फर्जी पासपोर्ट रैकेट में पांचवीं गिरफ्तारी, एजेंट नसीम अख्तर पकड़ा गया
फर्जी पासपोर्ट रैकेट में पांचवीं गिरफ्तारी, भोपाल से एजेंट नसीम अख्तर गिरफ्तार

बांग्लादेशी नागरिकों के कथित तौर पर फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट बनवाने के मामले में एसटीएफ की जांच में एजेंट नेटवर्क की जानकारी सामने आई है। जांच के अनुसार, गुजरात के कच्छ और महाराष्ट्र के नागपुर स्थित मठों के पते का इस्तेमाल कर भोपाल से करीब 25 से 30 पासपोर्ट बनवाए गए।
एसटीएफ ने इस मामले में पासपोर्ट एजेंट नसीम अख्तर को भोपाल से गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, नसीम ने पूछताछ में 20 से अधिक पासपोर्ट बनवाने की बात सामने आई है। पुलिस मामले में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों और पासपोर्ट धारकों की पहचान की जांच कर रही है।
20 हजार रुपए तक लिए जाने का दावा
जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने के लिए 20 हजार रुपए तक लिए जाते थे। पुलिस वेरिफिकेशन को छोड़कर आवेदन से लेकर पासपोर्ट बनवाने की अन्य प्रक्रिया एजेंट द्वारा संभाले जाने की बात सामने आई है।
एसटीएफ अब प्रत्येक पासपोर्ट में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों का अलग-अलग सत्यापन कर रही है।
पासपोर्ट कार्यालय के बाहर हुई थी मुलाकात
पूछताछ में नसीम ने बताया कि वह वर्ष 2016 से भोपाल के एमपी नगर क्षेत्र में टूर एंड ट्रैवल्स का काम करता था। बाद में वह पासपोर्ट एजेंट के तौर पर काम करने लगा।
इसी दौरान भोपाल स्थित पासपोर्ट कार्यालय के बाहर उसकी मुलाकात मित्यानंद भिक्षु उर्फ रेयाल चौधरी भिक्षु से हुई। जांच के अनुसार, इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा।
नसीम के कथित बयान के मुताबिक, मित्यानंद उसे पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों के नाम और दस्तावेज उपलब्ध कराता था। नसीम उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करता था।
नागपुर में भी दर्ज है मामला
एसटीएफ की जांच में नसीम अख्तर के खिलाफ नागपुर में पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। जांच एजेंसी अब उसके पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा मामले के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।
पांच आरोपी गिरफ्तार, 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ
एसटीएफ के अनुसार, इस मामले में प्रियान चौधरी, जय चौधरी, रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी के बाद नसीम अख्तर पांचवां गिरफ्तार आरोपी है।
जांच के लिए एसटीएफ की 6 टीमें अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई और पड़ताल कर रही हैं। करीब 25 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी दी गई है। अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।
2021-22 से नेटवर्क खड़ा करने का आरोप
जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि रियाल करीब 10 साल पहले भारत आया था और वर्ष 2021-22 के आसपास उसने बौद्ध भिक्षुओं के नाम पर कथित नेटवर्क तैयार करना शुरू किया।
एसटीएफ के अनुसार, इस नेटवर्क में कुछ लोगों के भारतीय नाम से दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
जांच के दौरान कुछ पासपोर्ट धारकों के वास्तविक नाम और पासपोर्ट में दर्ज नाम अलग पाए जाने की बात भी सामने आई है। एजेंसी अब इन दस्तावेजों की सत्यता के साथ-साथ संबंधित लोगों की विदेश यात्राओं के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
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