निकाय चुनाव से पहले करोड़ों के नकली नोट खपाने की तैयारी: जयपुर में 4 आरोपी गिरफ्तार, बांग्लादेश से आने वाली थी बड़ी खेप
ट्रायल के लिए 4.30 लाख रुपए के नकली नोट मंगवाए गए थे; बाजार में आसानी से चलने पर चुनाव से पहले करोड़ों की फेक करेंसी लाने की थी तैयारी

राजस्थान में आगामी निकाय चुनावों से पहले करोड़ों रुपए के नकली नोट बाजार में खपाने की कथित तैयारी का खुलासा जयपुर पुलिस ने किया है। पुलिस के मुताबिक 21 अगस्त को बजाज नगर थाना पुलिस और CST की संयुक्त कार्रवाई में हरियाणा के रोहतक निवासी अंशुल, प्रियांशु और आकाश तथा सीकर निवासी साहिल चौधरी को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से 500-500 रुपए के 861 नकली नोट, यानी कुल 4 लाख 30 हजार 500 रुपए की फेक करेंसी बरामद की गई। पुलिस के अनुसार यह खेप फिलहाल ट्रायल के लिए मंगाई गई थी और आरोपियों का मकसद यह जांचना था कि ये नोट बाजार में कितनी आसानी से चल सकते हैं। अगर ट्रायल सफल रहता तो निकाय चुनाव से पहले करोड़ों रुपए की नकली करेंसी की बड़ी खेप जयपुर मंगाने की तैयारी थी। बरामद नोटों की क्वालिटी इतनी बेहतर बताई गई कि पहली नजर में उन्हें पहचानना मुश्किल था। नोटों के कागज, रंग, प्रिंटिंग और पैटर्न को असली नोटों की तरह तैयार किया गया था। पुलिस को नकली करेंसी की पुष्टि के लिए अल्ट्रावॉयलेट यानी UV मशीन का इस्तेमाल करना पड़ा। जांच के दौरान सिक्योरिटी थ्रेड, वॉटरमार्क और अन्य सुरक्षा फीचर्स में अंतर सामने आया। पुलिस के मुताबिक पकड़े गए नोट दो सीरीज में थे और इनमें से एक सीरीज का इस्तेमाल मूल रूप से 100 रुपए के नोटों के लिए किया जाता है, जिसे कथित तौर पर 500 रुपए के नकली नोटों पर इस्तेमाल किया गया। जांच में सामने आया कि सीकर का साहिल चौधरी करीब दो साल से रोहतक निवासी अमन राणा के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार अमन राणा कोलकाता से इस नेटवर्क को संचालित कर रहा था और बांग्लादेश के ढाका में प्रिंट किए गए नकली नोटों को तस्करों के जरिए भारत मंगवाता था। खेप पहले कोलकाता पहुंचती और वहां से अलग-अलग रिसीवरों के माध्यम से आगे सप्लाई की जाती थी। पुलिस का दावा है कि साहिल वर्ष 2025 में अमन राणा से मिलने कोलकाता गया था और इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा। इसी दौरान अंशुल, प्रियांशु और आकाश भी उसके संपर्क में आए। आरोपियों के मोबाइल से कोलकाता के एक होटल में उनके साथ पार्टी करने का वीडियो भी मिलने की बात पुलिस ने कही है। साहिल के बारे में यह भी सामने आया है कि वह USDT यानी क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कारोबार में था और इसी सिलसिले में नेटवर्क के कुछ लोगों के संपर्क में आया था। पुलिस अब कथित मास्टरमाइंड अमन राणा की तलाश कर रही है और मामले में बांग्लादेश कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। केंद्रीय एजेंसियों को भी आरोपियों से जुड़ी जानकारी भेजे जाने की बात सामने आई है। पुलिस जांच का अगला फोकस यह पता लगाने पर है कि नकली नोटों की छपाई कहां हुई, भारत में उन्हें कौन-कौन लोग रिसीव करते थे, अब तक कितनी खेप आ चुकी है और चुनाव से पहले करोड़ों रुपए की कथित सप्लाई की योजना में और कौन-कौन लोग शामिल थे। फिलहाल चारों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।




