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जेसी मिल की 22.597 हेक्टेयर विवादित जमीन की नहीं होगी नीलामी, हाई कोर्ट ने कहा- मालिकाना हक सिविल कोर्ट तय करेगा

जेसी मिल की 22.597 हेक्टेयर जमीन की नहीं होगी नीलामी, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

ग्वालियर की जेसी मिल की देनदारियां चुकाने के लिए गोसपुरा स्थित 22.597 हेक्टेयर विवादित जमीन को नीलाम कर बेचने का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह जमीन उन संपत्तियों में शामिल नहीं है, जिन्हें बेचकर मिल के लेनदारों की देनदारियां चुकाई जा सकती हैं।

कोर्ट के अनुसार, इस जमीन के वास्तविक स्वामित्व का अंतिम फैसला सिविल कोर्ट में होगा। इसलिए जमीन को जेसी मिल की ऐसी संपत्ति मानकर नीलामी नहीं की जा सकती, जिसे बेचकर बकाया राशि की वसूली की जाए।

2018 के फैसले में मिल को माना गया था पट्टेदार

इस जमीन को लेकर वर्ष 2018 में डिवीजन बेंच का फैसला भी सामने आया था। उस फैसले में कहा गया था कि जेसी मिल इस जमीन की मालिक नहीं थी, बल्कि केवल पट्टेदार थी। मिल बंद होने के बाद जमीन मूल मालिक के पास वापस जाने की बात कही गई थी।

अब इसी जमीन पर कस्टम विभाग ने भी अपना दावा पेश किया है। पुराने राजस्व रिकॉर्ड में जमीन कस्टम विभाग के नाम भूमिस्वामी के तौर पर दर्ज होने की बात सामने आई है।

केंद्र सरकार ने रिकॉर्ड के आधार पर जताया दावा

कस्टम विभाग की ओर से हाई कोर्ट में कहा गया कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन पर उसका अधिकार है और इसे मध्य प्रदेश सरकार के नाम नहीं किया जा सकता।

वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने जमीन के इतिहास से जुड़े करीब एक सदी पुराने रिकॉर्ड और ग्वालियर रियासत के दौर की व्यवस्था का हवाला दिया। सरकार का पक्ष था कि जिस समय जमीन जेसी मिल को दी गई थी, उस समय ग्वालियर एक रियासत थी और ट्रेड, कस्टम एवं एक्साइज से संबंधित विभाग उसी रियासत के अधीन थे।

22 साल में तीन बार बदली जमीन की कानूनी स्थिति

जमीन के स्वामित्व को लेकर पिछले करीब दो दशक में अदालतों के सामने अलग-अलग दावे और फैसले आए हैं।

2004: कंपनी जज ने मध्य प्रदेश सरकार का दावा खारिज करते हुए जमीन को मिल की संपत्ति माना था।

2018: डिवीजन बेंच ने इस स्थिति को बदलते हुए कहा कि जेसी मिल जमीन की मालिक नहीं, बल्कि पट्टेदार थी।

2026: कस्टम विभाग ने पुराने सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर जमीन पर अपना अधिकार जताया। हाई कोर्ट ने कहा कि वास्तविक मालिक कौन है, इसका अंतिम निर्धारण सिविल कोर्ट करेगा।

फिलहाल विवादित जमीन को जेसी मिल की देनदारियां चुकाने के लिए नीलाम किए जाने की अनुमति नहीं है।

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