पटना में 24 घंटे में डेंगू के 10 नए केस, अगस्त में आंकड़ा 61 पहुंचा; जुलाई से ढाई गुना ज्यादा मरीज
बारिश के बाद एडीज मच्छरों का प्रजनन बढ़ा, जनवरी-जून में 44 केस थे; जुलाई में 26 और अगस्त के 19 दिनों में 61 मरीज मिले

पटना। राजधानी पटना में डेंगू संक्रमण की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। पिछले 24 घंटे में 10 नए मरीज सामने आए हैं। इसके साथ ही इस साल पटना में डेंगू के कुल मामलों की संख्या 131 हो गई है। इनमें अकेले अगस्त के पहले 19 दिनों में 61 मरीज मिले हैं।
अगस्त में डेंगू के मामले जुलाई की तुलना में तेजी से बढ़े हैं। जुलाई में पूरे महीने 26 मरीज सामने आए थे, जबकि अगस्त के केवल 19 दिनों में ही 61 मरीज मिल चुके हैं। अगस्त में अभी 11 दिन बाकी हैं।
जनवरी से जून तक पटना में डेंगू के 44 मामले सामने आए थे। जुलाई में 26 और 1 से 19 अगस्त के बीच 61 मरीज मिले। आंकड़ों के अनुसार अगस्त में प्रतिदिन औसतन 3.2 मरीज सामने आए, जबकि जुलाई में यह औसत करीब 0.84 मरीज प्रतिदिन था।
55 फीसदी मामले निजी अस्पतालों और लैब से
पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल के अनुसार, अब तक सामने आए कुल डेंगू मामलों में करीब 55 फीसदी की पुष्टि निजी अस्पतालों और जांच लैब में हुई है। स्वास्थ्य विभाग सरकारी और निजी दोनों स्वास्थ्य संस्थानों से मिलने वाले मामलों को अपने रिकॉर्ड में शामिल कर रहा है।
बारिश के बाद बढ़ा मच्छरों के प्रजनन का खतरा
बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में पानी जमा होने से डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छरों के प्रजनन का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार ये मच्छर बड़े जलजमाव के अलावा घरों में जमा थोड़े से साफ पानी में भी पनप सकते हैं।
कूलर, गमले, बाल्टी, पुराने बर्तन, टायर, छत पर पड़ा कबाड़ और छोटे गड्ढों में जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। इसलिए घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना जरूरी है।
फॉगिंग के साथ लार्वा नियंत्रण भी जरूरी
डेंगू नियंत्रण के लिए सिर्फ फॉगिंग पर्याप्त नहीं है। फॉगिंग से वयस्क मच्छरों की संख्या कम की जाती है, जबकि जमा पानी में मौजूद लार्वा को खत्म करने के लिए एंटी-लार्वा कार्रवाई जरूरी होती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू नियंत्रण के लिए प्रजनन स्थलों को खत्म करना, लार्वा नियंत्रण और जरूरत वाले इलाकों में फॉगिंग—तीनों स्तरों पर कार्रवाई जरूरी है।
तेज बुखार को नजरअंदाज न करें
डेंगू में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, कमजोरी, मितली और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेकर जांच कराना चाहिए।
डेंगू की आशंका में बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं लेने से बचना चाहिए। खासकर एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं। पर्याप्त तरल पदार्थ लेना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच व उपचार कराना महत्वपूर्ण है।




