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तरबूज बीज उद्योग पर गहराता संकट: ढाई साल से आयात बंद, सैकड़ों फैक्ट्रियां प्रभावित

स्थानीय उत्पादन 15-20 हजार मीट्रिक टन, जबकि सालाना जरूरत करीब 1 लाख टन; कच्चे माल की कमी से कारोबार और हजारों श्रमिकों की आजीविका पर संकट

गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़े तरबूज बीज यानी मगज उद्योग पर पिछले ढाई वर्षों से कानूनी आयात व्यवस्था बंद होने के कारण संकट लगातार गहराता जा रहा है। उद्योग संगठनों के अनुसार देश में तरबूज बीज का स्थानीय उत्पादन महज 15 से 20 हजार मीट्रिक टन के आसपास है, जबकि प्रोसेसिंग प्लांट्स और उद्योग की सालाना मांग करीब 1 लाख मीट्रिक टन है। घरेलू उत्पादन और मांग के बीच इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद आयात व्यवस्था लंबे समय से बंद रहने के कारण प्रोसेसिंग यूनिट्स को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसका असर सैकड़ों फैक्ट्रियों और उनसे जुड़े हजारों श्रमिकों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है। राजस्थान तरबूज मगज इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और गुजरात वॉटरमेलन सीड प्रोसेसर एसोसिएशन ने इस समस्या को लेकर केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और DGFT को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उद्योग संगठनों का कहना है कि कच्चे माल की कमी के कारण कई प्रोसेसिंग प्लांट मंदी की स्थिति में पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ यूनिट्स में कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों, कामगारों और उनके परिवारों की आय पर पड़ रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों ने यह भी दावा किया है कि कानूनी आयात के रास्ते बंद होने से नेपाल बॉर्डर के रास्ते मिसडिक्लेरेशन और गैरकानूनी तस्करी की गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार तस्कर गलत घोषणा के जरिए तरबूज बीज की सप्लाई कर रहे हैं, जिससे कानूनी कारोबार करने वाले व्यापारियों को नुकसान होने के साथ सरकार को भी राजस्व की क्षति हो रही है। उद्योग संगठनों का कहना है कि जब देश में मांग के मुकाबले घरेलू उत्पादन बेहद कम है, तब कानूनी आयात के रास्ते बंद रहने से समस्या और गंभीर हो जाती है। उनका तर्क है कि यदि पर्याप्त मात्रा में वैध तरीके से कच्चा माल उपलब्ध कराया जाए तो उद्योग अपनी क्षमता के अनुसार उत्पादन कर सकता है और हजारों लोगों को रोजगार मिलता रहेगा। व्यापारी और प्रोसेसर अब सरकार से मौजूदा आयात नीति की समीक्षा करने और तरबूज बीज के आयात को लेकर व्यावहारिक नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। उद्योग की प्रमुख मांग है कि आयात को सीमित कोटे में बांधने के बजाय मुक्त और खुला किया जाए, ताकि प्रोसेसिंग इकाइयों को जरूरत के अनुसार कच्चा माल मिल सके। उनका कहना है कि कानूनी आयात व्यवस्था बहाल होने से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी, अवैध तस्करी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी और उद्योग से जुड़े श्रमिकों की आजीविका भी सुरक्षित रह सकेगी। अब उद्योग जगत की नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है, क्योंकि यदि कच्चे माल की उपलब्धता का संकट जल्द दूर नहीं हुआ तो तरबूज बीज प्रोसेसिंग से जुड़े कारोबार और रोजगार पर इसका असर और व्यापक हो सकता है।

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