मध्य प्रदेश में अब तक कोटे की 82.3% बारिश, 12 जिलों में पूरा हुआ मानसूनी कोटा
सितंबर के पहले सप्ताह में बदला मौसम का मिजाज, मऊगंज में सबसे ज्यादा 53 इंच बारिश; भोपाल समेत कई जिलों में सामान्य से अधिक पानी, बांध और नदियां भी उफान पर

मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन बारिश का आंकड़ा लगातार बेहतर हो रहा है और सितंबर के पहले सप्ताह में सक्रिय रहे मानसूनी सिस्टम के कारण प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश का करीब 82.3 प्रतिशत पानी गिर चुका है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक करीब 778.9 मिलीमीटर यानी 30.7 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य तौर पर करीब 823.9 मिलीमीटर यानी 32.4 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अभी लगभग 1.7 इंच बारिश की कमी बनी हुई है, लेकिन हाल के दिनों में हुई तेज बारिश से यह अंतर लगातार कम हुआ है। भोपाल समेत 12 जिलों में मानसून का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है और इन जिलों में सामान्य से 101 से 146 प्रतिशत तक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज और शहडोल शामिल हैं। मऊगंज इस सीजन में सबसे अधिक बारिश वाले जिलों में बना हुआ है, जहां अब तक करीब 53 इंच पानी बरस चुका है, जबकि आलीराजपुर में सबसे कम करीब 13.6 इंच बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा बुरहानपुर, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, अनूपपुर और उमरिया में भी सामान्य बारिश का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दर्ज हो चुका है। सितंबर के पहले सप्ताह में सक्रिय रहे मजबूत मानसूनी सिस्टम ने प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में तेजी से सुधार किया। पहले पूर्वी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात बने, इसके बाद पश्चिमी, मध्य और उत्तरी हिस्सों में भी बारिश का दौर मजबूत हुआ। इसी वजह से सीजन की कुल बारिश सामान्य के काफी करीब पहुंच गई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अब बारिश सामान्य से थोड़ी अधिक बताई जा रही है, जबकि पश्चिमी हिस्से में अभी भी कमी बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में कुछ जिलों में तेज बारिश होने पर प्रदेश का कुल आंकड़ा सामान्य के और करीब पहुंच सकता है। लगातार बारिश का असर प्रदेश के जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। भोपाल के भदभदा और कलियासोत सहित कई बांधों में पानी तेजी से बढ़ा है और कुछ स्थानों पर गेट खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी करनी पड़ी। बरगी, बाणसागर, गोपीकृष्ण सहित कई बड़े जलाशयों में भी पर्याप्त पानी पहुंच चुका है, जबकि इंदिरा सागर, गांधी सागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, बरगी, ओंकारेश्वर, जौहिला और कुंडालिया जैसे बांधों में भी जलभराव का स्तर काफी ऊंचा बताया गया है। नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई नदियों में भी बारिश के कारण जलस्तर बढ़ा है। इस बार मध्य प्रदेश में मानसून की शुरुआत निर्धारित समय से करीब नौ दिन देरी से हुई थी और 24 जून को मानसून प्रदेश में पहुंचा था। शुरुआत में जून में सामान्य से करीब 30 प्रतिशत कम बारिश हुई, लेकिन जुलाई में स्थिति में सुधार आया। जुलाई के शुरुआती दिनों में मानसून के सक्रिय होने के बाद बारिश का आंकड़ा धीरे-धीरे बढ़ा और महीने के तीसरे सप्ताह में अच्छी बारिश हुई। अगस्त में भी कई दौर में तेज बारिश हुई, जिसका असर सितंबर की शुरुआत में और स्पष्ट दिखाई दिया। फिलहाल प्रदेश में 23 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि कई जिलों में अभी भी कमी बनी हुई है। पूर्वी क्षेत्र के बालाघाट, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है, हालांकि हाल के सप्ताह में इन इलाकों में हुई अच्छी बारिश से आंकड़ों में सुधार आया है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा सहित कई जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश के लिहाज से मऊगंज सबसे आगे है, जबकि 40 से 50 इंच के बीच बारिश वाले जिलों में मंडला, पन्ना, निवाड़ी, मैहर, सीधी, सतना, शहडोल और उमरिया शामिल हैं। भोपाल, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, शिवपुरी, गुना, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, उज्जैन, देवास, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, रीवा, सिंगरौली और अनूपपुर जैसे जिलों में 30 से 40 इंच के आसपास बारिश दर्ज की गई है। वहीं धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, रतलाम और मुरैना जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी 20 इंच से नीचे है। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में मानसून का कोटा पूरा हो चुका है और यहां सामान्य बारिश का करीब 101 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया है। राजगढ़ में भी निर्धारित कोटा पूरा हो गया है, जबकि सीहोर, रायसेन और विदिशा में अच्छी बारिश हुई है। इंदौर में अब तक करीब 21.6 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य कोटे का लगभग 63 प्रतिशत है और यहां अगले सप्ताह तेज बारिश की संभावना अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है। जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले सप्ताह अच्छी बारिश हुई, जिससे सीजन का आंकड़ा करीब 33 इंच तक पहुंच गया है। उज्जैन में अब तक करीब 22.4 इंच यानी सामान्य कोटे का 64 प्रतिशत पानी दर्ज हुआ है, जबकि ग्वालियर में करीब 27 इंच बारिश के साथ यह आंकड़ा सामान्य के 94 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में ग्वालियर, गुना और दतिया सहित कुछ जिलों में बारिश हुई तो वहां सामान्य से अधिक बारिश का आंकड़ा बन सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में बारिश का दौर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। हालांकि बारिश की गतिविधि क्षेत्रवार अलग-अलग रह सकती है। ऐसे में जिन इलाकों में नदियां और बांध पहले से ऊंचे जलस्तर पर हैं, वहां प्रशासन और लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। कुल मिलाकर इस मानसून सीजन की शुरुआत में पिछड़ने के बाद मध्य प्रदेश ने पिछले कुछ सप्ताह में बारिश की कमी को काफी हद तक पूरा किया है और अब प्रदेश सामान्य मानसूनी आंकड़े के काफी करीब पहुंच गया है। यदि अगले कुछ दिनों में पूर्वी और मध्य हिस्सों के साथ पश्चिमी जिलों में भी अच्छी बारिश होती है तो सीजन का कुल आंकड़ा सामान्य के आसपास या उससे ऊपर पहुंचने की संभावना बन सकती है।




