख्या और राजनीतिक सक्रियता के बाद युवा मतदाता भी एक अलग चुनावी समूह के रूप में उभर रहा है।
आने वाले विधानसभा चुनावों में रोजगार, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, पेपर लीक, महंगाई, सोशल मीडिया और राजनीतिक पारदर्शिता जैसे मुद्दे युवा मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं




