Welcome to भगवा हिन्दुस्तान   Click to listen highlighted text! Welcome to भगवा हिन्दुस्तान
patna

PMCH में डॉक्टरों की भारी कमी, 589 में 203 फैकल्टी पद खाली

मेडिसिन विभाग में 40 स्वीकृत पदों पर सिर्फ 9 शिक्षक, रोज 3 हजार से ज्यादा मरीजों का दबाव; बर्न और सर्जरी समेत कई विभाग भी स्टाफ संकट से जूझ रहे

पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में डॉक्टरों और मेडिकल शिक्षकों की भारी कमी के कारण मरीजों के इलाज के साथ-साथ मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और क्लिनिकल ट्रेनिंग पर भी दबाव बढ़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक PMCH में कुल 589 स्वीकृत फैकल्टी पदों में से केवल 386 पर डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 203 पद खाली पड़े हैं। सबसे ज्यादा कमी असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर पर है, जहां 318 स्वीकृत पदों में से 247 रिक्त बताए गए हैं। वहीं 96 स्वीकृत प्रोफेसर पदों में 38 और 175 एसोसिएट प्रोफेसर पदों में 101 पद खाली हैं। अस्पताल में रोजाना 3 हजार से अधिक मरीज ओपीडी और इमरजेंसी में पहुंचते हैं, जिनमें करीब 2 हजार से 2200 मरीज उन विभागों में इलाज के लिए आते हैं जहां फैकल्टी की कमी ज्यादा है। सबसे गंभीर स्थिति मेडिसिन विभाग की बताई गई है, जहां रोजाना करीब 400 से 500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं, लेकिन 40 स्वीकृत फैकल्टी पदों के मुकाबले सिर्फ 9 शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें 9 प्रोफेसर पदों पर 3, 12 एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर सिर्फ 1 और 19 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर 5 शिक्षक ही काम कर रहे हैं। इसी तरह 60 बेड वाले बर्न वार्ड में महज एक एसोसिएट प्रोफेसर के कार्यरत होने की बात सामने आई है, जबकि यहां गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को लगातार विशेषज्ञ निगरानी की जरूरत होती है और एक वरिष्ठ शिक्षक पर पीजी डॉक्टरों की ट्रेनिंग की जिम्मेदारी भी है। सर्जरी विभाग में 5 स्वीकृत प्रोफेसर पदों में सिर्फ 2 प्रोफेसर कार्यरत हैं। इसके अलावा रेडियोलॉजी, चेस्ट एवं रेस्पिरेटरी मेडिसिन, एनेस्थीसिया, ईएनटी, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, स्किन और अन्य विभागों में भी स्वीकृत पदों की तुलना में फैकल्टी कम बताई गई है। फैकल्टी के अलावा ट्यूटर, डिमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट के 229 स्वीकृत पदों में भी 110 खाली हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक वरिष्ठ डॉक्टरों की कमी का असर वार्ड राउंड, जटिल मरीजों के इलाज, इमरजेंसी सुपरविजन और पीजी छात्रों की क्लिनिकल ट्रेनिंग पर पड़ सकता है। कई विभागों में पहले से सीमित संख्या में डॉक्टर होने के कारण किसी एक वरिष्ठ चिकित्सक के अवकाश या अनुपस्थिति से भी व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव आने की आशंका है। PMCH में 250 एमबीबीएस और 250 पीजी सीटों पर छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाता है, ऐसे में लंबे समय तक फैकल्टी की कमी बने रहने पर मेडिकल शिक्षा से जुड़े मानकों को पूरा करना संस्थान के लिए चुनौती बन सकता है। हालांकि, केवल रिक्त पदों के आंकड़ों के आधार पर पीजी सीटों की मान्यता खत्म होने की बात कहना उचित नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए संबंधित निरीक्षण और निर्धारित मानकों के अनुपालन की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि राज्य के बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल PMCH में मरीजों की संख्या लगातार अधिक है, जबकि उनके इलाज, निगरानी और मेडिकल शिक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले डॉक्टरों के स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा खाली पड़ा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!